बिहार: शराबंदी से टीबी के इलाज में आई मुश्किल, केंद्र सरकार ने राज्य को लिखी चिट्ठी
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बिहार में पिछले साल शराब को प्रतिबंधित किये जाने के बाद से टीबी से जुड़े जांच का काम मुश्किल हो गया है. इसका संज्ञान लेते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बिना रुकावट सेवा को जारी रखने के लिए अल्कोहल की खरीद और इस्तेमाल पर विशेष छूट देने की मांग करते हुए बिहार के स्वास्थ्य विभाग को लिखा है.

नई दिल्ली: बिहार में शराबबंदी के कई सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं लेकिन इससे राज्य में टीबी (तपेदिक) की जांच में अड़चन आ रही है.
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बिहार में पिछले साल शराब को प्रतिबंधित किये जाने के बाद से टीबी से जुड़े जांच का काम मुश्किल हो गया है. इसका संज्ञान लेते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बिना रुकावट सेवा को जारी रखने के लिए अल्कोहल की खरीद और इस्तेमाल पर विशेष छूट देने की मांग करते हुए बिहार के स्वास्थ्य विभाग को लिखा है.
मंत्रालय में स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक जगदीश प्रसाद के मुताबिक इस तरह की जांच में इस्तेमाल होने वाले एथिल अल्कोहल की किल्लत हो गयी है. यहां तक कि सरकारी संस्थाओं में भी इसकी किल्लत है.
बिहार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को लिखे अपने पत्र में प्रसाद ने कहा कि टीबी को सफल तरीके से ठीक करने के लिए समय पर रोग का पता लगना और उसका उचित उपचार आवश्यक होता है. इसकी क्लिनिकल जांच प्राथमिक तौर पर ‘स्मीयर माइक्रास्कोपी’ के जरिये कई स्तरों पर होती है.
स्मीयर माइक्रोस्कोपी के लिए आवश्यक अभिकर्मकों जिल नीलसन और फ्लूरिसकेंट स्टेनिंग दोनों में शुद्ध अल्कोहल होता है. इस पूरी प्रक्रिया में शराब की और भी कई तरह की आवश्यकता पड़ती हैं.
Source: IOCL























