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पाक में पहली बार जाधव से हुई भारतीय राजनयिक की मुलाकात, निगरानी के दबाव में दोहराई पाकिस्तानी रटंत

भारतीय उप उच्चायुक्त गौरव अहलूवालिया की आज कुलभूषण जाधव से मुलाकात हुई. ये मुलाकात करीब साढ़े 12 बजे शुरू हुई तो करीब दो घंटे तक चली. इस दौरान जाधव ने वही दोहराया जो पाक के दबाव में बनाए वीडियो में उन्हें बोलता सुना गया.

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय अदालत से आए फैसले के करीब डेढ़ महीने बाद पाकिस्तान ने अपनी कैद में मौजूद कुलभूषण जाधव से भारतीय राजनयिक को मिलने की इजाजत दी. पाकिस्तान में भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर गौरव आहलूवालिया ने इस कड़ी में सोमवार को जाधव से मुलाकात की. यह तीन साल में पहला मौका था जब कुलभूषण भारतीय राजनयिकों से रूबरू थे. हालांकि करीब दो घंटे के लिए मुहैया कराए इस मुलाकात के मौके पर भी पाकिस्तानी निजाम पैंतरा खेलने से नहीं चूका. लिहाजा कैमरों की निगरानी और पाक कर्मियों की मौजूदगी में वही हुआ जिसकी भारत को आशंका थी. दबाव से घिरे जाधव ने रटा-रटाया पाठ पढ़ने में ही अपनी खैरियत तलाशी.

भारतीय विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रवीश कुमार के मुताबिक इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के प्रभारी गौरव आहलूवालिया ने सोमवार को कुलभूषण जाधव से मुलाकात की. यह मुलाकात 17 जुलाई 2019 को दिए गए अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के सर्वसम्मत निर्णय की रौशनी में आयोजित की गई, जिसमें पाकिस्तान को वियना का उल्लंघन पाया गया था. मुलाकात के बाद जारी बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा, स्पष्ट था कि जाधव पाकिस्तान के निराधार दावों को मजबूत करने वाली एक झूठी कथा सुनाने के लिए अत्यधिक दबाव में थे. विदेश मंत्रालय के अनुसार इस मामले पर अपने इस्लामाबाद में अपने राजनयिक से विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे के कदम का फैसला किया जाएगा.

इस बीच भारतीय राजनयिक और कुलभूषण जाधव की मुलाकात के बाद पाकिस्तानी विदेश कार्यालय प्रवक्ता डॉ मोहम्मद फैसल की तरफ से जारी बयान में स्वीकार किया दोनों की बातचीत के वक्त पाकिस्तानी अधिकारी मौजूद थे. साथ ही पाक ने दावा किया कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बातचीत की रिकॉर्डिंग भी की गई. हालांकि भारत की मांग के मुताबिक इस मुलाकात व बातचीत के दौरान भाषा की कोई पाबंदी नहीं रखी गई थी. ऐसा स्थापित प्रक्रिया के तहत किया गया और साथ ही भारत को इन शर्तों के बारे में पूर्व सूचना भी दी गई थी.

भारतीय उपउच्चायुक्त गौरव आहलूवालिया भारतीय समय अनुसार करीब 11 बजे पाक विदेश मंत्रालय पहुंचे थे. वहां पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ मुलाकात करने के बाद उन्हें उस जगह ले जाया गया जहां कुलभूषण जाधव को रखा गया था. भारतीय समय के मुताबिक करीब साढ़े 12 बजे दोनों की मुलाकात शुरु हुई जो करीब दो घंटे चली.

मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान की शर्तों के बावजूद कॉन्सुलर संपर्क के मौके को लेने का फैसला एक सोची-समझी रणनीति के तहत लिया गया. पाकिस्तान को यह मौका नहीं दिया जा सकता जिसमें वो अंतरराष्ट्रीय अदालत के आगे जाकर कहे कि भारत ही कॉन्सुलर संपर्क की पेशकश को ठुकरा रहा है. लिहाजा पाकिस्तान की तरफ से 1 सितंबर की शाम दिए गए प्रस्ताव को स्वीकार करने का फैसला किया गया.

