कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद विकास दुबे कैसे पहुंचा फरीदाबाद, पढ़ें ये रिपोर्ट
कानपुर से फरीदाबाद जाने के दो रास्ते हैं. कानपुर से फरीदाबाद की दूरी लगभग 460 किमी है. पुराने रास्ते में कानपुर से औरैया, इटावा, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, आगरा और कोसी के रास्ते फरीदाबाद पहुंचा जा सकता है. इस रास्ते में कुल 6 टोल प्लाजा आते हैं.

लखनऊ: कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाला हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है. बिकरु कांड के कई घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई है. हालांकि, इस घटना के बाद हरकत में आई पुलिस ने विकास के खास साथियों को मुठभेड़ में मार गिराया जबकि कुछ बदमाशों को धर दबोचा है. इसी बीच विकास दुबे के फरीदाबाद में होने की खबर मिली. कहा जा रहा है कि दुबे फरीदाबाद के एक होटल में ठहरा था, लेकिन जब तक पुलिस दबिश देती, वह फरार हो गया. वहीं, फरीदाबाद में विकास दुबे को शरण देने के आरोप में प्रभात मिश्रा और अंकुर को गिरफ्तार किया गया है. दोनों आरोपी विकास दुबे के नजदीकी हैं. विकास दुबे को लेकर हरियाणा पुलिस को भी अलर्ट कर दिया गया है.
किस रास्ते फरीदाबाद पहुंचा विकास दुबे? अब सवाल उठ रहा है कि मुठभेड़ के बाद घेरेबंदी के बावजूद विकास फरीदाबाद कैसे पहुंच गया. बतादें कि कानपुर से फरीदाबाद जाने के दो रास्ते हैं. कानपुर से फरीदाबाद की दूरी लगभग 460 किमी है. पुराने रास्ते में कानपुर से औरैया, इटावा, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, आगरा और कोसी के रास्ते फरीदाबाद पहुंचा जा सकता है. इस रास्ते में कुल 6 टोल प्लाजा आते हैं.
दूसरा रास्ता कानपुर से औरैया, इटावा, जसवंतनगर तक पुराने हाइवे से और जसवंतनगर से लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर चढ़कर अलीगढ़, टप्पल, पलवल से फरीदाबाद जाता है. इस रास्ते में कुल 5 टोल प्लाजा आते हैं. फरीदाबाद जाने वाला ये रास्ता 20 किमी लंबा पड़ता है. हालांकि ये भी संभव है कि विकास दुबे ने मुख्य सड़क पर जाने की बजाय इधर-उधर गांवों का रास्ता चुना हो. जिससे सीसीटीवी में या पुलिस जांच में वो पकड़ में न आ सके. फिलहाल इसकी आधिकारिक जानकारी कोई नहीं दे रहा है.
विकास की तलाश में यूपी पुलिस की 40 टीमें यूपी पुलिस की 40 टीमें विकास दुबे की तलाश में लगाई हैं. इसके अलावा एसटीएफ की अलग-अलग टीमें भी विकास की तलाश कर रही हैं. पुलिस की टीम की संख्या निर्धारित नहीं होती. आमतौर पर एक टीम में न्यूनतम 2 पुलिसकर्मी और अधिकतम 15 जवान लगाए जाते हैं. इस मामले में औसतन एक टीम में 5 जवान हैं. यानी पुलिस के लगभग 200 जवान अलग-अलग जगह जांच में लगे हैं.
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