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हिमाचल में कांग्रेस को बहुमत, लेकिन कहीं बन न जाएं राजस्थान जैसे हालात...

हिमाचल प्रदेश चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने बीजेपी को पीछे छोड़ जीत हासिल की है, लेकिन इसके बाद भी पार्टी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. सूबे का सीएम चुना जाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है.

कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव जीत के साथ एक बड़ी लड़ाई जीत ली है, लेकिन उसके लिए यहां राहें अभी आसान नहीं हैं. राजस्थान जैसे हालात यहां पार्टी का इंतजार कर रहे हैं. कांग्रेस के कई नेता मुख्यमंत्री पद की दावेदारी में हैं. ऐसे में जीत के बाद सूबे की कमान संभालने के लिए मुख्यमंत्री चुनना मुश्किल साबित हो सकता है. बीजेपी से चुनावी जंग जीतने के बाद इस जंग का सामना पार्टी कैसे करेगी ये देखने वाली बात है. 

हिमाचल में जीत के बीच सीएम पर संशय बरकरार

हिमाचल में विधानसभा चुनावों में 68 में से कांग्रेस ने 40 सीटों पर जीत हासिल की है. बीजेपी के खाते में 25 सीटें आईं. वहीं अन्य को 3 सीट मिली हैं. आप यहां खाता नहीं खोल पाई है. जीत के बाद सूबे में कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है. लेकिन इस सरकार को चलाने वाले मुखिया यानी सीएम को लेकर अभी कुछ भी साफ नहीं है. हिमाचल में सीएम पद के लिए 5 नाम सामने आ रहे हैं. इसके साथ ही पांचों को लेकर अलग-अलग दावे भी हैं.

देखा जाए तो यहां सूबे के पूर्व सीएम रहे दिवंगत वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह का नाम सबसे पहले है. वे मंडी लोकसभा सीट से सांसद है. विधानसभा चुनाव इन्होंने नहीं लड़ा, लेकिन चुनाव प्रचार में खासी शिरकत की. देखा जाए तो सीएम पद के लिए वो दावा ठोक सकती हैं. हिमाचल में उनके पति का रुतबा निधन के बाद भी कायम है. यही वजह रही की पार्टी ने उनके इस रुतबे को चुनाव प्रचार के दौरान कैश कराया. प्रतिभा सिंह इस पद पर काबिज होने का दावा कर सकती हैं. 

मसला ये है कि सूबे में सीएम के लिए दूसरे नंबर जिस शख्स का नाम आ रहा है वो पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू हैं. वो इस चुनाव में प्रचार समिति के प्रमुख रहे. सुक्खू की पहचान सूबे में पूर्व सीएम रहे वीरभद्र से मतभेदों की वजह से भी है. अगर कांग्रेस उन्हें सीएम बनाने का फैसला लेती है तो प्रतिभा सिंह इसकी मुखालफत कर सकती हैं. सुक्खा हिमाचल प्रदेश की नादौन सीट से चुनाव लड़े. यहां से वो बीजेपी के विजय अग्निहोत्री को हराकर चौथी बार विधायक बन गए हैं. 

सीएम पद की दावेदारी के लिए तीसरे नंबर नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री का नाम आ रहा है. प्रतिभा सिंह के नजदीकी माने जाने वाले अग्निहोत्री सूबे पूर्व सीएम दिवंगत राजा वीरभद्र सिंह सरकार में मंत्री रहे थे. प्रतिभा सिंह पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष हैं और वो पार्टी आलाकमान को मुकेश अग्निहोत्री से सीएम पद देने के लिए कह सकती हैं. गौरतलब है कि इन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने दिवंगत वीरभद्र सिंह की पत्नी मंडी सांसद प्रतिभा सिंह को जीत के लिए अपना चेहरा बनाया था.

विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों को  टिकट देने में भी उनकी राय को अहमियत दी गई थी. ऐसे में थोड़ा मुश्किल लगता है कि पार्टी आलाकमान उनकी बात से इनकार करेगा. 4 बार के विधायक अग्निहोत्री ऊना जिले की हरोली सीट पर इस बार बीजेपी के प्रोफेसर रामकुमार को हराकर चुनाव जीत गए हैं. लेकिन यहां उनकी जाति उनकी राह में आड़े आती है वो ब्राहम्ण हैं. और ये हिमाचल का इतिहास रहा है कि राजपूत जाति राज्य में सबसे बड़ा जाति समूह होने के नाते 1948 में इस सूबे के अस्तित्व में आने के बाद से लगातार शासन में रहा है. यहां सूबे के पूर्व सीएम शांताकुमार ब्राहम्ण जाति से अकेले सीएम रहे. इन्हें यहां दो बार सीएम बनने का मौका मिला.  वो पहली बार 1977 से लेकर 1980 और दूसरी बार 1990 से लेकर 1992 में सूबे के सीएम रहे थे. 

हिमाचल कांग्रेस के कद्दावर नेता ठाकुर कौल सिंह का नाम भी सूबे के सीएम पद की रेस में शामिल हैं. कौल मंडी जिले की दरांग सीट से 8 बार विधायक बन चुके हैं. सूबे के पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह की मौत के बाद उन्होंने प्रतिभा सिंह को खासा समर्थन दिया था. बीता चुनाव  हारने के बाद इस बार भी कौल सिंह दारंग से कांग्रेस के उम्मीदवार रहे, लेकिन इस सीट पर वो बीजेपी के पूरण चंद ठाकुर से 618 वोटों से हार गए हैं. उनकी पार्टी और पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के प्रति वफादारी को देखकर वो सीएम बन सकते हैं, लेकिन उनकी बढ़ती उम्र उनकी इस राह में बाधा बन सकती है.

सूबे के 5वें सीएम के तौर पर चंबा जिले की डलहौजी सीट से 6 बार की कांग्रेसी विधायक आशा कुमारी का नाम है. वह पंजाब में पार्टी प्रभारी का पद संभाल चुकी हैं. हालांकि वो इस बार के विधानसभा चुनावों में डलहौजी सीट पर आशा कुमारी बीजेपी उम्मीदवार डी. एस. ठाकुर से हार गई हैं. इसके बावजूद सीएम पद के लिए उनका दावा तगड़ा माना जा रहा है. उनके मजबूत दावेदारी के पीछे उनका छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री टी.एस. सिंह देव की बहन होना भी है.

कांग्रेस ने हर बार छत्तीसगढ़ में ढाई–ढाई साल का समझौता तो किया, लेकिन टीएस सिंह सीएम की कुर्सी नहीं पा सके. उनके इस नुकसान की भरपाई कांग्रेस उनकी बहन को हिमाचल में सीएम बनाकर कर सकती है. हालांकि दो और नामों का भी जिक्र हैं, लेकिन उनकी स्थिति साफ नहीं है. 

राजस्थान की कलह अभी भी सिरदर्द

हाल ही में राजस्थान कांग्रेस के नए प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने एक इंटरव्यू में कहा है कि कांग्रेस के लिए पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले जैसे हालात थे वैसे ही हालात राजस्थान में बने हुए हैं. गौरतलब है कि पंजाब विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था. उधर दूसरी तरफ 2023 में राजस्थान विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. इस सूबे में कांग्रेस सीएम अशोक कुमार गहलोत और सचिन पायलट के दो गुटों में बंटी है. कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनावों के दौरान ये गुटबाजी खासे हंगामे की वजह रही थी. अब जब राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के हिमाचल के चुनाव पर्यवेक्षक होने के बाद वहां पार्टी की जीत हुई. ऐसे में पायलट की अहमियत और बढ़ी है. इसके साथ ही माना जाता है कि वो प्रियंका गांधी के पसंदीदा हैं. 

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