मुश्किल में महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल! बेनामी संपत्ति मामले पर कोर्ट का बड़ा आदेश
Chhagan Bhujbal Benami Property Case: इस मामले में अगली सुनवाई मुंबई के MP/MLA कोर्ट में 6 अक्तूबर को होगी. 2021 में छगन भुजबल, उनके परिवार के सदस्यों और उनके फर्म के खिलाफ कार्यवाही शुरू हुई थी.

महाराष्ट्र के मंत्री और डिप्टी सीएम अजित पवार के खास छगन भुजबल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. दरअसल, मुंबई की स्पेशल कोर्ट ने छगन भुजबल और अन्य के खिलाफ 2021 के बेनामी संपत्ति मामले को फिर से शुरू करने का ऑर्डर दिया है. मुंबईकी स्पेशल कोर्ट ने मंगलवार (16 सितंबर) को ये आदेश दिया. बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले की कार्यवाही को तकनीकी आधार पर रद्द कर दिया था. अब इस केस को ओरिजनल स्टेज पर बहाल कर दिया गया है और अगली सुनवाई स्पेशल MP/MLA कोर्ट में 6 अक्तूबर को होगी.
इनकट टैक्स विभाग ने साल 2021 में छगन भुजबल, उनके परिवार के सदस्यों और उनके फर्म आर्मस्ट्रॉन्ग इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, परवेश कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और देविशा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ बेनामी संपत्ति की कार्यवाही शुरू की थी.
नवंबर 2021 में आरोपियों को जारी हुआ था समन
स्पेशल कोर्ट ने नवंबर 2021 की शुरुआत में आरोपियों को समन जारी किया था. आरोपियों में एनसीपी मंत्री छगन भुजबल, उनके बेटे पंकज और भतीजे समीर शामिल थे. इन्होंने आयकर विभाग की कार्रवाई को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.
दिसंबर 2024 में हाई कोर्ट ने रद्द कर दी थी शिकायत
दिसंबर 2024 में हाई कोर्ट ने भुजबल परिवार के खिलाफ दायर शिकायत को रद्द कर दिया था, जिसमें उन पर कथित बेनामी संपत्तियों का आरोप था. ये संपत्तियां उनसे जुड़ी तीन कंपनियों के नाम पर थीं, जिनमें मुंबई की प्रॉपर्टी और नासिक की गिरणा शुगर मिल्स शामिल हैं. भुजबल नासिक से ही विधायक हैं.
विशेष न्यायाधीश ने आदेश में क्या कुछ कहा?
MP/MLA के मामलों के विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण नवंदर ने मंगलवार को पारित एक आदेश में कहा कि हाई कोर्ट ने मामले को रद्द करते समय ‘‘मामले के तथ्यों या मामले के गुण-दोष पर गौर नहीं किया.’’ विशेष न्यायाधीश ने कहा, ‘‘(हाई कोर्ट) आदेश का केवल अवलोकन करने के बाद, यह देखा जा सकता है कि कार्यवाही को रद्द करने की राहत केवल तकनीकी आधार पर दी गई थी.’’
विशेष अदालत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हाई कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को यह छूट दी थी कि यदि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी पुनर्विचार याचिका स्वीकार कर ली जाती है, तो वे कार्यवाही को फिर से शुरू कर सकती है. उसने कहा कि इससे ही पता चलता है कि कार्यवाही केवल (सुप्रीम कोर्ट के) मिसाल के आधार पर रद्द की गई थी, गुण-दोष के आधार पर नहीं.
विशेष अदालत ने कहा, ‘‘इसलिए, जब सुप्रीम कोर्ट ने (अभियोजन पक्ष की) पुनर्विचार याचिका को स्वीकार कर ली, जिससे पहले की मिसाल स्पष्ट रूप से खारिज हो जाती है और जब उच्च न्यायालय द्वारा कार्यवाही को फिर से शुरू करने का विशिष्ट निर्देश है, तो इस अदालत के पास मूल कार्यवाही को फिर से शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता.’’परिणामस्वरूप, मामला अपने मूल चरण में वापस आ गया है.
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