दंतेवाड़ा के रेकावाया में अज्ञात बीमारी का कहर, ग्रामीण टॉर्च की रोशनी में इलाज के लिए मजबूर
Dantewada News: अबूझमाड़ के रेकावाया गांव में अज्ञात बीमारी फैलने से पांच आदिवासी मृत, दर्जनों गंभीर रूप से बीमार. स्वास्थ्य कर्मी टॉर्च की रोशनी में इलाज कर रहे हैं. प्रशासन ने राहत सामग्री पहुंचाई.

छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह नक्सल गतिविधियां नहीं, बल्कि गंभीर बीमारी है जिसने वहां के ग्रामीणों की जिंदगी को झकझोर कर रख दिया है, दंतेवाड़ा जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के रेकावाया गांव में उल्टी-दस्त की बीमारी फैलने से पांच आदिवासियों की मौत हो चुकी है, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार हैं, मामले की जानकारी मिलते ही बीजापुर से स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन इलाके की दुर्गमता और संसाधनों की कमी के चलते हालात नियंत्रण से बाहर बने हुए हैं.
टॉर्च की रौशनी में चल रहा इलाज
रेकावाया गांव पहुंची स्वास्थ विभाग की टीम ने बताया कि बीमारी के लक्षण दूषित पानी और गांव में पसरी गंदगी के वजह से फैल रही हैं. इलाके में न तो सड़क की सुविधा है, न ही बिजली-पानी जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं, ऐसे में इलाज करना बेहद मुश्किल हो रहा है. स्वास्थ्य कर्मियों को मरीजों का इलाज बिजली के अभाव में टॉर्च की रोशनी में करना पड़ रहा है. टीम ने गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के साथ ही पानी उबालकर पीने और स्वच्छता बनाए रखने की अपील की है.
प्रशासन के लिए बड़ा चैलेंज
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह क्षेत्र आजादी के बाद से विकास की दौड़ में पीछे छूट गया है. स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, सड़कों की खराब स्थिति और बिजली की अनुपलब्धता ने ग्रामीणों के जीवन को बेहद कठिन बना दिया है. ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी स्वास्थ्य केंद्र खोलने और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करने की मांग की है. स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल अतिरिक्त चिकित्सा दल भेजने की तैयारी की है.
जिला प्रशासन ने भी राहत सामग्रियां और आवश्यक दवाइयां पहुंचाने का आश्वासन दिया है, हालांकि, अबूझमाड़ के अंदरूनी इलाकों तक पहुंच पाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है.
सात दशक बाद भी मूलभूत सुविधाओं की कमी
इधर इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आजादी के सात दशक बाद भी देश के सबसे अंदरूनी हिस्सों में रहने वाले आदिवासी अब भी मूलभूत सुविधाओं से क्यों वंचित हैं. अबूझमाड़ के रेकावाया में बीमारी की यह त्रासदी न केवल स्वास्थ्य तंत्र की कमजोरी को उजागर करती है, बल्कि सरकारों के विकास के दावों पर भी बड़ा सवालिया निशान छोड़ती है.
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Source: IOCL
























