पटना में विश्वविद्यालय अधिनियम के विरोध में हंगामा, पुलिस से भिड़े शिक्षक
पटना में विशिष्ट विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के विरोध में शिक्षकों ने राजभवन मार्च निकाला. पुलिस ने मार्च रोका तो झड़प हो गई. कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है.

बिहार में विशिष्ट विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के विरोध में शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों का गुस्सा शनिवार को सड़क पर दिखा. बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा की ओर से राजभवन मार्च निकाला गया. मार्च जेडी विमेंस कॉलेज से शुरू हुआ, लेकिन करीब 100 मीटर आगे बढ़ते ही पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया. आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा और कई शिक्षकों व शिक्षकेतर कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया.
राजभवन मार्च में पटना समेत विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शिक्षक तथा शिक्षकेतर कर्मचारी शामिल हुए. प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद थीं. हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर प्रदर्शनकारियों ने नए विश्वविद्यालय अधिनियम के खिलाफ नारेबाजी की. वे राजभवन पहुंचकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया.
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पुलिस से झड़प, कई प्रदर्शनकारी हिरासत में
पुलिस की रोक के बाद प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे. इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प हुई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाया और कई लोगों को हिरासत में ले लिया. मार्च के दौरान अधिनियम वापस लेने की मांग जोर-शोर से उठाई गई.
विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म करने का आरोप
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने आरोप लगाया कि विशिष्ट विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के जरिए सरकार विश्वविद्यालयों पर अपना नियंत्रण बढ़ाना चाहती है. उनका कहना है कि इससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होगी और उच्च शिक्षा का ढांचा कमजोर पड़ सकता है. प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि नए कानून से विश्वविद्यालयों में राज्यपाल की शक्तियां कम कर सरकार का नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.
1976 का अधिनियम लागू रखने की मांग
संघर्ष मोर्चा ने 1976 के विश्वविद्यालय अधिनियम को लागू रखने और नए अधिनियम को वापस लेने की मांग की है. शिक्षकों का कहना है कि विश्वविद्यालयों के प्रशासन और शैक्षणिक व्यवस्था में स्वायत्तता जरूरी है. उनका विरोध नए कानून के संभावित प्रभावों को लेकर है.
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