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नरेंद्र मोदी Vs राहुल गांधी: गुजरात चुनाव दोनों नेताओं की साख का सवाल है

तारीखों के एलान के साथ ही ये सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर ये चुनाव पीएम नरेंद्र मोदी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लिए क्या मायने रखते हैं और दोनों नेताओं की साख पर इसका क्या असर पड़ेगा.

नई दिल्ली/अहमदाबाद: लंबे इंतजार और आलोचनाओं के बाद केंद्रीय चुनाव आयोग ने गुजरात विधानसभा के चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है. दो चरणों में 09 दिसंबर और 14 दिसंबर को मतदान होंगे और नतीजे 18 दिसंबर को आएंगे. तारीखों के एलान के साथ ही ये सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर ये चुनाव पीएम नरेंद्र मोदी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लिए क्या मायने रखते हैं और दोनों नेताओं की साख पर इसका क्या असर पड़ेगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 

  • गुजरात पीएम नरेंद्र मोदी का गृह प्रदेश है. वो इस सूबे के 13 साल तक लोकप्रिय मुख्यमंत्री रहे. गुजरात के विकास मॉडल के सहारे ही वो देश की सत्ता के शिखर पर पहुंचे हैं. इसलिए यहां के चुनाव नतीजे सीधे तौर पर उनके सियासी कद का इम्तिहान है. प्रधानमंत्री बनने के बाद से लगातार जीत रहे मोदी के सामने ये सिलसिला बरकरार रखने की चुनौती है. अगर वो चुनाव जीतते हैं तो उनका और उनकी सरकार का इक़बाल बुलंद होगा. जनता में उनकी पैठ और गहरी होगी. उनके विकास के मॉडल पर मुहर लगेगी. हारते हैं तो उनकी राह मुश्किल होगी, क्योंकि सरकार नोटबंदी और जीएसटी को लेकर बैकफुट पर है.
  • ऐसे तीन अहम मुद्दे हैं जहां मोदी और बीजेपी को पास होना है. पहली बात ये कि इस चुनाव मोदी लहर का टेस्ट कहा जा रहा है. अब 2019 के चुनाव में डेढ़ साल से भी कम वक्त रह गया है. गुजरात बीजेपी का गढ है इसलिए ये इसे 2019 का सेमीफाइनल और मोदी लहर का टेस्ट माना जा रहा है. अब तक मोदी लहर बिहार छोड़कर हर राज्य में दिखा है. अगर गुजरात के नतीजे भी उनकी उम्मीदों के एन मुताबिक आते हैं तो मोदी के लिए इससे बड़ी खुशखबरी नहीं हो सकती.
  • दूसरा सवाल कि मोदी के बगैर गुजरात में बीजेपी की हैसियत क्या है. विधानसभा के बीते चार विधानसभा चुनाव में ये पहला चुनाव है, जो मोदी के नेतृत्व में नहीं लड़ा जा रहा है. अब सीएम की कुर्सी पर विजय रुपाणी हैं. मोदी ने अपने नेतृत्व में तीनों चुनाव में बीजेपी को जीत दिलाई और बड़ी जीत दिलाई. अगर मोदी बतौर पीएम गुजरात में फ्लॉप होते हैं ये कहा जाएगा कि उनके विकास का मॉडल नकली साबित हुआ है.
  • नोटबंदी और जीएसटी पर एक कारोबारी राज्य का फैसला क्या रहता है.नोटबंदी के बाद बीजेपी यूपी का चुनाव जीत चुकी है. लेकिन जीएसटी लागू किए जाने के बाद ये पहला विधानसभा चुनाव है. खासकर इसे लेकर व्यापारियों और कारोबारियों में खासी नाराज़गी पाई जाती है. दूसरी तरफ हाल के दिनों में नोटबंदी को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं. इसलिए इस चुनाव में बीजेपी हारती है तो ये कहा जाएगा कि ये हार नोटबंदी और जीएसटी की वजह से हुई है.

राहुल गांधी

  • राहुल गांधी के लिए ये बहुत बड़ा है जिससे वो साबित कर पाएंगे कि उनमें नेतृत्व क्षमता है. राहुल गांधी को पार्टी की कमान देने की चर्चा है.  ऐसे में अगर वो यहां कांग्रेस की जीत दर्ज करा देते हैं तो पार्टी में एक नयी उर्जा और उत्साह का संचार होगा. लगातार चुनाव हारने के कारण मायूस कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अपने नए नेतृत्व के प्रति भरोसा बढ़ेगा.
  • राहुल गांधी के लिए गुजरात जीतना इसलिए भी जरूर है क्योंकि पार्टी के अंदर से भी उनके नेतृत्व को लेकर आवाजें उठती रही हैं. गुजरात में मोदी की होम पिच पर उन्हें मात दे राहुल उन आवाजों को चुप करा सकते हैं. उनकी  लीडरशिप पर संदेह है वो चुप होंगे औऱ पार्टी के अंदर उनकी चुनाव हराने वाली छवि भी खत्म होगी.
  • राहुल के लिए ये चुनाव इसलिए भी एक मौका बताया रहा है क्योंकि वो एक ऐसे राज्य के चुनाव मैदान में जहां बीजेपी काफी दिनों से सत्ता में है और सरकार विरोधी लहरें भी मुखर हैं. पटेलों की नाराज़गी जगजाहिर है. अगर ऐसे मौके को राहुल गंवा देते हैं तो उनके नेतृत्व क्षमता पर गहरे सवाल खड़े हो जाएंगे. मुमकिन है कि कुछ ऐसी आवाज़ें सुनाई पड़े जो राहुल के लिए सहज नहीं हो.
  • गुजरात में अगर राहुल स्थानीय युवा नेताओं को अपने पाले में कर बीजेपी को मात देते हैं तो फिर उनपर दूसरे क्षेत्रीय पार्टियों और नेताओं का भी भरोसा बढ़ेगा. राहुल गांधी के नेतृत्व में एक नये गठजोड़ की संभावनाएं बनेगी जहां युवा नेतृत्व 2019 के लिए चुनौती के तौर पर खड़े होते दिखेगा.
 
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