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Jharkhand: SIR में नाम हटाने पर टकराव, BJP एजेंटों के फॉर्म पर BLO की रोक

झारखंड SIR के दौरान गोड्डा में BJP एजेंटों द्वारा मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा करने पर विवाद खड़ा हो गया. BLOs ने कई आवेदनों पर आपत्ति जताई.

झारखंड में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर विवाद सामने आया है. गोड्डा जिले के कुछ बूथों पर BJP के बूथ लेवल एजेंट बड़ी संख्या में फॉर्म-7 लेकर पहुंचे. इन फॉर्म के जरिए ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल लोगों के नाम हटाने की मांग की गई. मामला तब गरमा गया, जब बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) ने कई आवेदन लेने से आपत्ति जताई.

5 अगस्त को झारखंड में SIR के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद गोड्डा के कुछ बूथों पर नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर यह मामला सामने आया. कई मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन दिए गए. इन सभी मतदाताओं में सभी नाम अल्पसंख्यक समुदाय से हैं.

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम चार बूथों पर बीएलओ ने इन आवेदनों को स्वीकार करने से इनकार किया. बीएलओ का कहना था कि कई फॉर्म निर्धारित प्रक्रिया के मुताबिक नहीं थे और उनमें दी गई जानकारी को लेकर भी सवाल थे.

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BJP एजेंटों ने फॉर्म-7 का बंडल सौंपा

इन बूथों पर BJP के बूथ लेवल एजेंट फॉर्म-7 का बंडल लेकर पहुंचे थे. फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने के लिए किया जाता है. बीएलओ के मुताबिक, एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाने के आवेदन आने से उन्होंने सवाल उठाए.

एक मामले में BJP एजेंट संजीव रोशन ने 8 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन दिए. वहीं, गोड्डा में एक BJP एजेंट पर BLO के सवाल उठाने के बाद 75 फॉर्म जला देने का आरोप भी सामने आया है.

आवेदनों की जांच जरूरी- बीएलओ

बीएलओ का कहना है कि सिर्फ फॉर्म जमा कर देने से किसी मतदाता का नाम सीधे सूची से नहीं हटाया जा सकता. आवेदन मिलने के बाद उसकी जांच जरूरी है. कुछ मामलों में बीएलओ ने यह भी कहा कि फॉर्म तय प्रारूप में नहीं थे.

बताया गया है कि कुछ आवेदन ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) श्रीमन मरांडी के निर्देश पर खारिज किए गए. हालांकि, BJP की ओर से भी इस पूरी प्रक्रिया को लेकर शिकायत की गई है.

कानून क्या कहता है?

मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया के लिए रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल Act, 1950 की धारा 22 में प्रावधान है. इसके तहत इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर मतदाता सूची में सुधार या किसी नाम को हटाने की कार्रवाई कर सकता है.

लेकिन किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले जांच की प्रक्रिया पूरी करनी होती है. संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का मौका भी देना जरूरी है. इसके बाद ही नाम हटाने का आदेश दिया जा सकता है.

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इस पूरे विवाद के बीच झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने साफ किया है कि BLO किसी भी आवेदन को लेने से इनकार नहीं कर सकते. यानी अगर फॉर्म-7 जमा किया जा रहा है, तो उसे स्वीकार करना और आगे की प्रक्रिया के लिए भेजना जरूरी है. इसके बाद संबंधित अधिकारी आवेदन की जांच करेंगे और नियमों के मुताबिक फैसला लिया जाएगा.

About the author पंकज यादव

पंकज यादव, ABP News में स्टेट कंसल्टेंट्स टीम में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब 10 वर्षों का अनुभव हैं. अपने पत्रकारिता करियर के दौरान उन्होंने Live Today News Channel, Inshorts News App और Dainik Bhaskar Digital जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म पर काम करते हुए उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता, न्यूज राइटिंग और वीडियो प्रोडक्शन से जुड़े अनुभव हासिल किए.

पंकज की प्रमुख पत्रकारिता रुचि राजनीति, सरकार और प्रशासन, उत्तर प्रदेश से जुड़े राजनीतिक मुद्दों, खेल और फीचर लेखन में रही है. उन्हें राजनीतिक घटनाक्रमों और सामाजिक विषयों को समझने और उन्हें सरल और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में विशेष रुचि है. लखनऊ और उत्तर प्रदेश से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर भी उन्होंने काम किया है.

पंकज ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद उन्होंने बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी (BBAU) से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की. पंकज से पत्रकारिता और पेशेवर संपर्क के लिए उनके X प्रोफाइल @pankajyadav1520 के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है.

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