'कौए के श्राप से गाय नहीं मरती...', राज ठाकरे की पोस्ट से सियासी घमासान
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने राजभाषा दिवस के अवसर पर मातृभाषा के साथ-साथ राजभाषा और अन्य राज्यों की भाषाओं का भी सम्मान करने का संकल्प लेने की अपील की.

महाराष्ट्र में मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने आज सोशल मीडिया पर एक संक्षिप्त पोस्ट की है. इसमें उन्होंने कहा, “कौए के श्राप से गाय नहीं मरती. फिलहाल इतना ही…” राज ठाकरे की इस पोस्ट की फिलहाल हर तरफ चर्चा हो रही है.
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने “कौए के श्राप से गाय नहीं मरती…” कहते हुए संकेतात्मक टिप्पणी की है. ऐसे में उनके निशाने पर आखिर कौन है, इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हिंदी सम्मेलन आयोजित किया गया था. इस सम्मेलन में अमित शाह ने महाराष्ट्र को बहुभाषी राज्य बताया था. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या राज ठाकरे की इस टिप्पणी का निशाना अमित शाह की अध्यक्षता में हुए हिंदी सम्मेलन की ओर है?
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अमित शाह ने क्या कहा था?
अमित शाह ने कहा था कि महाराष्ट्र की धरती पर कोंकणी, गुजराती, सिंधी, हिंदी, कन्नड़ और वारली जैसी कई भाषाओं का विकास हुआ है और उनका सम्मान भी किया गया है. महाराष्ट्र से बड़ा बहुभाषी राज्य पूरे भारत में दूसरा नहीं है, ऐसा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था.
हिंदी दिवस और छठा अखिल राजभाषा सम्मेलन नवी मुंबई के सिडको प्रदर्शनी केंद्र में आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मौजूद थे. इसी दौरान उन्होंने महाराष्ट्र को बहुभाषी राज्य बताया था.
नरेंद्र मोदी ने ही मराठी को सबसे पहले शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने का काम किया
अमित शाह ने कहा, “मैं महाराष्ट्र की बहुभाषी संस्कृति को भी नमन करना चाहता हूं. यहां मराठी का सम्मान है और होना भी चाहिए. हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही मराठी को सबसे पहले शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने का काम किया. हालांकि, इसके साथ ही महाराष्ट्र की धरती पर कोंकणी, गुजराती, सिंधी, हिंदी, कन्नड़, वारली जैसी कई भाषाओं का विकास हुआ है और उनका सम्मान भी किया गया है. महाराष्ट्र से बड़ा बहुभाषी राज्य पूरे भारत में दूसरा नहीं है.”
देवेंद्र फडणवीस ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री देवेन्द फडणवीस ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा राजभाषा और मातृभाषा के सम्मान पर जोर दिया है. साथ ही देश की राजभाषा भारतीय भाषा होनी चाहिए, इसके लिए मातृभाषा के साथ कम से कम एक अन्य भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को आगे बढ़ाया है."
फडणवीस ने कहा कि वैश्विक मंच पर पहली बार संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में बोलने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी थे. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने हिंदी को स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि दुनिया के विकसित राष्ट्र अपनी राजभाषा में बोलते हैं, जबकि विकासशील राष्ट्र दूसरी भाषा बोलने का प्रयास करते हैं. इसलिए राजभाषा और मातृभाषा का सम्मान समान रूप से महत्वपूर्ण है. आज जब पूरी दुनिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंदी में बोलते हैं, तब हमारी राजभाषा को मिल रहा सम्मान देखकर गर्व होता है.
फडणवीस ने कहा कि हिंदी भाषा ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में संपर्क के माध्यम के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. “मराठी हमारी मां है, जबकि दूसरी भाषाएं मौसी हैं और हम सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं.” उन्होंने राजभाषा दिवस के अवसर पर मातृभाषा के साथ-साथ राजभाषा और अन्य राज्यों की भाषाओं का भी सम्मान करने का संकल्प लेने की अपील की.
महाराष्ट्र ने हमेशा सभी भाषाओं और संस्कृतियों का सम्मान किया
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि राजभाषा हिंदी का विस्तार किसी भी प्रांतीय भाषा का स्थान लेने के लिए नहीं, बल्कि सभी भारतीय भाषाओं को साथ लेकर आगे बढ़ने के लिए है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने हमेशा सभी भाषाओं और संस्कृतियों का सम्मान किया है. मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने पर महाराष्ट्र को गर्व है; साथ ही हिंदी को भी महाराष्ट्र ने हमेशा सम्मान और मान-सम्मान दिया है.
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