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स्पेस ट्रैवल से बदल सकते हैं जेनेटिक गुण!

वाशिंगटन: अंतरिक्ष की यात्रा करना हर अंतरिक्ष वैज्ञानिक का सपना होता है लेकिन हाल ही में हुए एक नए शोध में खुलासा हुआ है कि स्पेस में ट्रैवल करने से जेनेटिक गुण और अन्य बायलॉजिकल स्ट्रक्चर बदल सकते हैं. कैसे की गई रिसर्च- वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में लगभग एक साल तक वक्त बिताने वाले स्कॉट केली और उनके जुड़वा भाई मार्क पर रिसर्च की. इसके लिए वैज्ञानिकों ने केली के अंतरिक्ष में जाने से पहले, मिशन के दौरान और वहां से लौटने के बाद उनके कुछ सैंपल लिए और जांच में उन्हें उनकी जेनेटिक प्रॉपर्टीज में बदलाव दिखाई दिए. इन्हीं भाईयों को क्यों चुना गया- स्कॉट 2015 से 2016 के बीच अंतरिक्ष में 340 दिन रहे थे. वहीं, उनके भाई मार्क 2001 से 2011 के बीच चार अंतरिक्ष अभियानों के लिए 54 दिन अंतरिक्ष में रह चुके हैं. चूंकि दोनों भाइयों के जीन समान हैं और उनका लाइफ स्टाइल भी एक जैसा ही है, इसलिए नासा ने अंतरिक्ष में लंबा समय गुजारने वालों के जेनेटिक गुण और अन्य बायलॉजिकल स्ट्रक्चर में बदलाव का पता लगाने के लिए इन भाइयों को चुना गया. रिसर्च के नतीजे- नासा ने इनके ब्लड सैंपल और अन्य बायलॉजिकल सैंपल लिए. सैंपल्स की स्टडी में वैज्ञानिकों ने पाया कि अंतरिक्ष यात्रा के दौरान स्कॉट के गुणसूत्र के छोर में स्थित टेलोमियर्स मार्क के टेलोमियर्स की तुलना में ज्यादा बढ़ गए हैं. टेलोमियर्स प्रत्येक गुणसूत्र के अंत में मौजूद कैपनुमा वह संरचना है जो गुणसूत्र को नष्ट होने से बचाने के साथ ही इसे दूसरे गुणसूत्र से उलझने से बचाती है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट- कोलोराडो स्टेट यूनिर्वसिटी के विकिरण जीवविज्ञानी सुसन बेइले ने इस बदलाव को देखने के बाद कहा कि जो हमने सोचा था, यह उससे ठीक उलटा है. वैज्ञानिकों ने पाया कि स्कॉट के धरती पर वापस लौटने के बाद ये टेलोमियर अपने वास्तविक आकार में लौट आए हैं. वैज्ञानिक इस परिवर्तन का अर्थ पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं और साथ ही 10 अलग अंतरिक्ष यात्रियों के टेलोमियर की लंबाई का अध्ययन कर रहे हैं. इस पूरे काम में एक साल का समय लग जाएगा जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि अंतरिक्ष की यात्रा किस प्रकार से अंतरिक्ष यात्रियों के आनुवांशिक गुणों को बदल देती है.
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Source: IOCL























