Assam Election Results 2026: असम में कैसे सिमट गया छोटी पार्टियों का जनाधार, अब सिर्फ 'बड़े चेहरे' बनाएंगे सरकार
Assam Election Results 2026: असम की राजनीति में कभी क्षेत्रीय पार्टियां ‘किंगमेकर’ मानी जाती थीं. लेकिन 2026 में ये पार्टी महज कुछ सीटों पर सिमट कर रह गईं. कई पार्टियों का तो खाता भी नहीं खुला.

असम विधानसभा चुनाव 2026 में सत्तारूढ़ एनडीए ने दो-तिहाई बहुमत के साथ जबरदस्त जीत हासिल की है. एनडीए को 126 विधानसभा सीटों में से 102 पर जीत मिली है और वह लगातार तीसरी बार राज्य में सरकार बनाने जा रही है. जबकि विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने 19 सीटें जीती हैं और बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाली AIUDF तथा अखिल गोगोई के नेतृत्व वाले Raijor Dal ने दो-दो सीट हासिल कीं.
विधानसभा चुनाव के नतीजे यह साफ कर रहे हैं कि अब क्षेत्रीय और छोटी पार्टियों के लिए जगह लगभग खत्म हो गई है. एजीपी को छोड़कर लगभग सभी क्षेत्रीय दल हाशिये पर चले गए हैं.
पहले जानते हैं कि असम विधानसभा चुनाव 2026 में किस पार्टी को कितनी सीटें मिली हैं
- बीजेपी: 82
- कांग्रेस 19
- बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ): 10
- असम गण परिषद (एजीपी): 10
- ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट 2
- राजौर दल : 2
असम में किसका किसके साथ गठबंधन
बीजेपी ने असम में बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट और असम गण परिषद (AGP) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा. एनडीए को कुल 102 सीटों पर जीत मिली. इसमें से बीजेपी को 82 सीटों पर जीत हासिल हुई, जबकि बीपीएफ और एजीपी को 10-10 सीटें मिलीं.
वहीं, कांग्रेस का असम में छह दलों के साथ गठबंधन रहा जिसमें कांग्रेस को 19 सीटों पर जीत मिली है और और रायजोर दल को दो सीटें जीत पाई.
असम में क्षेत्रिय दलों की स्थिति
AIUDF (ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट)-
बदरुद्दीन अजमल की पार्टी All India United Democratic Front, जो कभी असम के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में ‘किंगमेकर’ हुआ करती थी, इस बार सिर्फ दो सीटें जीत पाई है. धुबरी और दक्षिण सालमारा जैसे क्षेत्रों में भी वोटरों ने अजमल के बजाय कांग्रेस को प्राथमिकता दी.
2026 के इस विधानसभा चुनाव में अजमल की पार्टी के कई मजबूत उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए.
इससे पहले के चुनाव में पार्टी की स्थिति मजबूत थी. 2011 के विधानसभा चुनाव में AIUDF को 18 सीटें, 2016 में 13 सीटें और 2021 में 16 सीटें जीती थीं.
AGP (असम गण परिषद)-
असम की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी असम गण परिषद को विधानसभा चुनाव में 10 सीटों पर जीत मिली है. इस पार्टी का बीजेपी के साथ गठबंधन है. 2021 में एजीपी ने इसने 9 सीटें जीती थीं.
बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF)
बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट को 2011 में यूपीए के साथ गठबंधन में 12 सीटों पर जीत मिली थी. 2016 में भी उसे 12 सीटें मिली थीं. 2021 में पार्टी ने 12 सीटों पर चुनाव लड़ा और 4 सीटों पर जीत दर्ज की थी. 2026 के चुनाव में पार्टी ने वापसी करते हुए एनडीए के साथ गठबंधन में 10 सीटें जीतीं हैं.
रायजोर दल (Raijor Dal)
2026 में पार्टी ने कांग्रेस गठबंधन (महाजोट) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा है और दो सीटों पर जीत दर्ज कर पाई है. एक सीट पार्टी के प्रमुख अखिल गोगोई की है जिन्हें शिवसागर विधानसभा सीट बचाने में कामयाब रहे हैं. वही, दूसरी सीट ढिंग (Dhing) है जहां से महबूब मुख्तार भी जीत गए हैं.
2021 में इसने 19 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाई थी. फिलहाल पार्टी इस चुनाव में फायदा मिला है.
यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL)
यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल 2026 के विधानसभा चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल पाई. पार्टी के मुखिया प्रमोद बरो भी इस बार अपनी सीट नहीं बचा पाए. 2021 में इस पार्टी ने 12 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 6 पर जीत हासिल की थी.
गठबंधन पर निर्भर हैं क्षेत्रीय पार्टियां
इस विधानसभा चुनाव के आंकड़े ये भी बता रहे हैं कि असम में लोगों ने तीसरे विकल्प को पूरी तरह नकार दिया है. राजनीतिक विश्लेषक ब्रजेन डेका का कहना है कि 'क्षेत्रीय ताकतें, एजीपी हो या रायजोर दल जैसी विपक्षी पार्टियां, वे प्रभावी रूप से हाशिए पर चली गई हैं. लोगों ने बीजेपी को ही समुदाय के भविष्य को सुरक्षित करने वाली पार्टी के रूप में स्वीकार कर लिया है. ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) जिसे ‘मिया’ समुदाय का रक्षक माना जा रहा था, उसे भी समुदाय ने नकार दिया है क्योंकि पार्टी इस बार केवल दो सीट ही जीत पाई. '
ये कहना गलत नहीं हो कि असम की सभी क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियां अब मुख्य दलों पर पूरी तरह निर्भर हो गई हैं. इन पार्टियों का अब अपना जनाधार नहीं रहा. इतना ही नहीं, अखिल गोगोई और प्रमोद बेरो जैसे क्षेत्रीय नेताओं का प्रभाव अब उनकी व्यक्तिगत सीटों तक सीमित होता दिख रहा है.























