By: पंकज झा, एबीपी न्यूज | Updated at : 06 Jun 2018 02:57 PM (IST)
लखनऊ: यूपी में मुख्यमंत्री की कुर्सी खाली नहीं है. लेकिन अखिलेश यादव सीएम बनने को बेकरार हैं. विधानसभा चुनाव तो अभी चार साल दूर हैं. लेकिन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष का दिल है कि मानता नहीं है.वे तो अभी से चुनावी मैदान में कूदने को ताल ठोंक रहे है. सरकारी बंगला छूटने के बाद के बाद से अखिलेश ने सायकिल चलाने की प्रैक्टिस शुरू कर दी है. वे हर दिन सवेरे-सवेरे गोमती रिवर फ्रंट पहुंच जाते हैं. कभी क्रिकेट खेलते हैं तो कभी साईकिल की सवारी करने लगते हैं.
अखिलेश बोले, हम तो तैयार हैं अखिलेश खुद भी कहते हैं " मैंने तो तैयारी शुरू कर दी है, इन दिनों खूब एक्सरसाइज भी कर रहा हूं ". कैराना से लोक सभा का उपचुनाव जीत कर तबस्सुम हसन आज समाजवादी पार्टी ऑफिस पहुंची. अखिलेश यादव ने उन्हें जीत की बधाई दी . एक पत्रकार ने उनसे वन नेशन, वन इलेक्शन के बारे में पूछ लिया . अखिलेश बोले " हम तो तैयार हैं, अगले साल लोक सभा और विधान सभा के चुनाव वे चाहे तो साथ कर लें".
उपचुनाव में लगातार जीत से अखिलेश यादव गदगद हैं उपचुनाव में लगातार जीत से अखिलेश यादव गदगद हैं. बीएसपी के समर्थन से समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर और फूलपुर लोक सभा सीट जीत ली. राजनीति में जिसे असंभव समझा जाता था, अखिलेश ने उसे चुटकी बजा कर संभव बना दिया. बुआ मायावती ने अपने भतीजे अखिलेश को आशीर्वाद दे दिया . सीएम योगी आदित्यनाथ ना गोरखपुर बचा पाए और ना डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या अपनी सीट फूलपुर बचा पाए.
राजनैतिक गलियारों में कहा जा रहा है कि बुआ दिल्ली की और भतीजा लखनऊ की राजनीती करेंगे आरएलडी को समर्थन देकर अखिलेश ने कैराना लोक सभा के उपचुनाव में बीजेपी को धूल चटा दिया. समाजवादी पार्टी की तबस्सुम हसन को यहां आरएलडी ने टिकट दिया. अखिलेश के इस दांव से मुज़फ्फरनगर दंगों के बाद पहली बार जाट और मुस्लिम वोटर एकजुट हुए. यूपी विधानसभा में विपक्ष के नेता रामगोविंद चौधरी एबीपी न्यूज़ के मंच पर मायावती को पीएम और अखिलेश को सीएम बनाने की बात कह चुके हैं. यहां के राजनैतिक गलियारों में कहा जा रहा है कि बुआ दिल्ली की और भतीजा लखनऊ की राजनीती करेंगे. खुद मायावती ने भी कभी इसका खंडन नहीं किया.
खबर है कि इसी चक्कर में अखिलेश यादव गठबंधन में मायावती के लिए लोक सभा की अधिक सीटें छोड़ने को तैयार हो गए हैं. अब तक तो यही फार्मूला रहा है जो पार्टी जिस सीट पर विजयी रही थी या फिर दूसरे नंबर पर थी, वो उस जगह से चुनाव लड़ेगी.सेन्ट्रल लॉ कमीशन ने देश भर में सभी चुनाव एक साथ कराने का सुझाव दिया है. इस सुझाव पर योगी सरकार ने भी 23 पन्नों की एक रिपोर्ट दी है. जिसमें 2024 तक लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की बात कही गयी है.
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