मोकामा में गंगा पर नया रेल पुल तैयार, इन यात्रियों का सफर होगा आसान
मोकामा में गंगा पर नए डबल लाइन रेल पुल का रेल संरक्षा आयुक्त ने निरीक्षण पूरा कर लिया है. प्राधिकार मिलते ही ट्रेनों का परिचालन शुरू हो सकेगा. परियोजना पर 2,400 करोड़ खर्च हुए हैं.

बिहार के मोकामा में गंगा नदी पर बने नए डबल लाइन रेल पुल से ट्रेनों के परिचालन का रास्ता साफ हो गया है. मौजूदा राजेंद्र पुल के समानांतर बनाए गए नए पुल का रेल संरक्षा आयुक्त, पूर्वी सर्किल, कोलकाता गुरु प्रकाश ने निरीक्षण पूरा कर लिया है. इससे दक्षिण बिहार जाने वाले यात्रियों को आसानी होगी.
रेल संरक्षा आयुक्त से प्राधिकार मिलने के साथ ही इस नए रेल पुल से यात्री और मालगाड़ियों का परिचालन संभव हो जाएगा. मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इसे हर्ष का विषय बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताया है.
रेल संरक्षा आयुक्त ने 3 और 4 अक्टूबर को नए राजेंद्रपुल-हाथीदह ऊपर रेल पुल का निरीक्षण किया. इस दौरान माल एवं यात्री परिवहन के लिए बनाए गए पुल के साथ दोहरीकरण और विद्युतीकरण से जुड़े कार्यों की भी जांच की गई. राजेंद्रपुल, हाथीदह ऊपर, रामपुर डुमरा और टाल स्टेशनों से जुड़े निर्माण कार्यों का भी निरीक्षण किया गया.
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2400 करोड़ की लागत से बना पुल
नए रेल पुल के निर्माण पर करीब 2,400 करोड़ रुपये की लागत आई है. इसे मौजूदा राजेंद्र पुल के समानांतर पटना की ओर करीब 50 मीटर की दूरी पर बनाया गया है. पुल पर दोहरी रेल लाइन बिछाई गई है. पूरी परियोजना करीब 15.5 किलोमीटर लंबी है, जिसमें गंगा पर 1.9 किलोमीटर लंबा मुख्य पुल शामिल है. मुख्य पुल में 17 स्टील स्पैन बनाए गए हैं.
तीन रेल लाइनों से बढ़ेगी क्षमता
परियोजना में 3.6 किलोमीटर रेल वायडक्ट, आठ छोटे पुल, दो रोड ओवरब्रिज और तीन रेल ओवर रेल भी बनाए गए हैं. नए पुल के दोनों छोर पहले से मौजूद स्टेशनों से जुड़े हैं. उत्तर दिशा में हाथीदह, टाल और रामपुर डुमरा तथा दक्षिण दिशा में राजेंद्रपुल और बरौनी स्टेशन इससे जुड़े हैं. नए पुल पर ट्रेनों का परिचालन शुरू होने के बाद पुराने राजेंद्र सेतु से भी रेल यातायात जारी रहेगा. इससे इस रूट पर कुल तीन रेल लाइनों की सुविधा उपलब्ध होगी.
मोकामा में पवित्र गंगा नदी पर राजेन्द्र पुल के समानांतर नवनिर्मित ‘डबल लाइन रेल पुल’ पर रेल परिचालन का सफल शुभारंभ संपूर्ण बिहार के लिए एक अत्यंत हर्ष और गौरव का क्षण है! लगभग ₹2,400 करोड़ की लागत से निर्मित यह आधुनिक एवं रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रेल पुल उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच अवसंरचनात्मक कनेक्टिविटी को एक नई ऊँचाई प्रदान करेगा। पुराने ऐतिहासिक राजेन्द्र पुल के साथ अब इस मार्ग पर कुल तीन रेल लाइनों की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे ट्रेनों की रफ्तार और संख्या दोनों में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। यात्री और मालगाड़ियों के निर्बाध व त्वरित आवागमन से बिहार का पूर्वोत्तर राज्यों (North-East) के साथ रेल संपर्क और अधिक सशक्त होगा। मालगाड़ियों के सुचारू परिचालन से बिहार के कृषि उत्पादों, व्यापार और स्थानीय उद्योगों को एक नया बाज़ार व गति मिलेगी। बिहार के सर्वांगीण विकास, सुगम यात्रा और सुदृढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर के इस अनुपम उपहार हेतु आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी एवं माननीय रेल मंत्री श्री @AshwiniVaishnaw जी का समस्त बिहारवासियों की ओर से हृदयतल से आभार एवं धन्यवाद! जय हिंद! जय बिहार! #RajendraSetu #MokamaBridge #IndianRailways #VijayKumarSinha #NarendraModi
— Vijay Kumar Sinha (@VijayKrSinhaBih) October 5, 2026
उत्तर-दक्षिण बिहार की कनेक्टिविटी होगी मजबूत
रेलवे के मुताबिक, नए पुल के चालू होने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच एक अतिरिक्त रेल मार्ग उपलब्ध होगा. इससे पूर्वोत्तर भारत के साथ रेल संपर्क भी मजबूत होने की उम्मीद है. यात्री और मालगाड़ियों के परिचालन में सुविधा बढ़ेगी और रेलवे ट्रैफिक में करीब 2.5 गुना वृद्धि का अनुमान है. माल ढुलाई में समय और लागत कम होने से व्यापार तथा आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही को भी फायदा मिलने की उम्मीद है. इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए नई संभावनाएं पैदा होंगी.
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