शायद हम धर्म, जाति के आधार पर पहले से कहीं अधिक बंटे हुए हैं: जस्टिस गोगोई
एक कार्यक्रम में जस्टिस गोगोई ने सीजेआई दीपक मिश्रा के शानदार करियर के लिए उनकी प्रशंसा की. जस्टिस गोगोई को बुधवार को चीफ जस्टिस पद की शपथ दिलायी जायेगी.

नई दिल्ली: देश के मनोनीत चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सोमवार को कहा कि शायद लोग जाति, धर्म और विचारधारा के आधार पर ‘‘पहले से कहीं अधिक’’ बंटे हुए है और क्या पहनना चाहिए, क्या खाएं या क्या कहें, ये सब अब व्यक्तिगत जीवन के बारे में सामान्य सवाल नहीं रह गए हैं .
जस्टिस गोगोई ने सीजेआई दीपक मिश्रा के शानदार करियर की प्रशंसा की
उन्होंने कहा कि संवैधानिक नैतिकता की कसौटी पर मान्यताओं का निरंतर मूल्यांकन होना चाहिए, जब भी कोई संशय या संघर्ष उत्पन्न हो तो संवैधानिक नैतिकता ही अहम होनी चाहिए और संविधान के प्रति यही सच्ची भक्ति है. मंगलवार को रिटायर हो रहे चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के सम्मान में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में जस्टिस गोगोई ने सीजेआई दीपक मिश्रा के शानदार करियर के लिए उनकी प्रशंसा की.
जस्टिस गोगोई को बुधवार को दिलायी जायेगी चीफ जस्टिस पद की शपथ
जस्टिस गोगोई ने कहा कि नागरिक स्वतंत्रता के मामले में उनका बहुत अधिक योगदान रहा है और इस संबंध में उन्होंने उनके हाल के फैसलों का विशेष उल्लेख किया. जस्टिस गोगोई, जिन्हें बुधवार को चीफ जस्टिस पद की शपथ दिलायी जायेगी, ने कहा,‘‘शायद हम जाति, वर्ग और विचाराधारा के आधार पर पहले से कहीं अधिक बंट गये है. हमें क्या पहनना चाहिए, हमें क्या खाना चाहिए,हमें क्या कहना चाहिए, क्या पढ़ना और सोचना चाहिए , हमारी निजी जिंदगी के छोटे और महत्वहीन सवाल नहीं रह गये है.’’
ये है संविधान के प्रति यही सच्ची भक्ति -जस्टिस गोगोई
उन्होंने कहा,‘‘हालांकि, भले ही वे हमें पहचान और उद्देश्य देते हैं और हमारे लोकतंत्र की महानता को समृद्ध करते हैं, पर ये वे मुद्दे हैं जो हमें बांटकर विभाजित करते हैं. वे हमें उन लोगों से घृणा करवाते है जो भिन्न हैं.’’ जस्टिस गोगोई ने आगे बताया कि चुनौती एक साझा वैश्विक नजरिए के निर्माण और उसके संरक्षण की है जो ‘‘हमें एक समुदाय के रूप में एकजुट करती है’’ और ऐसा साझा दृष्टिकोण संविधान में पाया जा सकता है. उन्होंने कहा,‘‘ जब भी कोई संदेह या संघर्ष उत्पन्न हो तो संवैधानिक नैतिकता ही अहम होनी चाहिए. संविधान के प्रति यही सच्ची भक्ति है.’’
























