सीएम भूपेंद्र पटेल ने किया 'सोमनाथ महोत्सव' का उद्घाटन, जानें- किसे कहा श्रद्धा, कला और आराधना का संगम?
Somnath Festival: सोमनाथ मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है. यह भारतीय संस्कृति और अस्मिता का प्रतीक है. साल 2025 लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती वर्ष भी है.

Somnath Festival 2025: महाशिवरात्रि पर्व के उपलक्ष्य में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोमनाथ महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना कर तीन दिवसीय सोमनाथ महोत्सव का शुभारंभ किया. इस मौके पर उन्होंने भगवान सोमनाथ से सभी के कल्याण और समृद्धि की प्रार्थना की.
मुख्यमंत्री ने सोमनाथ मंदिर के पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच गंगाजल से जलाभिषेक कर देवाधिदेव महादेव की पूजा की. सोमनाथ ट्रस्ट की ओर से उन्हें प्रसाद भेंट किया गया. मौके पर सांसद राजेशभाई चुड़ासमा, विधायक प्रद्युमनभाई वाजा, पर्यटन एवं देवस्थान विभाग के सचिव राजेन्द्र कुमार, पवित्र यात्राधाम विकास बोर्ड के सचिव रमेश मेरजा और गिर-सोमनाथ प्रशासन एवं सोमनाथ ट्रस्ट के अधिकारी व अन्य लोग मौजूद थे.
'सोमनाथ महोत्सव श्रद्धा, कला और आराधना का संगम'
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा, "तीन दिवसीय सोमनाथ महोत्सव श्रद्धा, कला और आराधना का संगम है. यह महोत्सव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प का जीवंत उदाहरण है." सीएम ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण कराने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के वर्ष में इस महोत्सव के आयोजन को एक सुंदर संयोग बताया.
मुख्यमंत्री ने सोमनाथ आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की सुविधा के लिए इस वर्ष के बजट में ‘सोमनाथ-द्वारका एक्सप्रेस-वे’ के निर्माण का प्रावधान करने की सूचना सभी को दी. महोत्सव के पहले दिन शास्त्रीय नृत्यांगना पद्म विभूषण डॉ. सोनल मानसिंह ने ‘हर हर महादेव’ नाट्य कथा प्रस्तुत की.
इससे पहले मुख्यमंत्री ने त्रिवेणी संगम में आयोजित संगम आरती में भी भाग लिया, जहां 108 दीयों की संध्या आरती की गई. इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक और कला प्रेमी उपस्थित रहे.
'संस्कृति और अस्मिता का प्रतीक'
बता दें कि सोमनाथ मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है. यह भारतीय संस्कृति और अस्मिता का प्रतीक है. यह महोत्सव सोमनाथ की महिमा को प्रासंगिक बनाता है. इस दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त होता है. इस महोत्सव के माध्यम से गुजरात सरकार ने सोमनाथ को एक प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिससे राज्य की सांस्कृतिक विरासत को और ज्यादा मजबूती मिले.
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