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Gurmeet Ram Rahim Controversy: गुरमीत राम रहीम की परोल का हिमाचल से हरियाणा चुनाव तक है कनेक्शन! जानें- क्यों उठ रहे ये सवाल

Gurmeet Ram Rahim News: डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को इस साल 14 अक्टूबर को 40 दिन की परोल मिली थी और 15 अक्टूबर को वह उत्तर प्रदेश के बागपत में अपने आश्रम पहुंच गया.

Gurmeet Ram Rahim Parole Controversy: डेरा सच्चा सौदा (Dera Sacha Sauda) का प्रमुख गुरमीत राम रहीम इन दिनों परोल पर जेल से बाहर है. साथ ही गुरमीत राम रहीम अपने कामों से लगातार चर्चा में बना हुआ है और इस पर विवाद भी शुरू हो गया है. हरियाणा (Haryana) की बीजेपी सरकार (BJP Government) पर विपक्षी दलों के नेता गुरमीत राम रहीम को परोल दिलवाने का आरोप लगा रहे हैं. यही नहीं बीजेपी के कई नेताओं के गुरमीत राम रहीम से मुलाकात की वजह से भी राजनीति हो रही है.

सवाल ये है कि क्या राम रहीम को परोल सियासी मेहरबानी है और ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि गुरमीत राम रहीम का सत्संग कहने के लिए तो ऑनलाइन चल रहा है, लेकिन उसका चुनावी कनेक्शन हरियाणा से लेकर हिमाचल तक फिट एंड फाइन नजर आ रहा है. दरअसल गुरमीत राम रहीम को बलात्कार और हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा मिली हुई है. साल 2017 से राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल का कैदी है. हालांकि, कानून कैदियों को भी कुछ अधिकार देता है, तो उसी अधिकार का फायदा उठाकर गुरमीत राम रहीम जब चाहे जेल से बाहर आ जाता है और वैसे ही अपना दरबार सजा लेता है, जैसे पहले किया करता था.

15 अक्टूबर को बागपत के आश्रम पहुंचा था राम रहीम
इस बार 14 अक्टूबर को राम रहीम को 40 दिन की परोल मिली. 15 अक्टूबर को राम रहीम उत्तर प्रदेश के बागपत में डेरा सच्चा सौदा के आश्रम पहुंच गया. परोल मिलने के साथ ये शर्त लगाई गई थी कि इस दौरान राम रहीम डेरे से बाहर नहीं जा सकता. ऐसे में उसने पहले से ही ऑनलाइन दरबार सजाने का प्लान बना लिया था, बागपत पहुंचते ही उसने इसकी घोषणा भी कर दी. गुरमीत राम रहीम ने कहा, "हम फिर से आपके दर्शन के लिए यूपी के आश्रम पहुंच चुके हैं, आप लोगों को जैसा बताया जाए, वैसे ही मिलिएगा, दर्शन चलते रहेंगे और बातें होती रहेंगी, सारी बातें करेंगे बस अभी पहुंचे हैं."

म्यूजिक वीडियो किया लॉन्च
रेप का दोषी राम रहीम भले ही सिर्फ 40 दिनों के लिए जेल से बाहर आया हो, लेकिन उसके शाही अंदाज में कोई कमी न रह जाए, इसके लिए डेरे को कायदे से सजा-संवार दिया गया. सिरसा से साज संगीत का सामान मंगा लिया गया. ऐसा लग रहा था, जैसे यहां कोई पार्टी शुरू होने वाली हो और हुआ भी वैसा ही है. दीपावाली के मौके पर राम रहीम ने अपना नया म्यूजिक वीडियो लॉन्च कर दिया. करीब साढ़े 3 मिनट के इस वीडियो में वो बिलकुल वैसे ही सजा-धजा था है, जैसे अपने पुराने वीडियोज में हुआ करता था. यानी ये परोल दरअसल राम रहीम के लिए जश्न का मौका बन गया है.

जानिए कब रद्द किया जा सकता है परोल?
वरिष्ठ वकील नवीन कुमार का कहना है कि परोल देने का कारण स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाता है. यह जरूरी कारण के लिए ही मिलता है. अगर कोई उसके परे जाकर गतिविधि कर रहा हो, तो यह कानून के खिलाफ है. ऐसे में परोल को रद्द किया जा सकता है. वहीं पंजाब के पूर्व डीजीपी शशिकांत का कहना है कि परोल पर बाहर आया कैदी कानून के मुताबिक कुछ भी कर सकता है. बस उसे हर रोज पुलिस के पास हाजरी लगानी होती है. इसके अलावा उस पर कोई बंदिशें नहीं हैं.

