एक्सप्लोरर

BLOG: आखिर क्यों 'इलेक्शन विवाद मशीन' बनती जा रही है EVM ?

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी 'ईवीएम' आखिर क्यों 'इलेक्शन विवाद मशीन' बनती जा रही है? अब केवल सफाई से बात बनती नहीं दिख रही, क्योंकि ईवीएम के मत सत्यापन पर्ची यानी वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) से जुड़ने के बाद जो सच्चाई सामने है, उससे निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है. ईवीएम से अगर छेड़छाड़ हुई, तो यह जनता की ताकत से खिलवाड़ है.

'प्रत्यक्षम् किम् प्रमाणम्' वाले अंदाज में, रही-सही कसर, शुक्रवार 31 मार्च को तब पूरी हो गई, जब एमपी के भिंड में होने वाले उपचुनाव का जायजा लेने पहुंचीं प्रदेश की मुख्य निर्वाचन अधिकारी सलीना सिंह ने 'वीवीपीएटी' की परीक्षा के लिए मीडिया की मौजूदगी में डेमो के लिए दो अलग-अलग बटन दबाए और दोनों ही बार पर्चियां 'कमल' की निकलीं.

ईवीएम सच या वीवीपीएटी?

लेकिन उससे भी बड़ा सच यह है कि गोवा में 4 फरवरी को हुए विधानसभा चुनाव में सभी जगह 'वीवीपीएटी' का उपयोग किया गया, पर वहां सब कुछ ठीक-ठाक रहा! ऐसे में ईवीएम पर विपक्ष के सवालों का जवाब जरूरी है. अब प्रश्न है कि ईवीएम सच या वीवीपीएटी? जाहिर है, जो दिखता है वो सच है, लेकिन जो नहीं दिखा उसे कैसे सच मानें?

सवाल आसानी से सुलझता नहीं दिख रहा, क्योंकि सवाल विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के चुनावों की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वास का है. एक और दिलचस्प तथ्य यह भी कि साल 2009 में 'ईवीएम' पर खुद बीजेपी की ओर से दिग्गज नेता नेता लालकृष्ण आडवाणी और सुब्रमण्यम स्वामी ने भी कई आरोप लगाए थे.

स्वामी सुप्रीम कोर्ट भी गए, जहां 9 अक्टूबर 2013 को 'ईवीएम' में 'वीवीपीएटी' लगाने और हर वोटर को रसीद जारी करना वाली मांग पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को व्यवस्था देते हुए कहा कि 'वीवीपीएटी' स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए जरुरी है और भारत निर्वाचन आयोग को इस प्रणाली की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए ईवीएम को 'वीवीपीएटी' से जोड़ने के निर्देश दिए.

वीवीपीएटी पर क्रम संख्या, नाम, उम्मीदवार का चुनाव चिन्ह होता है दर्ज

दरअसल 'वीवीपीएटी' मतपत्र रहित मतदान प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए, मतदाताओं को फीडबैक देने का तरीका है. इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की निष्पक्षता पुष्टि है. ये ऐसा प्रिंटर है जो 'ईवीएम' से जुड़ा होता है. वोट डालते ही एक पावती निकलती है जो मतदाता के देखते ही एक कन्टेनर में चली जाती है. पर्ची पर क्रम संख्या, नाम, उम्मीदवार का चुनाव चिन्ह दर्ज होता है. इससे वोट डालने की पुष्टि होती है और वोटर को चुनौती देने की अनुमति भी मिलती है.

2014 के आम चुनाव में 'ईवीएम' में पावती रसीद लागू करने की योजना चरणबद्ध तरीके से लागू करने के निर्देश दिए थे, ताकि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित हो. जिस पर आयोग ने कहा कि सभी 543 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में इस प्रणाली को लागू करने के लिए 14 लाख 'वीवीपीएटी' मशीनों की जरूरत होगी, जिसके लिए समय बहुत कम है. ऐसे में 2019 के आम चुनावों के पहले इन्हें लगा पाना संभव नहीं होगा. इसके लिए 1500 करोड़ रुपयों की भी जरूरत पड़ेगी.

