नागालैंड: निकाय चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण के खिलाफ हंगामा, दो की मौत

दीमापुर: उत्तर पूर्वी राज्य नागालैंड में स्थानीय निकाय चुनाव में महिलाओं को तैंतीस फीसदी आरक्षण के खिलाफ हंगामा मचा हुआ है. प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की फायरिंग में दो युवकों की मौत से हिंसा और भड़क गई. जिसके बाद सेना को तैनात कर दिया गया है.
NTAC नाम का आदिवासी संगठन कर रहा है विरोध
आरक्षण विरोधी Nagaland Tribes Action Committee ने कल तक पूरी सरकार को इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया है. एबीपी न्यूज आज नागालैंड की कामर्शियल राजधानी दीमापुर पहुंचा जहां इस हिंसा की शुरूआत हुई.

नागालैंड की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद महिलाओं को स्थानीय निकाय चुनाव में तैंतीस फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया था. Naga Mothers' Association नाम का संगठन इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गया था. लेकिन स्थानीय निवासी इसका जबरदस्त विरोध कर रहे हैं.
पुलिस फायरिंग में दो स्थानीय युवकों की मौत
31 जनवरी को प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री टी आर जेलिआंग की कोठी के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे. बताया जा रहा है कि उग्र भीड़ ने सीएम की कोठी में घुसने की कोशिश की. पुलिस ने भीड़ को काबू करने के लिए गोलियां चलाई, जिसमें दो स्थानीय युवकों की मौत हो गई.

क्यों हो रहा है आरक्षण का विरोध ?
आदिवासियों के मुताबिक, आरक्षण अनुच्छेद 371(A) का उल्लंघन है. जिसके तहत नागालैंड को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है. दूसरे राज्यों में महिलाओं को पहले से तैंतीस फीसदी आरक्षण है. यहां एक फरवरी को चुनाव होने थे, लेकिन हिंसा की वजह से फिलहाल चुनाव रद्द कर दिया गया है.
सीएम जेलिआंग से इस्तीफे की मांग
इस पूरे मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्थानीय लोगों से बातचीत से मसले का हल निकालने की अपील की है.
हिंसा को देखते हुए राज्य में भारी सुरक्षाबल तैनात कर दिया गया है. सीएम आवास पर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. वहीं नागा जनजाति ने पूरे मामले की जिम्मेदारी लेते हुए सीएम जेलिआंग समेत पूरे कैबिनेट से इस्तीफे की मांग की है. नागालैंड में Naga People's Front की सरकार है.
Source: IOCL