'हम थे, हम हैं और हम ही रहेंगे'
यही वजह है कि 15 तारीख को जेल से बाहर आने के बाद गुरमीत राम रहीम ऐसे पेश आ रहा है, जैसे उसे बाइज्जत बरी कर दिया गया हो. उसके हाव-भाव से साफ दिखता है कि न उसे किसी बात की शर्म है न कोई अफसोस. वो अब भी खुद को भगवान समझ रहा है. इस बीच गुरमीत राम रहीम ने कहा, "हम थे, हम हैं और हम ही रहेंगे. हमने अपनी साध संगत को पछली बार यह कसम दिलाई थी कि गुरु के समतुल्य समझना अपनी आशिकी को बेइंतहा दाग लगवाना है. इन बच्चों ने हमें तोहफा दिया था कि अपने गुरु पर सौ परसेंट यकीन करेंगे और उसके बराबर किसी को नहीं मानेंगे. आज देख लो, आज सबके हाथ खड़े हैं. लाइव वालों के भी और यहां सेवादारों के भी. हाथ नीचे नहीं हो रहे ज्यो के त्यों खड़े हैं कि गुरुजी ये तोहफा हमने आपको दिया है. गुरु के समतुल्य किसी को नहीं मानना."

हनीप्रीत को दिया नाम
राम रहीम जेल में रहते हुए भी अपने साम्राज्य पर किसी तरह का खतरा नहीं आने देना चाहता, इसीलिए उसने ये एलान किया कि चाहे जो हो जाए डेरे की कमान उसके पास ही रहेगी. दरअसल उसे ये सफाई इसलिए देनी पड़ी, क्योंकि 26 अक्टूबर को अचानक उसने घोषणा कर दी कि डेरे में उसकी सबसे करीबी हनीप्रीत अब से रुहानी दीदी कहलाएगी. उसने कहा, "अपनी बिटिया को हमने एक नाम दे दिया, नाम तो वो ही है वैसे, बिटिया का नाम बताने की जरूरत नहीं है, सबको पता है साथ संगत भी जानती है. हमारी बिटिया का नाम हनीप्रीत है, धर्म की बेटी है और हमारा मुख्य शिष्या है. उनका हमने एक छोटा सा नाम दे दिया है सारे कहते हैं गुरुजी, सारे दीदी-दीदी कहते है, इसलिए पता नहीं चलता, तब हमने का नाम दे दिया है रुह दी यानी रूहानी दीदी."

ये भी पढ़ें- Haryana: 'जेल मैन्युअल में देखना होगा वह गाना गा सकता है या नहीं', राम रहीम पर बोले हरियाणा के गृहमंत्री

इस सवाल पर भड़का राम रहीम
ऐसे में जो कभी प्रियंका तनेजा हुआ करती थी, वो पहले गुरमीत राम रहीम की हनीप्रीत हुई और अब डेरे की रुहानी दीदी. पर सवाल ये उठा रहा है कि क्या ये बदलाव आने वाले वक्त में डेरे की गद्दी में भी बदलाव का संकेत है. यही वो सवाल है जिस पर राम रहीम भड़क गया. उसने कहा, "कितनी चिट्ठियों में लिख दी एक बात, आपने सुनी है और पढ़ी है. गुरु हम थे, हम हैं और हम ही रहेंगे. सौ परसेंट, एक हजार परसेंट, लाख परसेंट. पता नहीं क्या खाज उठती है और कुछ दिन बाद फिर शुरू हो जाते हैं."

2021 और 22 में कुल 6 बार जेल से बाहर आ चुका है राम रहीम
इस बीच राम रहीम को इस बार मिली पैरोल की टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. क्योंकि, ये पहली बार नहीं है जब गुरमीत राम रहीम को ठीक चुनाव के पहले परोल मिला हो. 20 साल की सजा काट रहा राम रहीम 2021 और 22 में कुल 6 बार जेल से बाहर आ चुका है. अब ये संयोग है या कोई सोचा समझा प्रयोग कि 2022 में हर बार जब भी कोई चुनाव आया तो राम रहीम जेल से बाहर आया.

