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Jammu Kashmir Blast: दो हज़ार वाले स्टिकी बम से दहला उधमपुर, रिमोट से होता है कंट्रोल बम, ढूंढना आसान काम नहीं

Jammu Kashmir Blast: जम्मू कश्मीर उधमपुर जिला दो बम धमाकों से दहल उठा है. दोनों बम धमाकों में स्टिकी बम का इस्तेमाल किया गया. इस आर्टिकल में जानिए स्टिकी बम क्या होता है और कब-कब इसका इस्तेमाल हुआ है.

Jammu Kashmir: जम्मू कश्मीर के उधमपुर जिले में पिछले आठ घंटे के अंदर दो बम विस्फोट (Udhampur Blast) ने सनसनी मचा कर रख दी है. पहले बुधवार देर रात एक बस में हुए धमाके से पूरे जिले में हड़कंप मच गया. इस धमाके में 2 लोग घायल हो गए. फिर गुरुवार सुबह 6 बजे इसी इलाके में एक और धमाका हुआ. ये दूसरा धमाका एक बस में ठीक उसी तरीके से हुआ जैसा बुधवार शाम उधमपुर के एक पेट्रोल पंप में खड़ी बस में हुआ था. इन बम धमाकों में स्टिकी बम का इस्तेमाल किया गया. चलिए अब आपको इस स्टिकी बम (Sticky Bomb) के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं.

क्या होता स्टिकी बम?

यह एक ऐसा बम होता है जिसे आसानी से कहीं भी चिपकाया जा सकता है. यही कारण है इसको स्टिकी बम कहा जाता है. इसी के साथ इसे मैग्नेटिक बम (Magnetic Bomb) भी कहा जाता है. इसे मेटल की सतह पर भी आसानी से चिपकाया जा सकता है. इसका ज्यादातर इस्तेमाल वाहनों पर लगाकर किया जाता है. आकार में छोटा होने के कारण इसे आसानी से कहीं भी लगाया जा सकता है.

स्टिकी बम में होता है टाइमर

स्टिकी बम में टाइमर सेट भी होता है और इसका कनेक्शन सीधे रिमोट से होता है. रिमोट की मदद से दूर रहते हुए धमाका किया जा सकता है. इसका इस्तेमाल ज्यादातर वाहनों की टंकियों पर किया जाता है. पेट्रोल या डीजल टैंक पर इसे लगाया जाता है, ताकि धमाका और भी ज्यादा बड़ा हो. आपको ये भी बता दें कि स्टिकी बम को ढूंढने का कोई भी आसान तरीका नहीं है. केवल अलर्ट रहकर और जांच करके ही इसे ढूंढा जा सकता है.

कहां बना और कब-कब हुआ इस्तेमाल?

स्टिकी बम को पहली बार 1940 में ब्रिटेन (Britain) में बनाया गया. आमतौर पर इसका वजन 1 किलो होता है और लम्बाई 9 इंच तक हो सकती है. इस बम का इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध में भी किया गया. इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल अफगानिस्तान (Afghanistan) और ईराक (Iraq) में हुआ. अफगानिस्तान ने तालिबान पर कब्जे से पहले कई बार स्टिकी बम का इस्तेमाल किया.

महज 2 हजार रुपये में तैयार होता है स्टिकी बम

इसके अलावा, अफगानिस्तान में नाटो सेनाओं के खिलाफ भी इस मैग्नेटिक बम का काफी प्रयोग किया गया. एक स्टिकी बम को तैयार करने में करीब 2 हजार रुपये का खर्च आता है, इसलिए यह आतंकियों के लिए सस्ता विकल्प है. इसके अलावा छोटा होने के कारण इसे कहीं भी ले जाना आसान होता है. आतंकी संगठन अलकायदा इस बम को बनाने में माहिर रहा है.

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