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सिंगापुर के बाद दूसरे देशों के साथ क्रॉस बॉर्डर डिजिटल लेन-देन पर हो भारत का ज़ोर, अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई ताकत

अलग-अलग देशों के साथ UPI की साझेदारी बढ़ रही है.सिंगापुर पहला देश है, जिसके साथ पर्सन टू पर्सन पेमेंट सुविधा है. अब दूसरे देशों के साथ भी इस सुविधा को शुरू करने पर भारत का ज़ोर रहना चाहिए.

भारत में जल्द ही डिजिटल-वॉलेट ट्रांजेक्शन, नकद लेन-देन से ज्यादा हो जाएंगे. आज UPI भारत में सबसे पसंदीदा पेमेंट मैकेनिज्म बन गया है. कारोबारी और उपभोक्ता दोनों ही इसे ज्यादा से ज्यादा वह अपना रहे हैं. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये जानकारी दी है.

भारत और सिंगापुर के बीच 'यूपीआई-पेनाउ लिंकेज' के संयुक्त वर्चुअल लॉन्च के मौके पर 21 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि यूपीआई देश में भुगतान करने का सबसे अधिक अपनाया जाने वाला माध्यम बन जाएगा.

पिछले वर्ष यानि 2022 में, UPI से करीब 126 लाख करोड़ रुपये यानि लगभग 2 ट्रिलियन सिंगापुर डॉलर से अधिक मूल्य के लेन-देन हुए हैं. यूपीआई के जरिए लेन-देन की संख्या की बात की जाए, तो ये आंकड़ा 7400 करोड़ से भी ज्यादा है. इन आंकड़ों से जाहिर है कि स्वेदशी रूप से विकसित भारत का यूपीआई सिस्टम बड़ी संख्या में लेन-देन को मुमकिन बनाने में पूरी तरह से सक्षम और सुरक्षित है.

रेमिटेंस के लिहाज बहुत बड़ा कदम

जब भारत और सिंगापुर के बीच यूपीआई-पेनॉउ लिंकेज की शुरुआत हो रही थी, तब उस वर्चुअल कार्यक्रम में सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सिएन लूंग के साथ ही आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास और सिंगापुर के मौद्रिक प्राधिकरण के प्रबंध निदेशक रवि मेनन भी मौजूद थे. क्रॉस बॉर्डर लेन-देन को आसान बनाने के लिहाज से दोनों देशों के बीच यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहल है. भारत ने 2016 में यूनाइटेड पेमेंट इंटरफेस सुविधा की शुरुआत की थी. इसके बाद डिजिटल पेमेंट की जो तस्वीर है भारत में उससे क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला है. बड़े शहरों में ही नहीं बल्कि छोटे शहरों में भी यूपीआई के जरिए तेजी से लेन-देन हो रहे हैं. वैल्यू और वॉल्यूम दोनों ही के टर्म में इजाफा हो रहा है.

अब यूपीआई डिजिटल पेमेंट्स के लिए बहुत ही स्वीकार्य माध्यम हो गया है और कोई भी व्यक्ति अपने बैंक अकाउंट को यूपीआई से लिंक करके डिजिटल पेमेंट कर सकता है. अब उसी चीज का दायरा बढ़ाते हुए क्रॉस बॉर्डर ट्रांजेक्शन्स में भी यूपीआई के इस्तेमाल के लिए सिंगापुर के साथ ये एक प्रयोग के तौर पर है. सिंगापुर में भी एक रियल टाइम पेमेंट इंटरफेस 'पेनॉउ' (PayNow) है. उनके साथ यूपीआई को जोड़ा गया है, ताकि यहां से जो हमारे बैंक अकाउंट से लिंक्ड है और वहां से अगर हम ट्रांसफर कर रहे हैं और जिनके पास पेय नाऊ से बैंक अकाउंट लिंक्ड है, उनको तुरंत राशि ट्रांसफर हो जाएगी. ये बहुत ही रेमिटेंस के लिहाज से ये बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है.  जो भारतीय सिंगापुर में काम कर रहे हैं और वे अगर कुछ पैसा यहां भेजना चाहते हैं तो उनके लिए ये अब बहुत आसान हो गया. इससे अब वे रियल टाइम में पैसे ट्रांसफर कर सकेंगे. इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को भी मदद मिलेगी.

