India-Pakistan Ceasefire: सबसे पुराने दुश्मन को ‘औकात’ दिखाने को पाकिस्तान के साथ आया था चीन?
जब भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने भारत से लड़ने की कोशिश की, तो चीन ने अपने हथियार के जरिए पाकिस्तान को मदद की ताकि उसके हथियारों की रियल टेस्टिंग हो जाए

इस बात में किसी को कोई शक-ओ-सुबहा नहीं है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में पाकिस्तान ने जो ऑपरेशन बरियान-अल-मर्सूस लॉन्च किया था, दरअसल वो ऑपरेशन पाकिस्तान का था ही नही, बल्कि ये ऑपरेशन तो तुर्किए और चीन का था. तुर्किए और चीन के हथियारों के दम पर पाकिस्तान ने भारत से लड़ने की कोशिश की. भले ही पाकिस्तान भारत के साथ हुई इस लड़ाई में एक बार फिर से हार गया, लेकिन इस लड़ाई ने चीन का असली मकसद पूरा कर दिया.
चीन का असली मकसद पाकिस्तान का साथ देना या फिर भारत के खिलाफ जाना नहीं बल्कि अपने उस दुश्मन को उसकी औकात याद दिलाना था, जो चीन के लिए नासूर बना हुआ है. क्या है पूरी कहानी, आज बात करेंगे विस्तार से-
चीन के जो भी हथियार हैं, उनकी कभी रियल टेस्टिंग नहीं हो पाई थी. फैक्ट्री में तैयार ये हथियार कितने घातक हैं और कितनी तबाही मचा सकते हैं, इसका असल में परीक्षण कभी हो ही नहीं पाया था. जब भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने भारत से लड़ने की कोशिश की, तो चीन ने अपने हथियार के जरिए पाकिस्तान को मदद की ताकि उसके हथियारों की रियल टेस्टिंग हो जाए. ऐसा ही हुआ भी. भारत के ऑपरेशन सिंदूर की कहानी हो या फिर पाकिस्तान के हमले के बाद की जवाबी कार्रवाई पाकिस्तान को बचाने की कोशिश चाइनीज एयर डिफेंस सिस्टम ने ही की थी.
अब भारत ने तो इस एयर डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त कर दिया, लेकिन पाकिस्तान इसे मानने को राजी नहीं है. न ही चीन इस बात को मान रहा है कि उसका बनाया एयर डिफेंस सिस्टम नाकाम हो गया है. उल्टे चीन ब्रिटिश अखबार के जरिए इस बात को पेश करने की कोशिश कर रहा है कि चीन के हथियारों की वजह से ही पाकिस्तान को भारत के ख़िलाफ बढ़त मिल गई है.
अब है तो ये बात सरासर झूठ, लेकिन इस झूठ की बदौलत ही चीन अपने सबसे पुराने दुश्मन को अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा है. ये सबसे पुराना दुश्मन है कौन. तो वो है ताइवान, जिसका आधिकारिक नाम है रिपब्लिक ऑफ चाइना. चीन कहता है कि ताइवान चीन का है, जबकि ताइवान खुद को अलग देश बताता है. चीन हमेशा ताइवान को धमकी देते रहता है, जबकि अमेरिका ताइवान को बचाने की पुरजोर कोशिश करता है.
अभी चीन ने पाकिस्तान को हथियार देकर जो रियल टेस्टिंग की है, वो दरअसल ताइवान को डराने की ही कोशिश है कि ताइवान चाहे जितने भी अमेरिकी हथियार इकट्ठा कर ले, वो चीन के डिफेंस सिस्टम के आगे नाकाम हो जाएगा. अपनी ताकत दिखाने के लिए ही चीन इस बात का प्रोपेगैंडा फैला रहा है कि पाकिस्तान ने भारत के रफाल को मार गिराया है. इस चाइनीज प्रोपेगैंडा में इस बात का भी जिक्र है कि फ्रांसीसी एयरक्राफ्ट को मारने के लिए चीन की बनाई PL-15 मिसाइल का इस्तेमाल हुआ है, जिसे चीन के ही बनाए J-10C के जरिए लॉन्च किया गया है.
अब भले ही ये बात पूरी तरह से झूठ हो और भले ही इसकी वजह से भारत के किसी एयरक्राफ्ट का कोई बाल भी बांका न हुआ हो, लेकिन चीन इस झूठ को अपने यहां इतनी बार बोलेगा कि और कोई सच माने न माने, ताइवान इस बात को सच मानने लगेगा. चीन का भी इकलौता मकसद सिर्फ यही है कि उसके हथियारों की दहशत ताइवान तक बरकरार रहे.
यह भी पढ़ें:-
तुर्किए हो या चीन-पाकिस्तान, भारत ने बनाया दुनिया के सभी ड्रोनों का काल 'भार्गवास्त्र'; देखें सफल परीक्षण का VIDEO
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL





















