NSDP के मामले में गुजरात टॉप पर, राज्यवार आमदनी के आंकड़ों में पिछड़ा महाराष्ट्र
आंकड़ों के मुताबिक गुजरात, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. वहीं बिहार और झारखंड अभी भी पीछे हैं.

2023-24 में गुजरात ने प्रति व्यक्ति शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद (NSDP) के मामले में सभी बड़े राज्यों को पछाड़ते हुए ₹1.96 लाख की आय के साथ पहला स्थान हासिल किया. इसके बाद कर्नाटक ₹1.92 लाख, हरियाणा ₹1.83 लाख और तमिलनाडु ₹1.80 लाख पर रहे. दिलचस्प बात यह है कि ऐतिहासिक रूप से शीर्ष पर रहने वाला महाराष्ट्र इस दौड़ में पिछड़ गया है, जिसकी प्रति व्यक्ति आय ₹1.82 लाख रही.
इन आंकड़ों को 2011-12 की स्थिर कीमतों पर आधारित बताया गया है, जिससे मुद्रास्फीति का असर हटाकर वास्तविक आय का अंदाजा लगाया जा सके. अगर वर्तमान कीमतों की बात करें तो भारत की औसत प्रति व्यक्ति आय ₹1.89 लाख रही.
लाइव मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में संसद में पेश किए गए राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्य अपनी ऊंची आय को बेहतर शासन का नतीजा बता रहे हैं. वहीं बिहार और झारखंड जैसे पूर्वी राज्य अब भी विकास की दौड़ में पिछड़ते नजर आ रहे हैं.
दक्षिण और पश्चिम में चमक, उत्तर और पूर्व में मंदी
यह आंकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि दक्षिण और पश्चिम भारत के राज्य, खासकर गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना, आर्थिक दृष्टि से अधिक प्रगति कर रहे हैं. इसकी प्रमुख वजह इन राज्यों में उद्योग, सेवा और आईटी सेक्टर का बेहतर विकास माना जा रहा है. वहीं पंजाब और हरियाणा जैसे उत्तर भारतीय राज्य भी हरित क्रांति जैसे प्रयासों की वजह से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं.
इसके उलट बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे पूर्वी राज्य अब भी सबसे गरीब राज्यों में गिने जा रहे हैं. इन राज्यों में शिक्षा, स्वास्थ्य और गैर-कृषि नौकरियों के अवसरों की कमी आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है.
तेलंगाना ने दिखाई तेजी, बिहार पीछे
2014 में आंध्र प्रदेश से अलग हुआ तेलंगाना अब देश के सबसे तेज़ी से उभरते राज्यों में शामिल हो गया है. तेज़ औद्योगिकीकरण और सरकारी प्रयासों की बदौलत इस राज्य ने तेजी से तरक्की की है. वहीं, बिहार की स्थिति चिंता का विषय है. जहां 2000 में अखिल भारतीय औसत की तुलना में इसकी आय 41.2% थी, वहीं 2023-24 में यह गिरकर 33.2% पर आ गई है.
राज्यों के बंटवारे का असर
विशेषज्ञों के मुताबिक राज्यों के विभाजन का भी उनके विकास पर बड़ा असर पड़ा है. बिहार से 2000 में झारखंड अलग हुआ, जिसके बाद बिहार की आर्थिक स्थिति और भी खराब हो गई. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल के अनुसार, अविभाजित बिहार की सापेक्ष आय 1960 में 0.17 गुना थी जो 2000 में 0.33 गुना हो गई थी. लेकिन विभाजन के बाद यह फिर गिरकर ₹0.52 रह गई.
मध्य प्रदेश ने की तरक्की, उत्तराखंड और यूपी पिछड़े
मध्य प्रदेश ने बीते एक दशक में उल्लेखनीय प्रगति की है. 2023-24 में इसकी प्रति व्यक्ति आय ₹1.92 लाख रही, जो अब तमिलनाडु और तेलंगाना से भी आगे निकल चुकी है. लेकिन उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश अब भी अपेक्षित स्तर से नीचे हैं. यूपी की प्रति व्यक्ति आय 1960 में अखिल भारतीय औसत का 60.7% थी जो अब घटकर केवल 40.3% रह गई है. बिहार और झारखंड जैसे राज्य अभी भी बुनियादी सुविधाओं और औद्योगिकीकरण की राह ताक रहे हैं.
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Source: IOCL























