10 साल तक जेल, 50 लाख तक फाइन, एंटी पेपर लीक बिल की डिटेल
Paper Leak Amendment Bill 2026: इस कानून का मकसद ऐसे लोगों, संगठित समूहों और संस्थाओं को अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने और अपराध करने से प्रभावी ढंग से रोकना है.

लोकसभा ने लंबी चर्चा के बाद एंटी पेपर लीक बिल को बुधवार (29 जुलाई 2026) ध्वनि मत से पारित हो गया. नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित तौर पर किए गए बल प्रयोग को लेकर गृह मंत्री अमित शाह पर सदन के अंदर और बाहर जमकर निशाना साधा. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लगाए गए आरोपों के बाद घमासान तेज हो गया. विपक्षी दलों के नेताओं ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर गृह मंत्रालय को कटघरे में खड़ा किया और सरकार से जवाब देने की मांग की.
इस बिल में अधिक सख्त सजा का प्रस्ताव है. इस कानून का मकसद ऐसे लोगों, संगठित समूहों और संस्थाओं को अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने और अपराध करने से प्रभावी ढंग से रोकना है, जिससे सार्वजनिक परीक्षाओं की ईमानदारी पर बुरा असर पड़ता है.
एंटी पेपर लीक बिल की बड़ी बातें
1. सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को यह अधिकार देना कि वे प्रस्तावित कानून के तहत अपराधों के मामलों में सुनवाई के लिए किसी भी सत्र अदालत को विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट के तौर पर नामित कर सकें.
2. यह प्रावधान करना कि ऐसी विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों में कार्यवाही रोजाना के आधार पर हो और आरोपपत्र दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी हो जाए.
3. केंद्र सरकार को किसी भी अपराध की जांच के लिए विशेष कार्य बल बनाने का अधिकार देना.
4. यह प्रावधान करना कि कानून के तहत अपराधों की जांच दो महीने के भीतर पूरी हो जाए.
5. सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को कानून के तहत मामलों को चलाने के लिए एक या अधिक विशेष सरकारी अभियोजक नियुक्त करने का अधिकार देना.
6. किसी भी फैसले, सजा या आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच में अपील करने की व्यवस्था करना और अपील स्वीकार होने की तारीख से तीन महीने के भीतर उसका निपटारा करना.
7. नए कानून के तहत, परीक्षाओं में पेपर लीक या अनुचित तरीकों में शामिल पाए गए लोगों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक जेल जाना पड़ सकता है और उन पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
8. संगठित अपराधों के लिए, विधेयक में कम से कम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है.
9. राहुल गांधी ने 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई के लिए गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि छात्रों पर पैलेग गन चलाए गए, जिसकी जिम्मेदारी गृह अमित शाह की है. हालांकि अमित शाह पर लगाए आरोप को सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया है.
10. राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि लोकसभा में तथ्यों के बिना गैरजिम्मेदाराना बात कहना विपक्ष के नेता का व्यवहार नहीं होना चाहिए.
2024 में भी सरकार लाई थी कानून
साल 2024 में कानून तब लाया गया था जब सरकार को प्रश्नपत्र लीक के बड़े विवादों का सामना करना पड़ रहा था. इस कानून से पहले, केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं में शामिल अलग-अलग संस्थाओं की ओर से अपनाए गए अनुचित साधनों या किए गए अपराधों से निपटने के लिए कोई खास ठोस कानून नहीं था. इस कानून का मकसद संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे, बैंकिंग भर्ती परीक्षाओं और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) आदि द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकना है.























