Punjab News: तो फिर होगा आंदोलन! भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर चेतावनी जारी, जानें क्यों नाराज हैं किसान
India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में कृषि को शामिल करने की आशंका से पंजाब के किसान संगठनों में नाराजगी है. किसान नेताओं ने बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है.

भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर पंजाब के किसान संगठनों का विरोध सामने आया है. संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ नेता बलबीर सिंह राजेवाल और किसान नेता डॉ. दर्शनपाल ने साफ किया है कि यदि इस समझौते में कृषि क्षेत्र को शामिल किया गया, तो इसके खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा. बता दें कि हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर किसान वर्ग में नाराजगी है और यह प्रतिक्रिया उन संकेतों के बाद आई है, जिनमें अमेरिकी कृषि उत्पादों के भारतीय बाजार में आने की बात सामने आ रही है.
अमेरिका की ओर से जारी बयान पर आपत्ति
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि अभी तक भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का आधिकारिक मसौदा सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन अमेरिका की कृषि सचिव द्वारा सोशल मीडिया पर दिए गए बयान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. उनके अनुसार उस बयान में अमेरिकी कृषि उत्पादों के भारतीय बाजार में प्रवेश की बात कही गई है. राजेवाल ने स्पष्ट किया कि किसान संगठन कृषि को इस समझौते में शामिल किए जाने के सख्त खिलाफ हैं और जरूरत पड़ी तो आंदोलन किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने किसानों को भारी सब्सिडी देता है, जबकि भारत के छोटे और सीमांत किसान पहले से ही लागत और बाजार अस्थिरता से जूझ रहे हैं. ऐसे में अमेरिकी सस्ते कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में आते हैं, तो घरेलू किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना लगभग असंभव हो जाएगा. इससे फसल के दाम गिरेंगे और किसानों की आय पर सीधा असर पड़ेगा.
संभावित कानून और तत्काल विरोध की रणनीति
बलबीर सिंह राजेवाल ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार मौजूदा संसद सत्र में बिजली संशोधन बिल और बीज बिल लाने की तैयारी में है. किसान संगठनों का मानना है कि ये दोनों कानून भी किसानों के हितों के खिलाफ हो सकते हैं. इसी वजह से आंदोलन की रणनीति पहले से तय की जा रही है.
जिस दिन बिजली संशोधन बिल या बीज बिल संसद में पेश होगा, उस दिन पंजाब में टोल प्लाजा तीन घंटे के लिए खोले जाएंगे. जैसे ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का मसौदा सार्वजनिक होगा और उसमें कृषि के शामिल होने की पुष्टि होगी, तुरंत आंदोलन शुरू किया जाएगा. किसान संगठन इस मुद्दे पर पूरे देश में समर्थन जुटाने की कोशिश करेंगे.
डॉ. दर्शनपाल का बयान और 2020 आंदोलन से तुलना
किसान नेता डॉ. दर्शनपाल ने कहा कि किसान संगठन केवल मसौदे का इंतजार कर रहे हैं और उसके सामने आते ही बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात 2020 जैसे बनते जा रहे हैं, जब तीन कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर में ऐतिहासिक किसान आंदोलन हुआ था. उनके अनुसार सरकार की नीतियां फिर से किसानों में असुरक्षा की भावना पैदा कर रही हैं.
डॉ. दर्शनपाल ने बताया कि 22 फरवरी को पंजाब में बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं के घरों के बाहर किसान प्रदर्शन करेंगे. उन्होंने दोहराया कि जिस दिन बिजली संशोधन बिल और बीज बिल संसद में पेश होंगे, उस दिन पूरे पंजाब में टोल प्लाजा तीन घंटे के लिए खोले जाएंगे. किसान नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन केवल चेतावनी है और यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.
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