'ईवीएम' मशीन से छेड़छाड़ के आरोप

अभी 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के बाद, चाहे यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव या मायावती हों, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पंजाब को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हों, सभी ने 'ईवीएम' मशीन से छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे, जबकि अक्टूबर 2010 में सर्वदलीय बैठक में 'ईवीएम' इस्तेमाल के लिए व्यापक सहमति बनाते हुए कई राजनैतिक दलों ने 'वीवीपीएटी' का सुझाव दिया था, तभी से संभावना तलाशी जाने लगीं.

लेकिन जब इसके अनिवार्य इस्तेमाल की तैयारियां क्रमश: अमल में आने लगीं, तभी एमपी में यह सब हो गया. यह संयोग ही कहा जाएगा जो इसी 24 मार्च शुक्रवार को 'ईवीएम' से छेड़छाड़ मामले में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से 4 हफ्तों में जवाब मांगा ही था कि अगले ही शुक्रवार 31 मार्च को एमपी में कैमरों की मौजूदगी में 'वीवीपीएटी' की अलग कहानी कैद हो गई. अब सवाल यह भी उठेगा, मशीन का आधिकारिक अंतिम उपयोग कहां हुआ था. जाहिर है, इसे कई कानूनी पहलुओं से जोड़ा भी जाएगा.

आयोग और राजनीतिक दलों के बीच माथापच्ची

इधर, चुनाव आयोग यह दावा करता रहा है कि 'ईवीएम' मशीनों से तब तक छेड़छाड़ नहीं की जा सकती, जब तक उनकी टेक्निकल, मैकेनिकल और सॉफ्टवेयर डिटेल गुप्त रहें, तो क्या इसकी गोपनीयता भंग हो चुकी है? सवाल बहुत हैं, जिन पर आयोग और राजनीतिक दलों के बीच लंबी माथापच्ची होगी. पर विडंबना यही है कि दिखने वाली मशीन से विवाद उठा है.

'ईवीएम' की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए जहां जर्मनी ने इसे प्रतिबंधित किया था, वहीं इसी नक्शे कदम पर नीदरलैंड्स ने प्रतिबंधित किया. इटली ने भी नतीजों को आसानी से बदलने का आरोप लगाते हुए इसे चुनाव प्रक्रिया से ही हटा दिया, जबकि आयरलैंड ने संवैधानिक चुनावों के लिए 'खतरा' तक बता दिया.

आयोग, सुप्रीम कोर्ट और राजनीतिक दलों पर है सबकी निगाहें 

अमेरिका के कैलीफोर्निया सहित दूसरे राज्यों ने भी बिना पेपर ट्रेल के 'ईवीएम' के उपयोग से मना कर दिया. लेकिन हमारे देश में पेपर ट्रेल के डेमों में आई गड़बड़ी को लेकर सबकी निगाहें आयोग, सुप्रीम कोर्ट और राजनीतिक दलों पर है.

आखिर सवाल दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में जनता की ताकत के साथ कथित 'खिलवाड़' का जो है, साथ ही यह देखना अहम होगा कि चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट में मत सत्यापन पर्ची की हकीकत पर अब क्या कहता है.

(लेखक ऋतुपर्ण दवे स्वतंत्र पत्रकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

Gujarat Nikay Chunav Results 2026 Live: गुजरात निकाय चुनाव के शुरुआती रुझान चौंकाने वाले, जानें BJP-कांग्रेस और AAP में कौन आगे
Live: गुजरात निकाय चुनाव के शुरुआती रुझान चौंकाने वाले, जानें BJP-कांग्रेस और AAP में कौन आगे
Delhi Liquor Policy Case Hearing Live: दिल्ली में 'न्याय' पर सियासत, राजघाट जाएंगे अरविंज केजरीवाल और सिसोदिया
Live: दिल्ली में 'न्याय' पर सियासत, राजघाट जाएंगे अरविंज केजरीवाल और सिसोदिया
UP News: मेरठ में डबल बेड के नीचे मिला सीक्रेट तहखाना, पकड़ी गई अवैध हथियार फैक्ट्री, 11 आरोपी गिरफ्तार
मेरठ में डबल बेड के नीचे मिला सीक्रेट तहखाना, पकड़ी गई अवैध हथियार फैक्ट्री, 11 आरोपी गिरफ्तार
तरबूज खाने से 4 लोगों की मौत मामले में बड़ा अपडेट, पुलिस कर रही पूछताछ, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
तरबूज खाने से 4 लोगों की मौत मामले में बड़ा अपडेट, पुलिस कर रही पूछताछ, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

