Ram Mandir Donation Case: राम मंदिर में किसकी सिफारिश पर मिलती थी नौकरी? पढ़ें अयोध्या मेयर ने क्या दिया जवाब
Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या के मेयर गिरीश त्रिपाठी ने राम मंदिर में नौकरी लगने के सवाल पर अहम प्रतिक्रिया दी. उन्होंने बताया कि किसके कहने पर मंदिर में नौकरी लगती थी.

अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावे की चोरी का मामला अभी तक शांत नहीं हो सका है. इस मामले को लेकर अयोध्या के मेयर गिरीश त्रिपाठी की अहम प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के ट्वीट के बाद यह मामला संज्ञान में आया. इतना ही नहीं, उन्होंने राम मंदिर में नौकरी लगने के मामले पर भी प्रतिक्रिया दी. गिरीश त्रिपाठी ने कहा कि उनसे भी अक्सर कई लोग नौकरी लगवाने को लेकर बात करते रहते थे.
गिरीश त्रिपाठी ने एबीपी न्यूज से खास बातचीत करते हुए कहा, 'समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जब ट्वीट किया और वह चीजें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, तब हम लोगों के संज्ञान में आया कि राम मंदिर में कोई जो चढ़ावा हो रहा है, उसमें चोरी हो हुई है. इससे पहले जानकारी नहीं थी.'
उन्होंने राम मंदिर में नौकरी लगवाने के सवाल पर कहा, क्योंकि हम लोग जनप्रतिनिधि हैं तो सामान्यतौर पर लोग नौकरियों के लिए हमें अप्रोच करते रहते हैं. इसलिए हम लोग ऐसे लोगों को ट्रस्ट में भेज देते थे. अनिल जी के पास गोपाल जी के पास या जिसके पास भी भेजते थे, कि भाई इनका एग्जामिन कर लो अगर आपको लगता हो कि ये आपके यहां उपयुक्त हैं, काम करने के लायक तो रख लीजिए. लिहाजा लोगों को नौकरियां मिल जाती थीं.
गिरीश त्रिपाठी ने कहा, 'अगर हमने किसी को भेजा है तो वे अपने स्तर पर एग्जामिन करते थे. उसका स्कैनिंग करते थे. अब हम लोग एक जनप्रतिनिधि होने के नाते लोगों को आगे बढ़ाते रहते थे, भेजते रहते थे.'
दान चोरी के मामले पर क्या बोले ब्रजेश पाठक
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कथित दानचोरी मामले पर कहा, 'इसमें निष्पक्ष जांच हो और दोषी बचे ना, सरकार इसको सुनिश्चित करेगी.'
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