UIDAI के CEO ने आधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दिया पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच यूआईडीएआई के सीईओ को सुनने के लिए उत्सुक नज़र आ रही थी. सबसे पहले उन्होंने फोटो पहचान पत्र का इतिहास बताना शुरू किया.

नई दिल्ली: आधार कार्ड योजना का बचाव करने के लिए आज यूआईडीएआई के सीईओ अजय भूषण पांडे खुद सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए. आधार योजना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही संविधान पीठ को उन्होंने आधार के तकनीकी पहलू समझाए.
लगभग डेढ़ घंटे तक चले पावर प्वाइंट प्रेज़ेंटेशन के ज़रिए सीईओ ने ये दावा किया कि आधार कार्ड धारकों की जानकारी पूरी तरह सुरक्षित है. उसके लीक होने का कोई खतरा नहीं है. दरअसल, बुधवार को एटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कोर्ट से दरख्वास्त की थी कि वो आधार सीईओ को पेश होने की इजाज़त दे. आज कोर्ट ने इसे मान लिया.
सबसे पहले विशिष्ट पहचान की ज़रूरत बताई
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच यूआईडीएआई के सीईओ को सुनने के लिए उत्सुक नज़र आ रही थी. सबसे पहले उन्होंने फोटो पहचान पत्र का इतिहास बताना शुरू किया.
1984 बैच के आईएएस अधिकारी पांडे ने कहा कि पहले देश में फोटो पहचान पत्र का चलन नहीं था. 1992-93 में मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन ने वोटर आईडी कार्ड शुरू किया. लेकिन कई लोग एक से ज़्यादा मतदाता पहचान पत्र बनवा लेते थे. 2006 में ऐसे पहचान पत्र का सोचा गया जो किसी व्यक्ति के पास एक ही हो. जिससे उसकी पहचान से कोई मना न कर सके. 2010 में पहला आधार कार्ड जारी हुआ.
आधार पूरी तरह सुरक्षित
पांडे ने कोर्ट को बताया कि आधार में मिलने वाला 12 अंकों का नंबर विशिष्ट है. किसी एक ही व्यक्ति का वो नंबर हो सकता है. नंबर रैंडम है, यानी इसके जरिए व्यक्ति का नाम, शहर, राज्य कुछ भी जाना नहीं जा सकता.
सीईओ ने कहा कि आधार के लिए बायोमेट्रिक लेते ही वो एन्क्रिप्टेड हो जाता है. इसे खोलना 2048 अंकों वाला लॉक खोलने जैसा है. सबसे बेहतर सुपर कंप्यूटर ऐसी कोशिश करे, तो वो ब्रहांड खत्म हो जाने तक भी उसे खोल नहीं सकता. उन्होंने कहा कि बैंक या कोई और संस्था अगर किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि चाहते हैं तो बायोमेट्रिक के ज़रिए इसकी पुष्टि कर दी जाती है. लेकिन उनसे बायोमेट्रिक शेयर नहीं किया जाता. वो हमेशा यूआईडीएआई के सर्वर में सुरक्षित रहता है. उसे कोई हासिल नहीं कर सकता.
आधार कार्ड धारक की इजाज़त के बिना उसकी जानकारी कभी किसी को नहीं दी जाने का कानूनी प्रावधान है. सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले में ही जांच एजेंसियों को इसकी जानकारी दी जा सकती है. अभी तक 10 उंगलियों, आंख की 2 पुतलियों और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए पासवर्ड (OTP) से पहचान होती है. 1 जुलाई से चेहरे की रीडिंग के ज़रिए भी पहचान शुरू की जाएगी.
हर नागरिक का आधार कार्ड
पांडे ने कहा कि आधार हर नागरिक का बनता है. उसके पास पहले से कोई आईडी न हो तो ग्राम पंचायत या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की पुष्टि पर आधार कार्ड बना दिया जाता है. यहां तक कि बेघर लोगों को भी आधार कार्ड दिया जाता है. अगर कोई नेत्रहीन या कुष्ठ रोगी हो, जिसका बायोमेट्रिक लेना संभव न हो, तब भी फोटो और गांव/परिवार जैसी जानकारी के आधार पर उसे विशिष्ट पहचान दी जाती है.
जिनके पास आधार नहीं है वो यूआईडीएआई के कॉल सेंटर नंबर 1947 पर कॉल कर के आधार केंद्र की जानकारी ले सकते हैं. वो देश में किसी भी केंद्र पर आधार बनवा सकते हैं. अपने स्थायी निवास में ही आधार बनवाना ज़रूरी नहीं.
नवजात बच्चों का भी आधार बनाया जा रहा है. उनका बायोमेट्रिक नहीं लिया जाता. घर वाले जिस नाम से पुकारते हैं, उसी नाम से कार्ड बना दिया जाता है. 5 साल की उम्र होने पर बायोमेट्रिक्स लिए जाते हैं
बैंक और पोस्ट ऑफिस में भी बनेंगे आधार
जल्द ही सरकारी बैंक के 14,000 ब्रांच और 13,000 पोस्ट ऑफिस आधार बनवाने या उसमें बदलाव के केंद्र बन जाएंगे. सीईओ ने बताया कि एक समय रोज़ 20 लाख आधार कार्ड आवेदन हो रहे थे. अब तक 120 करोड़ आधार कार्ड बन गए हैं. अब रोजाना आधार कार्ड आवेदन घटकर 2 लाख हो गए हैं. अब आधार में दर्ज ब्यौरे में बदलाव के लिए रोज़ 3-4 लाख आवेदन आते हैं. अनुमान है कि हर साल ऐसे 25 करोड़ तक आवेदन आ सकते हैं.
पहचान की पुष्टि में दिक्कत की बात मानी
यूआईडीएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने माना कि कई बार किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि नहीं हो पाती. मशीन की खराबी या नेटवर्क की कमज़ोर ऐसा होता है. इसलिए, पहचान की पुष्टि न होने के चलते किसी को राशन जैसी ज़रूरी सेवा से वंचित नहीं करना चाहिए. प्रेजेंटेशन कल भी जारी रहेगा.
Source: IOCL























