By: ABP News Bureau | Updated at : 25 Sep 2016 06:16 PM (IST)

पूरे हाजी पीर पास को भारत में मिलाया
डॉ राजीव बताते हैं कि जब 9 अगस्त 1965 को पाकिस्तान ने उरी और पूंछ दोनों तरफ से मोर्चा खोल दिया था तब उनके पिता मेजर रनबीर सिंह 19 पंजाब रेजिमेंट में थे. उसी दौरान मेजर रनबीर सिंह अपनी टुकड़ी के साथ पाकिस्तानी सेना से टक्कर लेते हुए पूरे हाजी पीर पास को भारत में मिला लिए. यही नहीं पाक अधिकृत कश्मीर की कई और चौकियों को भी भारत में शामिल कर लिया था.
पाकिस्तान को वापस कर दिया सारा इलाका
इस दौरान पाकिस्तान का काफी गोला-बारूद भी इनके कब्जे में आ गया था. जिसके बाद पकिस्तान की सेना ने 21 सितम्बर को दोबारा हमला किया. जिसमें मेजर रनबीर सिंह लड़ते हुए शहीद हो गए और उसी दिन शाम को सीज फायर हो गया. जिसके बाद तत्कालीन भारत सरकार ने समझौते के तहत वो जीता हुआ सारा इलाका पाकिस्तान को वापस कर दिया जो भारत के जाबांज सैनिकों ने अपनी जान गंवा कर हासिल किया था. इसके साथ ही सबसे महत्वपूर्ण हाजी पीर पास का इलाका भी पाकिस्तान को दे दिया गया.

300 किलोमीटर हो गई 30 किलोमीटर की दूरी
डॉ राजीव के मुताबिक हाजी पीर पास का इलाका अगर आज भारत के पास होता तो पाकिस्तान से होने वाली आतंकी घुसपैठ से भारत को इतना नुकसान ना होता क्योंकि यही एक इलाका ऐसा है जहां से आतंकी पाकिस्तान से घुसपैठ करके उरी और पूंछ जैसे क्षेत्रो में आतंक फैलाते हैं.
जिस समय हाजी पीर पास को भारत में शामिल कर लिया गया था उस समय उरी से पूंछ का रास्ता मात्र 30 किलोमीटर हो गया था जबकि हाजी पीर पास को वापस करने के बाद ये दूरी लगभग 300 किलोमीटर हो गई.
तोड़ दिया शहीद के परिवार से किया वादा
डॉ राजीव की मानें तो मेजर रनबीर सिंह की पत्नी के पास तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने चिट्ठी भी भेजी थी कि पाकिस्तान के साथ किसी तरह का सेटेलमेंट नहीं करेंगे लेकिन ताशकंद में जाकर शास्त्री जी ने वो सेटेलमेंट कर के शहीद के परिवार से किया वादा तोड़ दिया था.
मेजर रनबीर सिंह को उनकी बहादुरी के लिए वीर चक्र से नवाजा गया था लेकिन आज भी सैनिक और उस लड़ाई में शहीद होने वालों के परिजन कहते हैं कि हाजी पीर पास का इलाका अगर वापस न किया गया होता तो पठानकोट हमला न होता और ना ही उरी में हमारे 18 जांबाज सैनिक शहीद होते.
जानें कौन हैं शहीद मेजर रनबीर सिंह ?
जन्म तिथि: 10 अगस्त, 1938
जन्म स्थान: ग्राम नांगल, मेरठ (अब बागपत)
प्रारंभिक शिक्षा: जाट हीरोज कॉलेज, बड़ौत
साल 1954: एनडीए में दाखिला मिला
कमीशन: 14 दिसंबर 1958
पहली पोस्टिंग: सैनिक लेफ्टिनेंट, 9 पंजाब बटालियन
लेफ्टिनेंट बने: 14 दिसंबर, 1960
साल 1961: नेफा में बने कैप्टन
21 अक्टूबर 1962: चीन के साथ युद्ध में शामिल
14 दिसंबर 1963: मेजर बनाए गए
30 मार्च 1964: 19 पंजाब बटालियन में शामिल
21 सितंबर 1965: हाजीपीर क्षेत्र में हुए शहीद
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