वंदे मातरम् विवाद: पूरे गीत पर वेणुगोपाल को ऐतराज, बोले - 'हम चाहते हैं...'
कांग्रेस से लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने केंद्र से अपील करते हुए, देश के स्वतंत्रता सेनानियों के फैसले का सम्मान करने की अपील की है. उनका बयान केंद्र सरकार के वंदे मातरम् से जुड़े कानून पर आया है.

वंदे मातरम् को लेकर बनाए गए कानून और उसमें जोड़ी गई पंक्तियों को लेकर कांग्रेस के सीनियर नेता और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने रिएक्शन दिया है. कांग्रेस से लोकसभा सांसद ने कहा है कि वंदे मातरम का पूरा संस्करण अनेकतावादी सोच के साथ मेल नहीं खाता है.
उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'वंदे मातरम् का पूरा संस्करण उस मिली जुली और अनेकतावादी सोच के साथ मेल नहीं खाता है. इसकी कल्पना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत के लिए की थी और जिसे उन्होंने संवारा था.'
हमारे लिए गांधी-नेहरू के फैसले अहम: वेणुगोपाल
कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, 'हमारे लिए महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, आचार्य नरेंद्र देव, मौलाना आजाद, सरोजिनी नायडू और जे.बी. कृपलानी की सोच और फैसले सबसे अहम हैं और इस सोच को बनाने में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह की भी बड़ी भूमिका थी.'
उन्होंने कहा, 'हम सम्मान और विनम्रता के साथ अपने सहयोगियों से चाहेंगे कि वे हमारे आजादी के दीवानों की समझ और फैसले का सम्मान करें. हम चाहेंगे कि वे हमारे साथ मिलकर इस खूबसूरत और ऐतिहासिक गीत का वही संस्करण गाएं जिसे उन नेताओं ने अपनाया था. उस संस्करण को सोच-समझकर चुना गया था ताकि इस गीत को सांप्रदायिक रंग न दिया जा सके, यह खतरा आज भी उतना ही असली है जितना उस समय था.'
केस वेणुगोपाल ने कहा, 'उस संस्करण को अपनाकर ही हम अपने गणतंत्र की धर्मनिरपेक्ष और सबको साथ लेकर चलने वाली पहचान को बनाए रख सकते हैं.'
क्या है वंदे मातरम् पर विवाद?
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को राष्ट्रीय सम्मान का विषय बताते हुए, केंद्र सरकार ने इस रचना के 150 साल पूरे होने पर केंद्र सरकार ने आधिकारिक कार्यक्रमों से जुड़े छह अंतरे गाने और इसके सम्मान के लिए दिशा निर्देश और दंडात्मक प्रावधानों से जुड़े कदम उठाए हैं.
इस पर कांग्रेस कार्य समिति ने साल 1937 के अपने ऐतिहासिक प्रस्ताव पर कायम रहते हुए पार्टी कार्यक्रमों में केवल दो अंतरे गाने का फैसला किया है. इसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस के इस कदम को देश की विरासत का अपमान और तुष्टीकरण की राजनीति करार दिया है. वहीं, बीजेपी ने इसे अनावश्यक राजनीतिक विवाद खड़े करने का आरोप लगाया है.






