वीडियोज

Chitra Tripathi: वोट का 'धर्मयुद्ध', बंगाल में कौन जीतेगा? | West Bengal Election | Mamata Banerjee
Breaking News: एक तरफ प्रचार, दुसरी तरफ हमला...TMC बना निशाना! | West Bengal Election | Voilence
West Bengal Election 2026: बंगाल में Modi-Yogi-Shah का Road Show | Mamata Banerjee | TMC | BJP
Trump News: ट्रंप को मारने आए शख्स Cole Tomas Allen का सच जानकर उड़ जाएंगे होश! | Secret Service
Kejriwal vs Justice Swarna Kanta: केजरीवाल का खुला विद्रोह, सत्याग्रह का ऐलान! | Delhi High Court

फोटो गैलरी

Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
दाऊद इब्राहिम का करीबी सलीम डोगा लाया गया भारत, इस्तांबुल से गिरफ्तारी के बाद किया गया डिपोर्ट
दाऊद इब्राहिम का करीबी सलीम डोगा लाया गया भारत, इस्तांबुल से गिरफ्तारी के बाद किया गया डिपोर्ट
IPS अजयपाल शर्मा के Video पर फिर भड़के अखिलेश यादव, सीएम योगी से जोड़ा कनेक्शन, कहा- कार्रवाई हो
IPS अजयपाल शर्मा के Video पर फिर भड़के अखिलेश यादव, सीएम योगी से जोड़ा कनेक्शन, कहा- कार्रवाई हो
PM मोदी ने अपने 'दोस्तों' के साथ खेला फुटबॉल, शेयर की खूबसूरत तस्वीरें
PM मोदी ने अपने 'दोस्तों' के साथ खेला फुटबॉल, शेयर की खूबसूरत तस्वीरें
IPL Playoffs Scenario: क्या RCB की प्लेऑफ में जगह पक्की? शर्मनाक हार के बाद DC की उम्मीदों को लगा झटका; समझिए समीकरण
क्या RCB की प्लेऑफ में जगह पक्की? शर्मनाक हार के बाद DC की उम्मीदों को लगा झटका; समझिए समीकरण
राजामौली की 'Varanasi' के बाद महेश बाबू ने साइन कीं 3 बैक-टू-बैक बड़ी फिल्में? टीम ने दिया ऑफिशियल अपडेट
'Varanasi' के बाद महेश बाबू ने साइन कीं 3 बैक-टू-बैक बड़ी फिल्में? टीम ने दिया ऑफिशियल अपडेट
TMC सांसद यूसुफ पठान ने BJP की तारीफ में पढ़े कसीदे! ममता-महबूबा से नीतीश तक भी नहीं हैं इससे पीछे, इसके पीछे की मजबूरी क्या?
TMC सांसद यूसुफ पठान ने BJP की तारीफ में पढ़े कसीदे! ममता-महबूबा से नीतीश तक की मजबूरियां क्या?
AHSEC HS Result 2026: असम बोर्ड ने जारी किया 12वीं क्लास का रिजल्ट, जानें कैसे आसानी से चेक कर सकते हैं नतीजे
असम बोर्ड ने जारी किया 12वीं क्लास का रिजल्ट, जानें कैसे आसानी से चेक कर सकते हैं नतीजे
Tech Tips: Tower Cooler vs Desert Cooler... किससे मिलेगी गर्मियों में राहत दिलाने वाली ठंडी हवा?
Tech Tips: Tower Cooler vs Desert Cooler... किससे मिलेगी गर्मियों में राहत दिलाने वाली ठंडी हवा?
Embed widget