भुवनेश्वर कुमार की वापसी: क्या 2028 वर्ल्ड कप खिलाने की तैयारी या सेलेक्टर्स की मजबूरी?
Bhuvneshwar Kumar Comeback: 4 साल बाद भारतीय टी20 टीम में भुवनेश्वर कुमार की वापसी ने नई बहस छेड़ दी है. क्या चयनकर्ताओं की नजर 2028 के टी20 विश्व कप और लॉस एंजिलिस ओलंपिक पर है या फिर कारण कुछ और है.

भारतीय क्रिकेट टीम में अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की वापसी चर्चा का विषय बन गई है. न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए 36 साल के भुवनेश्वर कुमार का चयन हुआ है. उन्होंने भारत के लिए अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नवंबर 2022 में खेला था. करीब चार साल के लंबे इंतजार के बाद उन्हें एक बार फिर भारतीय टीम में जगह मिली है.
भुवनेश्वर की वापसी के साथ ही भारतीय क्रिकेट में एक बड़ा सवाल उठ रहा है. क्या यह फैसला सिर्फ न्यूजीलैंड सीरीज को ध्यान में रखकर लिया गया है या भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के चयनकर्ताओं ने 2028 के बड़े टूर्नामेंटों के लिए अभी से रणनीति बनानी शुरू कर दी है? साल 2028 भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है. एक तरफ ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में टी20 विश्व कप आयोजित होना है, वहीं लॉस एंजिलिस ओलंपिक में भी क्रिकेट की वापसी होगी. दोनों ही टूर्नामेंट्स में टी20 क्रिकेट खेला जाएगा. ऐसे में भुवनेश्वर की वापसी को भविष्य की तैयारियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है.
2028 में 38 साल के होंगे भुवनेश्वर कुमार
भुवनेश्वर कुमार इस समय 36 साल के हैं और 2028 तक उनकी उम्र 38 साल हो जाएगी. ऐसे में सवाल यह है कि क्या भारतीय टीम को अगले दो सालों के लिए एक अनुभवी तेज गेंदबाज पर भरोसा करना चाहिए या युवा खिलाड़ियों को तैयार करने की रणनीति अपनानी चाहिए?
भुवनेश्वर के अनुभव और उनकी गेंदबाजी की काबिलियत पर कोई सवाल नहीं है. नई गेंद से स्विंग कराने की क्षमता और डेथ ओवरों में विविधता उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के लिए फिटनेस, रफ्तार और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना भी जरूरी है. भारतीय चयनकर्ताओं के सामने चुनौती यही है कि उन्हें वर्तमान में मुकाबले जिताने वाले गेंदबाजों के साथ-साथ भविष्य के लिए भी मजबूत तेज गेंदबाजी आक्रमण तैयार करना है.
आईपीएल 2026 में 28 विकेट लेकर किया दमदार प्रदर्शन
भुवनेश्वर कुमार की वापसी के पीछे उनकी आईपीएल 2026 की शानदार गेंदबाजी को बड़ी वजह माना जा रहा है. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की ओर से खेलते हुए उन्होंने 28 विकेट हासिल किए और टूर्नामेंट में दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे। उनकी इकॉनमी रेट 7.95 रही.
भुवनेश्वर ने अपनी गेंदबाजी से साबित किया कि बढ़ती उम्र के बावजूद उनमें विकेट निकालने की क्षमता बरकरार है. खासकर पावरप्ले में गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की उनकी काबिलियत भारतीय टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकती है. हालांकि, आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफलता दो अलग-अलग चुनौतियां हैं. ऐसे में चयनकर्ताओं को यह भी देखना होगा कि क्या भुवनेश्वर अपनी आईपीएल की लय को न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में दोहरा पाते हैं.
कार्तिक का उदाहरण, जब IPL की सफलता विश्व कप में नहीं आई काम
भारतीय क्रिकेट में इससे पहले भी अनुभवी खिलाड़ियों को आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के आधार पर टीम में वापस लाया गया है, लेकिन हर बार यह दांव सफल नहीं हुआ. इसका सबसे बड़ा उदाहरण विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक हैं. साल 2022 के आईपीएल में कार्तिक ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए शानदार प्रदर्शन किया था. उन्होंने 16 मैचों में 330 रन बनाए थे. उनका बल्लेबाजी औसत 55 और स्ट्राइक रेट 183.33 रहा था. इस प्रदर्शन के बाद कार्तिक को ऑस्ट्रेलिया में आयोजित 2022 टी20 विश्व कप के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया. उन्हें फिनिशर की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन विश्व कप में उनका बल्ला पूरी तरह खामोश रहा.