टेप रिकॉर्डर में लगी कैसेट की तरह बोल रहे थे कुलभूषण जाधव

सूत्रों के मुताबिक करीब दो घंटे की मुलाकात में जाधव काफी देर तक बोलते रहे. इस दौरान जाधव ने रटंत पाठ की तरह वही दोहराया जो इसके पहले पाकिस्तानी दबाव में बनाए वीडियो में उन्हें बोलते सुना गया था. सूत्रों के अनुसार बातचीत कक्ष में लगे कैमरा रिकॉर्डिंग उपकरणों और पाक अधिकारियों की मौजूदगी के बीच कुलभूषण जाधव का ऐसा बर्ताव अपेक्षित ही था. जाहिर है उसके पास पाकिस्तानी पाठ दोहराने के अलावा कोई चारा नहीं थी. क्योंकि मुलाकात के बाद उसे पाकिस्तानी कैद में ही रहना है और वो अपनी जान की सलामती और दी गई धमकियों पर कोई जोखिम नहीं लेना चाहेगा. यही वजह है कि भारत ने जाधव से अबाध और मुक्त माहौल में मुलाकात की इजाजत मांगी थी ताकि वो अपने मुल्क के अधिकारियों से खुलकर बात कर सके.

आईसीजे के फैसले में मिली जीत के बारे में भी दी गई जानकारी

हालांकि मुलाकात करने गए भारतीय अधिकारी गौरव आहलूवालिया ने कुलभूषण जाधव को अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले की जानकारी दी. साथ ही इस बात का भरोसा भी दिया कि भारत सरकार उसके मामले पर कानूनी लड़ाई लड़ने और हर संभव मदद पहुंचाने को तैयार है.

मुलाकात पहली, मगर आखिरी नहीं

सरकारी सूत्रों के मुताबिक वियना संधि 1963 पर अंतरराष्ट्रीय अदालत से मिले कॉन्सुलर संपर्क के अधिकार के तहत कुलभूषण जाधव से भारतीय राजनयिक की मुलाकात पहली थी. इस कड़ी में भारत के पास जरूरत अनुसार अपने नागरिक से पाकिस्तानी कैद में मिलने का हक बरकरार है. हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भारत अगली मुलाकात के लिए कब पाकिस्तान से कहता है.

कॉन्सुलर संपर्क के बाद कानूनी समाधान पर होगा जोर

सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय अदालत से 17 जुलाई को आए फैसले में कॉन्सुलर संपर्क केवल एक तात्कालिक राहत थी जो भारत ने हासिल की. इसकी असली कड़ी जाधव के मामले को नागरिक अदालत के आगे ले जाना और वहां नए सिरे से सुनवाई करना है. पाकिस्तानी सैन्य न्यायालय से जाधव को मिली सजा-ए-मौत के खिलाफ अपील व मामले की निष्पक्ष सुनवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय अदालत पाक को अपने कानूनों में जरूरी सुधार की सलाह भी दे चुका है.

महत्वपूर्ण है कि मार्च 2016 से कुलभूषण जाधव पाकिस्तान की कैद में है. उसके लिए कई बार कॉन्सुलर संपर्क की इजाजत मांगने के बावजूद पाकिस्तान ने भारत के राजनयिकों को उससे मिलने की अनुमति नहीं दी थी. अप्रैल 2017 में उसे सैन्य अदालत से सुनाई गई सजा-ए-मौत के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाजा खटखटाया था. वहीं मामले पर कई दौर की सुनवाई के बाद नीदरलैंड्स के हेग स्थित अंतराष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान को जाधव के मामले में वियना संधि 1963 के उल्लंघन का दोषी करार दिया था.

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