Tu Ya Main Review: खराब फर्स्ट हाफ, लॉजिक को थोड़ा सा ठेंगा दिखाता सेकेंड हाफ, निराश करती फिल्म में चमके आदर्श और शनाया
फिल्म कहीं कहीं ठीक ठाक लगती हैं. एक्टर्स पूरी कोशिश करते हैं लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और ट्रीटमेंट के आगे वो कुछ नहीं कर पाते. पढ़ें पूरा रिव्यू.
Bejoy Nambiar
Shanaya Kapoor,Adarsh Gourav,Parul Gulati
इस फिल्म का स्क्रीनप्ले थाई फिल्म THE POOL से अडॉप्ट किया गया है. मतलब सीथे सीधे रीमेक कहने की बजाय बात को अंग्रेजी में लपेटकर स्क्रीन पर लिखा गया है लेकिन ये पब्लिक है सब जानती है. इसकी ओरिजनल फिल्म हिंदी में यू ट्यूब पर अवेलेबल है और वो भी कोई इतनी बवाल फिल्म नहीं है. वो 1 घंटा 40 मिनट की है लेकिन ये 2, घंटे 25 मिनट तक आपके सब्र का इम्तिहान लेती है. वो भी 20 फीट के बिना पानी से स्विमिंंग पूल में लेटाकर. अच्छी एक्टिंग के बावजूद फिल्म का कमजोर ट्रीटमेंट निराश करता है.
कहानी
ये कहानी है दो इंफ्लूएंसर्स की, जिनमें से एक मिस वैनिटी के 2 मिलियन फॉलोअर्स हैं तो लड़के के 10 हजार. दोनों कैलेब करते हैं, फिर इश्क होता है और फिर एक स्विमिंग पूल में फंस जाते हैं, जहां एक मगरमच्छ आ जाता है. ये कहानी आप पहले से ट्रेलर में देख चुके हैं. अब ये बचेंगे कैसे ये आप थिएटर जाकर देख लीजिएगा अगर आप खुद एंड तक बच गए तो.
कैसी है फिल्म
इस फिल्म के फर्स्ट हाफ को देखकर ऐसा लगा जैसे फिल्म से जुड़ा हर शख्स गाना बनाने की प्रेक्टिस कर रहा था और सबने गाने बनाए और इस फिल्म में जहां मन किया वहां डाल दिए. दोनों के बीच की केमिस्ट्री कैसे डेवलप होती है. एक बड़ी इंफ्लूएंसर को एक छपरी लड़का कैसे पंसद आ जाता है. ये ठीक से समझ आता ही नहीं, पहले हाफ में हर थोड़ी देर में एक गाना आता है, और आप इरिटेट होते हैं. फिर सेकेंड हाफ में असली कहानी शुरू होती है, लेकिन ये भी आपको ना डरा पाती है. ना बांध पाती है. बस ठीक ठाक है, कहीं कहीं चीजें लॉजिक से काफी दूर लगती हैं. कुल मिलाकर ये फिल्म एक बहुत ही एवरेज फिल्म है. जिसे सिर्फ इसके सेकेंड हाफ और आदर्श गौरव की शानदार परफॉमेंस के लिए देखा जा सकता है.
एक्टिंग
आर्दश गौरव ने कमाल का काम किया है, उन्होंने पूरी कोशिश की है फिल्म को अपने कंधों पर लेकर चलने की. वो मुंबई के लोकल रैपर के किरदार में खूब जमे हैं. लुक से लेकर बोली सब कमाल है और उन्हें देखकर लगता है कि वो वाकई सिनेमा में लंबी रेस के घोड़े हैं, शनाया ने अच्छा काम किया है, उनकी तारीफ करनी होगी कि वो अलग फिल्में कर रही हैं. एक नेपो किड को वैसे भी जबरदस्ती ट्रोल किया जाता है लेकिन यहां शनाया अपना काम अच्छे से करती हैं. किरदार में वो सूट हो रही हैं. स्विम सूट पहना है लेकिन भद्दा स्क्रिन शो नहीं करती है. आदर्श और शनाया ने पूरी कोशिश की है इस कमजोर में फिल्म में जान डालने की, पारुल गुलाटी का भी फिल्म में छोटा सा रोल है. वो उन्होंने क्यों किया, ये समझ नहीं आता. ना ये रोल उनके लायक था ना वो इसमें जमी हैं.
राइटिंग और डायरेक्शन
हिमांशु शर्मा ने कहानी लिखी है. बिजॉय नांबियार ने फिल्म डायरेक्ट की है. कहानी में बेवजह खींच दिया गया है, फिल्म को आराम से दो घंटे में निपटाया जा सकता था. सेकेंड हाफ में ही फिल्म शुरू होती है. डायरेक्शन के लिहाज से कुछ सीन अच्छे हैं तो कुछ काफी एवरेज, लोकेशन जरूर फिल्म की बढ़िया लगती है.
कुल मिलाकर कुछ करने को ना हो तो देख लीजिएगा.
रेटिंग- 2 स्टार्स





























