अमेरिका की कौन सी हरकत पर भड़के शशि थरूर, बोले- 'Quad के ताबूत में ठोंक दी आखिरी कील'
US Pacific Command: अमेरिका ने आठ साल पुराने फैसले को पलटते हुए यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) कर दिया है.

US Pacific Command: अमेरिका ने आठ साल पुराने फैसले को पलटते हुए यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (यूएसआईएनडीओपैकोम) का नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड (यूएसपैकोम) कर दिया है. इस फैसले ने भारत समेत रणनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि कमांड के नाम से ‘इंडो’ शब्द हटाना अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति और क्वाड जैसे समूहों को लेकर बदलते संदेश का संकेत हो सकता है.
शशि थरूर ने उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “क्या यह क्वाड के ताबूत में एक और कील है?” उन्होंने अमेरिकी रक्षा विभाग के आदेश की प्रति भी साझा की.
अमेरिका ने क्या कहा?
अमेरिकी अधिकारियों ने हालांकि साफ किया है कि यह केवल नाम बदलने का फैसला है. उनका कहना है कि कमांड की संरचना, जिम्मेदारियों और क्षेत्रीय प्रतिबद्धताओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है. अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, यूएसपैकोम नाम को बहाल करना कमांड की ऐतिहासिक विरासत का सम्मान है. विभाग ने कहा कि यह कमांड 1947 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन द्वारा स्थापित की गई थी और इसका सैन्य इतिहास बेहद महत्वपूर्ण रहा है.
1947 से 2018 तक था यूएसपैकोम
यूएस पैसिफिक कमांड की स्थापना 1 जनवरी 1947 को हुई थी और यह 70 वर्षों से अधिक समय तक इसी नाम से संचालित होती रही. यह अमेरिका की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी यूनिफाइड कॉम्बैटेंट कमांड मानी जाती है. इसका क्षेत्र अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है.
2018 में क्यों बदला गया था नाम?
साल 2018 में तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने इसका नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड किया था. उस समय अमेरिका ने कहा था कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर की सुरक्षा चुनौतियां अब एक-दूसरे से जुड़ चुकी हैं, इसलिए नाम में ‘इंडो’ जोड़ना जरूरी है. जेम्स मैटिस ने तब कहा था कि यह कमांड बॉलीवुड से हॉलीवुड तक और पेंगुइन से ध्रुवीय भालुओं तक फैले क्षेत्र को कवर करती है और अमेरिकी राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में इसकी अहम भूमिका है.
भारत के लिए क्यों है अहम?
हवाई स्थित यह कमांड प्रशांत महासागर, हिंद महासागर के बड़े हिस्से, पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया के कुछ क्षेत्रों की निगरानी करती है. इंडो-पैसिफिक ढांचे के तहत यही कमांड भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग का प्रमुख माध्यम बनी. संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में इसकी बड़ी भूमिका रही है.

























