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Cough Syrup New Rules: दवा कंपनियों पर कसा शिकंजा, सरकार ने खत्म की कफ सिरप को मिलने वाली दशकों पुरानी छूट

Drugs Rules: केंद्र सरकार ने कफ सिरप और लिक्विड दवाओं को Schedule K से हटाकर दशकों पुरानी छूट खत्म कर दी है. मिलावटी दवाओं को रोकने के लिए अब फार्मा कंपनियों पर सख्त नियम लागू होंगे.

Cough Syrup New Rules in India: जब भी बच्चे या बड़े बीमार पड़ते हैं, चाहे उन्हें खांसी हो, बुखार हो या सर्दी तो सबसे पहले सिरप (Syrup) यानी पीने वाली दवाइयों का ही इस्तेमाल होता है. ये दवाएं पीने में आसान होती हैं, इसलिए हर घर में आसानी से मिल जाती हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि जो सिरप आप अपने बच्चे को दे रहे हैं, वह पूरी तरह से सुरक्षित है या नहीं? इसी सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए और मिलावटी दवाओं पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने और अहम फैसला लिया है.

सरकार ने कफ सिरप और अन्य सभी लिक्विड दवाओं को दशकों से मिल रही खास छूट को पूरी तरह से खत्म कर दिया है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 9 जून 2026 को सरकारी गजट में नया नोटिफिकेशन जारी किया है, जिससे दवा बनाने वाली कंपनियों पर अब पहले से कहीं ज्यादा सख्त नियम लागू होंगे.

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क्या है सरकार का नया फैसला?
सरकार ने ड्रग्स रूल्स 1945 में पांचवां संशोधन किया है. इसके तहत दवाओं की खास लिस्ट Schedule K में से सिरप शब्द को हटा दिया गया है. इस फैसले को आसान शब्दों में समझें तो अब सिरप बनाने वाली कंपनियों को मनमानी करने का मौका नहीं मिलेगा. उन्हें अपनी दवा बाजार में उतारने से पहले कई सख्त परीक्षणों और नियमों से गुजरना होगा. नए नियम के तहत अब भारत में बनने वाले हर कफ सिरप और अन्य लिक्विड दवाओं को उसी सख्त प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिससे टैबलेट्स और इंजेक्शन गुजरते हैं.

क्या था Schedule K और इससे क्या मिलती थी छूट?
Schedule K भारतीय दवा कानून की ऐसी लिस्ट थी, जिसमें शामिल दवाओं को कुछ खास सरकारी नियमों से छूट दी जाती थी.

लाइसेंस की छूट: इस सूची में होने के कारण सिरप बनाने और बेचने के लिए कंपनियों को कुछ खास तरह के कड़े लाइसेंसिंग नियमों से राहत मिली हुई थी.
लेबलिंग और पैकेजिंग: सिरप की बोतलों पर लगने वाले लेबल और उसकी पैकिंग को लेकर नियम थोड़े ढीले थे.
आसान प्रॉडक्शन: इस छूट का फायदा उठाकर कई छोटी और गैर-मानक कंपनियां भी आसानी से सिरप बनाकर बाजार में बेच रही थीं, जिनकी क्वालिटी चेकिंग उतनी सख्ती से नहीं होती थी.
सिरप शब्द के इस सूची से बाहर होने का सीधा मतलब यह है कि यह वीआईपी ट्रीटमेंट अब खत्म हो गया है.

सरकार को क्यों उठाना पड़ा यह कदम?

इस सख्त फैसले के पीछे कुछ बेहद दुखद और गंभीर घटनाएं हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया में भारतीय दवा उद्योग की साख पर सवाल खड़े कर दिए थे. साल 2022 और 2023 के दौरान गाम्बिया और उज्बेकिस्तान जैसे देशों में कई बच्चों की जान चली गई थी. जांच में पता चला कि इसके पीछे कथित तौर पर भारत की कंपनियों Marion Biotech और Maiden Pharmaceuticals के बनाए गए कफ सिरप जिम्मेदार थे. इन सिरप में जहरीले केमिकल पाए गए थे.

इन घटनाओं के बाद भारत सरकार, स्वास्थ्य मंत्रालय और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गए. उन्होंने दवा कंपनियों पर निगरानी बढ़ा दी और यह तय किया कि ऐसी घटना दोबारा न हो. यह नया संशोधन उसी दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है.

आम जनता और मरीजों को क्या होगा फायदा?

इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा सीधे तौर पर आम आदमी और मरीजों को होने वाला है. इस कदम के बाद बाजार से घटिया और मिलावटी कफ सिरप पूरी तरह गायब हो जाएंगे. अब हर सिरप को सख्त क्वालिटी टेस्ट से गुजरना होगा, जिससे खतरा कम होगा. दवा की बोतल पर अब ज्यादा साफ और सटीक जानकारी लिखी होगी, जिससे एक्सपायरी डेट और साइड इफेक्ट्स समझना आसान होगा.

दवा कंपनियों पर क्या पड़ेगा असर?
इस बदलाव का सीधा असर दवा बनाने वाली कंपनियों पर पड़ेगा. उन्हें अब Syrup बनाने, पैक करने और बेचने में ज्यादा नियमों का पालन करना होगा. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इससे बाजार में मिलावटी और घटिया लिक्विड दवाओं पर लगाम लगेगी और मरीजों को ज्यादा सुरक्षित दवाएं मिलेंगी.

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About the author वरुण भसीन

वरुण भसीन एबीपी न्यूज़ में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. पिछले 9 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वे एयरलाइंस, रेलवे और सड़क-परिवहन से जुड़ी खबरें कवर करते हैं. इससे पहले वे कई संस्थानों में काम कर चुके हैं. वरुण न्यूज जगत से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाते आए हैं. वरुण ने MBM यूनिविर्सिटी जोधपुर से पढ़ाई की है. संपर्क करने के लिए मेल आईडी है- varunb@abpnetwork.com

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