  • इस साल 7 फरवरी में उसे 21 दिन की फरलो मिली थी, तब पंजाब के विधानसभा चुनाव होने थे.
  • इसके बाद 17 जून को उसे 30 दिन की परोल मिली तो हरियाणा के नगर पालिका के चुनाव होने वाले थे.
  • अब फिर उसे 40 दिन की परोल मिली है तो आदमपुर विधानसभा सीट में उपचुनाव है और हिमाचल में विधानसभा चुनाव.

सवालों के घेरे में खट्टर सरकार 
राम रहीम की रिहाई को लेकर हरियाणा की खट्टर सरकार सवालों के घेरे में हैं. विपक्ष इसे सीधे तौर पर चुनावी राजनीति से इसलिए जोड़ रहा है, क्योंकि राम रहीम के लाखों अनुयायी एक बड़ा वोट बैंक भी हैं. यानी राम रहीम का एक इशारा चुनाव की दिशा बदल सकता है, तो क्या इसीलिए चुनाव से पहले राम रहीम की रिहाई होती है? हरियाणा सरकार भले ही कुछ भी कहे, लेकिन पिछले कुछ दिनों में राम रहीम के दरबार में जिस तरह से नेता नतमस्तक हो रहे हैं, उससे परोल की मिस्ट्री और गहराती जा रही है.

हिमाचल के परिवहन मंत्री ने लिया आशीर्वाद 
कुछ दिन पहले ही राम रहीम के ऑनलाइन सत्संग, जो चुनावी राज्य हिमाचल प्रदेश में हो रहा था. अनुयायियों की भीड़ में अचानक एक आवाज आई, "मैं यहां का विधायक हूं. मंत्री हूं. आपसे आशीर्वाद लेने आया हूं, आप पुण्य का काम कर रहे हैं. उससे बड़ा कुछ नहीं है मैं चाहता हूं हिमाचल की जनता को आपके दर्शन मिले." ये आवाज किसी और की नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की बीजेपी सरकार के परिवहन मंत्री विक्रम ठाकुर की थी. वे इस तरह लगातार राम रहीम के तीरफ करते रहे. विक्रम ठाकुर के राम रहीम से इस तरह जीत का आशीर्वाद मांगते ही विपक्ष को आरोप लगाने का पूरा मौका मिल गया.

कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाया ये आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पंजाब की सीमाएं हिमाचल के साथ लगती हैं और बाबा राम रहीम के अनुयायी भी यहां है. उन्हें अपने पक्ष में करने में भाजपा लगी हुई हैं, जिसको देखते हुए गुरमीत राम रहीम को पैरोल पर बाहर लाया गया है. गुरमीत राम रहीम के सत्संग में डिप्टी स्पीकर, मंत्री, विधायक से लेकर पंचायत और जिला परिषद के उम्मीदवार तक पहुंच रहे हैं. करनाल के सत्संग में जिले के पंचायती चुनाव में खड़े होने वाले उम्मीदवारों ने गुरमीत राम रहीम का आशीर्वाद लिया. इसी भीड़ में करनाल की मेयर रेणु बाला भी मौजूद थीं. यही वजह है कि राम रहीम की इस परोल को चुनावी जरूरत से जोड़ा जा रहा है. 

राज्य सरकार ही बनाती है परोल और फरलो के नियम 
जानकारों के मुताबिक परोल और फरलो के नियम राज्य सरकार ही बनाती है. हरियाणा का जो कानून है, उसमें अधिकतम 6 हफ्ते की परोल दी जा सकती है. हरियाणा सरकार ने अप्रैल 2022 में कैदियों के परोल नियमों में संशोधन किया था, जिसमें पेरोल के लिए कैदी को कारण बताना अनिवार्य नहीं रह गया है. हालांकि, 2015-16 से इस पर विचार विमर्श चल रहा था कि कैदी को जेल से पेरोल लेने के लिए क्या कारण बताना जरूरी होना चाहिए या नहीं? तो क्या हरियाणा सरकार ने परोल के कानून में जो संशोधन किया, उसी से राम रहीम के लिए पaरोल का रास्ता और आसान हो गया? ये सवाल उठ लगातार उठ रहे हैं.

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