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अंतरिक्ष में भी आते हैं भूकंप? जानें क्या है स्पेसक्वेक्स और धरती पर इनका होता है क्या असर

अंतरिक्ष भूकंप का प्रभाव GPS, टेलीकम्युनिकेशन और अन्य सैटेलाइट बेस्ड कम्युनिकेशन सिस्टम्स पर भी देखा गया है, हालांकि इसका कोई भौतिक प्रभाव नहीं होता, लेकिन ये तकनीकी सिस्टम पर गहरा असर डाल सकते हैं.

Earthquakes In Space: जब भी भूकंप शब्द आता है, तो जेहन में पृथ्वी की कांपती जमीन, इमारतों का हिलना और चेतावनी के सायरन गूंजते हैं, लेकिन क्या आपने कभी अंतरिक्ष में आने वाले भूकंपों यानी स्पेसक्वेक (Spacequake) के बारे में सुना है?

दरअसल, ये कोई कल्पना नहीं है, बल्कि पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में होने वाली ऊर्जा के भयानक हलचल का नाम है. ये घटनाएं न तो टेक्टोनिक प्लेट्स के कारण होती हैं और न ही जमीन के नीचे, बल्कि हमारे ग्रह के चारों ओर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र के भीतर होती हैं.

अंतरिक्ष भूकंप बनते कैसे हैं?
पृथ्वी के चारों ओर एक अदृश्य बेहद शक्तिशाली चुंबकीय कवच है, जिसे हम मैग्नेटोस्फीयर (Magnetosphere) कहते हैं. यह हमें अंतरिक्ष की हानिकारक किरणों और सोलर रेडिएशन से बचाता है, लेकिन जब सौर हवा (Solar Wind) सूरज से निकलने वाली तेज गति की ionized gas इस चुंबकीय कवच से टकराती है, तब ये एक गहरा प्रभाव छोड़ती है. जब सौर हवा चुंबकीय क्षेत्र को ज्यादा खींचती है, तो वह किसी रबर बैंड की तरह खिंच कर वापस झटका देती है. इसी प्रक्रिया में चुंबकीय ऊर्जा एक झटके के साथ वापस पृथ्वी की ओर आती है. यह झटका ही अंतरिक्ष भूकंप कहलाता है.वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष भूकंप की घटना को पहली बार वर्ष 2010 में THEMIS अंतरिक्ष मिशन के दौरान दर्ज किया था.

अंतरिक्ष भूकंप और सामान्य भूकंप में अंतर
अंतरिक्ष भूकंप और सामान्य भूकंप में कई बड़े अंतर होते हैं. सामान्य भूकंप की उत्पत्ति पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल से होती है, जबकि अंतरिक्ष भूकंप पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में होते हैं. भूकंप का कारण प्लेट्स का आपस में फ्रिक्शन होता है, जबकि अंतरिक्ष भूकंप सौर हवा और मैग्नेटिक प्रोसेस के कारण उत्पन्न होते हैं.

भूकंप से भौतिक कंपन (Seismic Waves) उत्पन्न होते हैं, जो जमीन में दरारें डाल सकते हैं और इमारतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके विपरीत, अंतरिक्ष भूकंप से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स निकलती हैं, जिसका असर बिजली ग्रिड, सैटेलाइट और GPS जैसे तकनीकी सिस्टम पर पड़ता है. जहां भूकंप का प्रभाव ह्यूमन पर सीधा होता है. वहीं, अंतरिक्ष भूकंप पृथ्वी पर कई तरह से असर डाल सकते हैं. जब यह ऊर्जा पृथ्वी के वायुमंडल से टकराती है तो इससे ऑरोरा (Northern Lights) जैसे प्रकाश उत्पन्न होते हैं, जो विशेष रूप से उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्रों में देखे जाते हैं. इसके अलावा, इन चुंबकीय झटकों के कारण पावर ग्रिड में करंट का उतार-चढ़ाव हो सकता है, जिससे बिजली सप्लाई बाधित हो सकती है.

क्या खतरनाक है अंतरिक्ष भूकंप ?

बता दें कि GPS, टेलीकम्युनिकेशन और अन्य सैटेलाइट बेस्ड कम्युनिकेशन सिस्टम्स पर भी इसका प्रभाव देखा गया है. यदि कोई अंतरिक्ष मिशन उस समय सक्रिय होता है, तो वहां मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को रेडिएशन का सामना करना पड़ सकता है.अब सवाल आता है क्या अंतरिक्ष भूकंप खतरनाक है? इसका उत्तर हां और नहीं दोनों है. अंतरिक्ष भूकंप का कोई भौतिक प्रभाव नहीं होता, जैसे कि इमारतों का गिरना या धरती में दरारें आना, लेकिन ये डिजिटल और तकनीकी सिस्टम पर गहरा असर डाल सकते हैं, जो आधुनिक जीवन के लिए उतना ही खतरनाक हो सकता है.

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