राजस्थान चुनाव: मारवाड़ में किसकी बनेगी सरकार और किसकी कोशिशे होंगी बेकार?
मारवाड़ को लेकर कांग्रेस-बीजेपी के अपने-अपने दावे हैं पिछले चुनाव में इस बेल्ट में बीजेपी की आंधी में कांग्रेस तिनके की तरह उड़ गई थी. लेकिन इस बार के चुनाव परिणाम हालात बदल भी सकते हैं.

मारवाड़: चुनाव आयोग के राजस्थान विधानसभा के लिए चुनाव की तारीखों के ऐलान करने के बाद से ही सूबे में सियासी पारा चढ़ा हुआ है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही राज्य में अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं. हार-जीत के इन सभी समीकरणों में नेताओं का मुख्य ध्यान मारवाड़ पर है. ये वो बेल्ट है जहां से कांग्रेस के क़द्दावर नेता अशोक गहलोत ताल्लुक रखते हैं. जोधपुर जिले की सरदारपुरा सीट से गहलोत विधायक हैं. पिछले चुनाव में मारवाड़ बेल्ट में बीजेपी की आंधी में कांग्रेस उड़ गयी थी. मारवाड़ की 33 सीटों में से करीब 90 फीसदी पर बीजेपी ने कब्जा जमाया था. मारवाड़ के जोधपुर संभाग में जोधपुर, पाली, बाड़मेर, जैसलमेर, जालोर, सिरोही जैसे 6 जिले हैं.
बीजेपी का दावा दोहराएंगे पिछले चुनाव का रिकार्ड पिछले आम चुनावों में बीजेपी ने इस बेल्ट की कुल 33 सीटों पर जीत दर्जकर सरकार बनाई थी. कांग्रेस सिर्फ 3 सीटें ही जीत पाई जिसमें एक सीट सरदारपुरा पर अशोक गहलोत जीते थे. पांच साल सरकार चलाने के बाद इस इलाके में मची सियासी उथल-पुथल में हालात बदल चुके हैं. मारवाड़ में अपनी जीत को दोहराने के लिए बीजेपी ने हाल ही में यहां के अहम जिला - पाली में पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ चुनाव पर मंथन किया था. खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इसमें शामिल हुई थीं. जिसमें भावी उम्मीदवारों का फीडबैक लिया गया और कमज़ोरियों और मज़बूतियों पर चर्चा हुई.
कांग्रेस-बीजेपी के अपने-अपने दावे
जोधपुर से बीजेपी के मेयर घनश्याम ओझा ने कहा, ''पिछली बार हमने 30 सीटे जीती थीं लेकिन इस बार हम वो 30 सीट तो जीतेंगे ही साथ अशोक गहलोत को हराकर सरदारपुरा भी जीतेंगे. विकास के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएंगे.''
वहीं दावों की इस रेस में कांग्रेस भी पीछे नहीं है. कांग्रेस का दावा है कि जनता वसुंधरा सरकार को बदलना चाहती है. सियासी हालात हमारे पक्ष में हैं और सभी 33 सीटें कांग्रेस जीतेगी. इसके साथ ही साथ कांग्रेस राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार भी बनाएगी.
सियासी पंडितों को दावा पूरी तरह से जातीय होंगे इस बारे के चुनाव
राजस्थान के चुनावी पंडितों ने अभी से ही आम चुनाव को लेकर कयास लगाना शुरू कर दिया है. सियासी पंडितों की मानें तो इस बार का आम चुनाव पूरी तरह से 100 फीसद जातीय चुनाव रहेगा. समराव प्रकरण और आनंद पाल एनकाउंटर के बाद राजपूतों के बढ़ते गुस्से को कम करने के लिए सरकार ने राजपूतों को अच्छे पदों पर बैठाया. लेकिन राजपूतों का गुस्सा शांत नहीं हुआ उसका सबूत है मानवेंद्र सिंह का कांग्रेस में शामिल होना. राजपूतों का कांग्रेस की तरफ झुकाव के उलट जाट बीजेपी की तरफ गोलबंद हो सकते हैं.
इस चुनाव में बीजेपी का हाल ऐसा तो नहीं होगा जैसा पिछले चुनाव में कांग्रेस को हुआ था लेकिन यह तो तय है की इस बेल्ट में बीजेपी को बड़ा नुकसान होगा. मारवाड़ बेल्ट में राजपूतों की आबादी करीब 25 फीसदी है. जानकारों के मुताबिक बीजेपी को नुकसान हो सकता है. कांग्रेस सत्ता विरोधी लहर और मानवेंद्र सिंह को कांग्रेस में शामिल करवाकर इस इलाके से बहुत उम्मीद लगाए बैठी है. लेकिन असली नतीजे बाद में ही पता चलेंगे कि मारवाड़ ने किस दल को कितना दिया."
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