क्यों करुणानिधि के समाधि स्थल का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, क्या है मरीना बीच के मायने?
करुणानिधि समर्थकों को अपने नेता के मरने के बाद भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पढ़ रहा है. इसकी वजह है वो जगह ना मिलना जिसपर समर्थक अपने नेता की समाधि चाहते हैं.

नई दिल्ली: दक्षिण की राजनीति के बड़े चेहरों में एक और तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री रहे एम करुणानिधि का निधन मंगलवार देर शाम को हुआ. आज उनका अंतिम संस्कार होना है और इसे लेकर राज्य सरकार और करुणानिधि के समर्थकों के बीच मामला इतना बढ़ गया है कि मद्रास हाई कोर्ट में इस पर सुनवाई चल रही है. कोर्ट में ये मामला इसलिए पहुंचा है क्योंकि करुणानिधि समर्थक चाहते हैं कि उनकी समाधि मरीना बीच़ पर बनाई जाए लेकिन राज्य सरकार ने मरीना बीच पर जगह देने से इंकार कर दिया है. मंगलवार शाम 6 बजकर 10 मिनट पर करुणानिधि ने चेन्नई में अंतिम सांसें लीं. उनका इलाज कावेरी अस्पताल में चल रहा था और अस्पताल के मैनेजमेंट में देर शाम उनके देहांत की जानकारी दी.
क्यों हाई कोर्ट पहुंचा समाधि का मामला? दक्षिण के दिग्गज नेता जिन्होंने भारतीय राजनीति में दक्षिण की महत्ता को दोबारा परिभाषित किया उनके समर्थकों को अपने नेता के मरने के बाद भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है. इसकी वजह है वो जगह ना मिलना जिसपर समर्थक अपने नेता की समाधि चाहते हैं. चेन्नई के मरीना बीच पर राज्य सरकार ने जगह देने से मना कर दिया, जिसके बाद डीएमके समर्थकों ने हंगामा किया. करुणानिधि की समाधि के लिए तमिलनाडु सरकार दूसरी जगह देने को तैयार है लेकिन उनके समर्थक मरीना बीच पर ही समाधि चाहते हैं. राज्य सरकार करुणानिधि की समाधि के लिए भी वही जगह देने की बात कर रही है जहां पर सी राजगोपालाचारी और के कामराज की समाधि है.
जब राज्य सरकार और समर्थकों के बीच बात नहीं बनी तो मद्रास हाईकोर्ट में समाधि स्थल को लेकर याचिका दायर की गई. रात में सुनवाई में राज्य सरकार ने जवाब देने के लिए वक्त मांगा, जिसके बाद कोर्ट ने आज सुबह आठ बजे दोबारा सुनवाई शुरू की है.
दक्षिण में क्या हैं मरीना बीच़ के मायने? चेन्नई की मरीना बीच महज एक बीच नहीं है बल्कि दक्षिण में द्रविड़ की राजनीति में इस जगह का खास महत्व है. ये बीच दिग्गज द्रविड़ राजनेताओं की समाधि के लिए जानी जाती है. मरीना बीच वो जगह है जो द्रविड़ राजनीति का इतिहास बयां करती है. इस जगह पर द्रविड़ राजनीति के तीन सबसे बड़े नेताओं की समाधि है.
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के संस्थापक सीएन अन्नादुरै की समाधि भी मरीना बीच ही है. अन्नादुरै के बाद दक्षिण के बड़े नेता एमजीआर को मरीना बीच पर जगह दी गई और हाल ही के दिनों में एमजीआर की राजनीतिक धरोहर संभालने वाली जे. जयललिता को मरीना बीच पर समाधि दी गई. ऐसे में भारतीय राजनीति को 61 साल देने वाले एम करुणानिधि के लिए भी उनके समर्थक मरीना बीच पर समाधि की मांग कर रहे हैं.
हालांकि ये जानना बेहद जरूरी है कि द्रविड़ आंदोलन के जनक पेरियार की समाधि मरीना बीच पर नहीं बनाई गई. चेन्नई के दूसरे इलाके को पेरियार के लिए चुना गया जो आज 'पेरियार थिडाल' के नाम से जाना जाता है.
























