अरूणाचल प्रदेश में निजी लोगों को दिए गए ‘आधिकारिक’ पासपोर्ट : सीबीआई

नई दिल्ली: सीबीआई ने विदेश मंत्रालय के अज्ञात अधिकारियों और एजेंटों के बीच गठजोड़ की जांच के लिए एक एफआईआर दर्ज की. यह मामला कुछ निजी लोगों को अमेरिका भेजने का है. इन लोगों को अरूणाचल प्रदेश सरकार का अधिकारी बताते हुए उनके लिए ‘‘आधिकारिक’’ पासपोर्ट की व्यवस्था की गई और फिर उस पासपोर्ट पर अमेरिका भेजा गया.
एफआईआर में कहा गया है कि 12 लोगों को अरूणाचल प्रदेश सरकार का अधिकारी दर्शाते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ‘‘आधिकारिक’’ पासपोर्ट जारी करने के लिए साजिश रची गई. सरकारी अधिकारी अगर आधिकारिक कार्य से यात्रा करते हैं तो उन्हें ‘‘आधिकारिक’’ पासपोर्ट जारी किया जाता है. ऐसे किसी भी पासपोर्ट का कवर सफेद होता है.
इस सिलसिले में एजेंसी ने मिली सूचना के आधार पर निजी लोगों राजा किपा, थूपटेन, कलदेन कुनसेंग, लकी और मंत्रालय के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.
सीबीआई ने अपनी एफआईआर में लोक सेवकों पर आपराधिक कदाचार, आपराधिक साजिश, मानव तस्करी, धोखाधड़ी, फर्जी तरीके से आधिकारिक पासपोर्ट हासिल करने के आरोप लगाए हैं.
एफआईआर में कहा गया है कि कथित आपराधिक साजिश दिसंबर 2016 से इस साल मार्च के बीच रची गयी. आरोप के अनुसार 12 लोगों ने अमेरिका के लिए गैर आप्रवासी वीजा के लिए आवेदन किया था और अपना ‘‘आधिकारिक’’ पासपोर्ट तथा एक पत्र पेश किया था जिसे कथित तौर पर मंत्रालय ने कोलकाता में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को लिखा था.
एफआईआर में कहा गया है कि उन्हें वीजा इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था लेकिन सिर्फ चार लोग ही 14 मार्च 2017 को अमेरिकी दूतावास में उपस्थित हुए. वे अपने साथ ऐसे परिचय पत्र भी लेकर आए थे जिनके अनुसार वे अरूणाचल प्रदेश सरकार के अधिकारी थे. इंटरव्यू के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि वे सरकारी अधिकारी नहीं है और उन्होंने अपनी वास्तविक पहचान बता दी थी.
इन लोगों ने इंटरव्यू में खुलासा किया कि किपा, थुपटेन और कुनसेंग ने उनके पासपोर्ट और अमेरिकी वीजा की व्यवस्था करने के लिए लाखों रुपए लिए थे.
इस प्रकार की धोखाधड़ी का यह पहला मामला नहीं है और सीबीआई को मिली जानकारी के अनुसार 10 लोगों के ऐसे ही एक समूह ने पिछले साल दिसंबर में अमेरिका की यात्रा की थी. सीबीआई सूत्रों ने कहा कि वे जल्दी ही विदेश मंत्रालय से ऐसे लोगों को पासपोर्ट जारी करने से संबंधित रिकॉर्ड मांगेंगे.
Source: IOCL

