ऐसा ही एक उदाहरण करुण नायर का भी है. साल 2017 में आखिरी टेस्ट खेलने के बाद नायर ने जून 2025 में इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टेस्ट टीम में वापसी की थी. करीब आठ साल बाद उन्हें दोबारा भारत के लिए खेलने का मौका मिला. घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर नायर ने टीम इंडिया में वापसी की थी. हालांकि, इंग्लैंड के खिलाफ वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके. उन्होंने चार टेस्ट मैचों की आठ पारियों में 205 रन बनाए. उनका औसत 25.62 रहा और वह सिर्फ एक अर्धशतक लगा सके.
नायर और कार्तिक के उदाहरण से यह जरूर स्पष्ट होता है कि घरेलू क्रिकेट या आईपीएल में बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी करना आसान नहीं होता. हालांकि, इसका मतलब यह भी नहीं कि भुवनेश्वर कुमार के साथ ऐसा ही होगा. तेज गेंदबाज के रूप में उनका अनुभव और न्यूजीलैंड की परिस्थितियां उन्हें अलग तरह का अवसर दे सकती हैं.
मोहम्मद कैफ बोले, अभी 2028 विश्व कप के बारे में सोचना जल्दबाजी
भुवनेश्वर कुमार की वापसी को लेकर पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ का मानना है कि चयनकर्ताओं के फैसले को अभी लंबी अवधि की योजना से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. कैफ के मुताबिक, फिलहाल भारतीय टीम के सामने न्यूजीलैंड सीरीज की चुनौती है. भुवनेश्वर को उसी सीरीज के लिए चुना गया है और पहले यह देखना होगा कि वह वहां कैसी गेंदबाजी करते हैं.
कैफ का तर्क है कि अभी से यह कहना कि भुवनेश्वर को 2028 टी20 विश्व कप या लॉस एंजिलिस ओलंपिक में खिलाने की तैयारी हो रही है, जल्दबाजी होगी. दो साल बाद टीम की जरूरतें क्या होंगी, भुवनेश्वर की फिटनेस कैसी रहेगी और दूसरे तेज गेंदबाजों का प्रदर्शन किस स्तर पर होगा, इन सभी सवालों के जवाब अभी मिलने बाकी हैं.
मोहम्मद कैफ के आकलन का एक महत्वपूर्ण पहलू भारतीय टीम के युवा तेज गेंदबाजों का प्रदर्शन भी है. कैफ का मानना है कि हाल के समय में भारतीय टीम ने कई नए तेज गेंदबाजों को आजमाया, लेकिन वे उम्मीदों के मुताबिक निरंतर प्रदर्शन नहीं कर सके. इसी वजह से चयनकर्ताओं को दोबारा अनुभवी भुवनेश्वर कुमार की ओर देखना पड़ा. यानी भुवनेश्वर की वापसी के पीछे सिर्फ उनका शानदार आईपीएल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि तेज गेंदबाजी विभाग में भरोसेमंद विकल्प की तलाश भी एक बड़ी वजह हो सकती है.
अजीत अगरकर के जाने के बाद बदली चयनकर्ताओं की सोच?
भुवनेश्वर कुमार की वापसी भारतीय क्रिकेट की चयन नीति में बदलाव का संकेत भी हो सकती है. अजीत अगरकर के मुख्य चयनकर्ता पद से हटने के बाद प्रज्ञान ओझा को अंतरिम तौर पर चयन समिति की कमान मिली है. न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम का चयन उनके नेतृत्व में किया गया.
मोहम्मद कैफ के अनुसार, भुवनेश्वर की वापसी से पुराने और नए चयन नेतृत्व की सोच में अंतर दिखाई देता है. जहां पहले युवा खिलाड़ियों को अधिक अवसर देने पर जोर था, वहीं नई चयन व्यवस्था में अनुभवी और फॉर्म में चल रहे खिलाड़ियों के लिए भी दरवाजे खुले नजर आते हैं.
न्यूजीलैंड सीरीज तय करेगी भुवनेश्वर का भविष्य
भुवनेश्वर कुमार के लिए न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज बेहद महत्वपूर्ण होगी. करीब चार साल बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लौट रहे इस अनुभवी तेज गेंदबाज को एक बार फिर खुद को साबित करना होगा.
अगर भुवनेश्वर नई गेंद से विकेट लेने के साथ डेथ ओवरों में भी प्रभावी गेंदबाजी करते हैं, तो भविष्य की सीरीज के लिए उनकी दावेदारी मजबूत हो सकती है. लेकिन अगर उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहता, तो चयनकर्ताओं को फिर युवा विकल्पों की तरफ देखना पड़ सकता है.
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