बांग्लादेश में असुरक्षा के बीच दुर्गोत्सव? शेख हसीना ने जाहिर की चिंता
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों के बीच बढ़ती असुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है. उन्होंने शारदीय दुर्गोत्सव के मौके पर एक संदेश देश के नाम जारी किया है.

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश में धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों के बीच बढ़ती असुरक्षा पर चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा है कि 2024 से सत्ता से हटने के बाद से अल्पसंख्यक समुदायों, मंदिरों और घरों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं. हसीना ने शारदीय दुर्गोत्सव के मौके पर अपने मैसेज में यह बातें कहीं हैं. इस साल दुर्गा पूजा का आयोजन हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की असुरक्षा के बीच हो रहा है.
न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, हसीना ने कहा 'बड़े दुख-पीड़ा के साथ मुझे कहना पड़ रहा है, कि इस साल दुर्गोत्सव ऐसे समय आया है, जब बांग्लादेश के धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा की गहरी भावना व्याप्त है.'
उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2024 के बाद से पूरे देश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा, उत्पीड़न, हत्याओं, मूर्तियों की तोड़फोड़, मंदिरों और घरों पर हमलों, संपत्ति पर कब्जे, जबरन वसूली, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और डराने धमकाने की घटनाएं हो रही हैं. यह स्थिति न केवल देश के भीतर, बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी गंभीर चिंता का विषय बन गई है.
शेख हसीना का बयान- हिंदू पूजा स्थलों पर हमलों के बीच आया
हसीना का यह बयान हिंदू पूजा स्थलों पर हमलों, मूर्तियों और दुर्गा पूजा पंडालों में तोड़फोड़ की खबरों के बीच आया है. हसीना ने कहा है कि बांग्लादेश सांप्रदायिक सद्भाव की भूमि है. राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान ने एक ऐसे बांग्लादेश का सपना देखा था, जहां हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध और ईसाई सहित सभी धर्मों और समुदाय के लोग समान अधिकारों, सम्मान और असुरक्षा के साथ रह सकें.
'दोषियों के बचाने से कानून का शासन कमजोर हुआ'
हसीना ने कहा है कि पीड़ितों को न्याय दिलाने की बजाय दोषियों को बचाने से कानून का शासन कमजोर हुआ है. हिंसा करने वालों को बढ़ावा मिला है. नतीजतन, अल्पसंख्यक, राजनीतिक विरोधी और आम नागरिक भी डर-असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं. उन्होंने पूछा है कि यह कैसी शासन व्यवस्था है, जहां हत्या के आरोपी खुलेआम घुम रहे हैं.
जबकि एक धार्मिक नेता अपने समुदाय के अधिकारों और असुरक्षा के बारे में बात करने के कारण साल-दर-साल जेल में बंद है. उन्होंने आरोप लगाया कि जवाबदेही की कमी ने सरकारी संस्थानों में जनता के भरोसे को कमजोर किया है. अल्पसंख्यक समुदाय के बीच असुरक्षा की भावना को बढ़ाया है.
बांग्लादेश से की शेख हसीना ने ये अपील
उन्होंने अपील करते हुए कहा कि आइए हम एक ऐसा बांग्लादेश फिर से बनाएं, जहां किसी को भी उसकी धार्मिक पहचान के कारण वंचित न रहना पड़े. जहां मंदिरों में पहरे के बीच पूजा न करनी पड़े. जहां किसी मां को अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर चिंता न करनी पड़े. धार्मिक पहचान और जहां राज्य हर नागरिक को समान सम्मान और सुरक्षा प्रदान करेगा.






