अर्थव्यवस्था में बढ़ेगी पारदर्शिता

राधिका पांडेय का कहना है कि भारत को उस तरह का का पहल और देशों के साथ भी साथ करना चाहिए. खासकर के संयुक्त अरब अमीरात और अफ्रीकी देशों के साथ जहां बड़ी संख्या में हमारे देश के लोग काम करते हैं. जहां से भारत को ज्यादा से ज्यादा रेमिटेंस हासिल होते हैं. अगर आप देखें तो भारत सरकार के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इकोनॉमिक ग्रोथ के नजरिए बहुत महत्वपूर्ण एजेंडा रहा है. अभी इस दिशा में जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, वो डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए उठाया जा रहा है. देश के अंदर ही देखें तो किसानों को भुगतान डिजिटल माध्यम से ही किया जा रहा है. इसके कई फायदे हैं जैसे कि इससे हमारी अर्थव्यवस्था की क्षमता बढ़ती है. बिचौलियों के पास जिस तरीके से एक बड़ी राशि चली जाती थी, उस पर काफी हद तक अंकुश लग गया है. इससे बड़ी मात्रा में राशि की बचट भी हो रही है. फॉर्मल या औपचारिक अर्थव्यवस्था में तेजी से लेन-देन का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है. जब भी हम पब्लिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करते हैं तो इससे अर्थव्यवस्था को औपचारिक या संगठनात्मक बनाने में मदद मिलती है. इस साल के आर्थिक सर्वेक्षण पर नज़र डाले तो उसमें सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा है कि अगर हम जीडीपी में 6 प्रतिशत वद्धि का अनुमान लेकर चलते हैं, तो डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की वजह से अगले साल उसमें 20-30 बेसिस प्वाइंट का इजाफा हो जाएगा. हम अगर कल्याणकारी योजनाओं में डिजिटल लेन-देन के जरिए भुगतान करते हैं और क्रॉस बॉर्डर ट्रांजेक्शन्स में भी इसे अपनाते हैं, तो जीडीपी वृद्धि दर 6 से बढ़कर 6.5% तक हो सकता है.

डिजिटल लेन-देन को और सुरक्षित बनाने पर ज़ोर

लोगों के लेने-देन की आदतों में बदलाव होने में थोड़ा समय लगता है. पुराने जमाने के जो लोग हैं वो अभी भी कैश को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं. अगर हम 2016 से अभी तक का डाटा देखें यूपीआई के प्रति लोगों की स्वीकार्यता और उपयोगिता बढ़ती जा रही है. हम देख पा रहे हैं कि अब तो छोटे-छोटे लेन-देन भी यूपीआई के माध्यम से हो पा रहा है. धीरे-धीरे इसमें तेजी आ रही है. फिर भी कुछ फ्रॉड के केस हुए हैं जो तकनीकी खामियों और लोगों की नासमझी के कारण भी हुआ है. इस लिहाज से डिजिटल लेन-देन को और सुरक्षित बनाने पर काम किए जाने की जरूरत है.

2018 में पीएम मोदी ने की थी पहल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सिएन लूंग के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से यूपीआई और सिंगापुर के पेय नाऊ के बीच क्रॉस बॉर्डर कनेक्टिविटी को लॉन्च किया. इससे पूर्व इस सुविधा को आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास और मोनेटरी अथॉरिटी ऑफ सिंगापुर के कार्यकारी निदेशक रवि मेनन ने यूपीआई-पेनॉउ के बीच टोकन ट्रांजेक्शन के जरिये इसकी शुरुआत की थी. इस मौके पर सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सिएन लूंग ने कहा था कि  कि पेनॉउ और यूपीआई को जोड़ने का आइडिया पीएम मोदी ने साल 2018 में अपने सिंगापुर के दौरे के दौरान दी थी. उसके बाद से ही दोनों देशों के केंद्रीय बैंकों ने इसे वास्तविक रूप देने पर काम करना शुरू कर दिया था. सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने कहा था कि पिछले साल सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित भारत सिंगापुर के मिनिस्ट्रियल राउंड टेबल के उद्घाटन सत्र में भी डिजिटल कनेक्टिविटी एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय रहा था. उन्होंने  यूपीआई-पेनॉउ लिंकेज के वास्तविकता का रूप धारण करने पर खुशी भी जाहिर की. बता दें कि भारत और सिंगापुर के बीच सालाना क्रॉस बॉर्डर रिटेल भुगतान और रेमिटेंसेस 1 बिलियन डॉलर से अधिक का है.

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