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इन्फ्रा प्रोजेक्ट में तेजी लाने के लिए भारत ने बनाया अपना 'गूगल मैप'

पीएम गति शक्ति मिशन भारत सरकार की 100 लाख करोड़ रुपए की योजना है. जिसका मकसद इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में रिफॉर्म लाना है.

अहमदाबाद से 40 किमी दूर धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (धोलेरा सर) को देश के पहले स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है. धोलेरा स्मार्ट सिटी गुजरात की नवीनतम परियोजनाओं में से एक है जो भारत के सभी प्रमुख स्मार्ट शहरों के लिए एक उदाहरण के रूप में खड़ा होने की उम्मीद है. यह एशिया की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड परियोजना होने जा रही है. 

920 वर्ग किमी विस्तार में विकसित हो रहे धोलेरा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट सबसे बड़ा ग्रीनफिल्ड इंडस्ट्रीयल इन्वेस्टमेंट रिजीयन और इंडीयन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल द्वारा प्लेटिनम रेटिंग प्राप्त करने वाला भारत का सर्वप्रथम इंडस्ट्रीयल स्मार्ट सिटी है. इस शहर में 1.5 मिलियन लोग रह सकेंगे. यह स्मार्ट सिटी सिंगापोर जैसे देश के विकसित विस्तार की तुलना में भी बड़ा है. 

2012 में, जब इस शहर को बनाने की योजना शुरू हुई तब नौकरशाहों ने पाया कि इस स्मार्ट सिटी से निकटतम रेलवे स्टेशन भीमनाथ नामक एक छोटे से गांव में 22 किमी दूर था. अब एक ऐसा स्मार्ट सिटी जो 920 वर्ग किमी में बसने वाला है और जिसकी तुलना सिंगापुर जैसे विकसित देश से की जाने वाली है, वैसी स्मार्ट सिटी का रेलवे स्टेशन से कनेक्टिविटी इतनी दूर नहीं होनी चाहिये.  इसके अलावा, यह जरूरी है कि धोलेरा को शहर में उत्पादित माल की आसान शिपमेंट के लिए रेलवे के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जोड़ा जाए. 

गुजरात में किया गया गति शक्ति पोर्टल को लॉन्च 

धोलेरा इंडस्ट्रियल सिटी डेवलपमेंट लिमिटेड ने समस्या का हल निकालते हुए अपने एक डिजिकल मानचित्र को देखते हुए रेलवे से संपर्क किया और  एक ऐसा वाहन तैयार कर रहा है जो रेलवे कनेक्टिविटी को इस सिटी से जोड़ने का काम करेगी. इस परियोजना में गुजरात सरकार और केंद्र सरकार दोनों ही भागीदार हैं. हालांकि इसका प्रतिनिधित्व नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NICDC) ट्रस्ट कर रहा है. 

उस समय, इन संगठनों के साथ काम करने वाले अधिकारियों को यह नहीं पता था कि जिन डिजिटर नक्शों का उन्होंने इस्तेमाल किया जा रहा है, वो आज गति शक्ति के रूप में जाना जाएगा. या यूं कहें कि इस योजना का स्टार्टिंग प्वाइंट बन जाएगा. 

गुजरात में सबसे पहले गति शक्ति पोर्टल को लॉन्च किया गया था. इस पोर्टल के गुजरात सरकार ने इसी साल यानी 2022 की जनवरी में लॉन्च किया था. इस पोर्टल में गति शक्ति के तहत किए गए 21 सरकारी विभागों, 52 उप- विभागों और डेटा के 500 से ज्यादा परतों का एकीकरण है. 

गति शक्ति पोर्टल के फायदे


इन्फ्रा प्रोजेक्ट में तेजी लाने के लिए भारत ने बनाया अपना 'गूगल मैप

इस पोर्टल से उद्योगों की कार्य क्षमता बढ़ाने में मिलेगी मदद. इसके साथ ही स्थानीय विनिर्माताओं को बढ़ावा मिलेगा. उद्योगों के बीच बेहतर होने को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. भविष्य के आर्थिक क्षेत्रों के निर्माण के लिए नई संभावनाओं के विकास को भी मदद मिलेगी. इस पोर्टल की मदद से असंबद्ध योजनाओं की समस्या को दूर किया जा सकेगा. साथ ही थ्री डी विज्‍वलाइजेशन मैपिंग से कम लागत आएगी. डैशबोर्ड आधारित पीरियाडिक मॉनिटरिंग, प्लानिंग टूल, और सैटेलाइट से मिली इमेजेस का भी सहारा लिया जाएगा. पोर्टल के तहत सभी  मंत्रालयों को एक लागिन आईडी दी जाएगी, जिसके जरिए वो डाटा को अपडेट कर सकेंगे. इस पर डाले गए सभी डाटा एक प्‍लेटफार्म पर इंटीग्रेट होंगे.

क्या है पीएम गति शक्ति योजना 

पीएम गति शक्ति मिशन भारत सरकार की 100 लाख करोड़ रुपए की योजना है. जिसका मकसद इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में रिफॉर्म लाना है. इस योजना का लक्ष्य भारत सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों के अंतर्गत चल रहे विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में तालमेल के साथ में उन्हें पूरा करना है. यह बुनियादी ढांचे की योजना के Google मानचित्र की तरह है. इस मिशन के तहत मोदी सरकार ने 16 मंत्रालयों को एक जगह लाया गया है, जो समन्वय के साथ काम करेंगे. इसमें रेलवे, सड़क एवं राजमार्ग, पेट्रोलियम एवं गैस, टेलीकॉम, पावर, एविएशन और शिपिंग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय शामिल हैं.  

एम गति शक्ति मिशन की सबसे पहले चर्चा 15 अगस्त 2021 को पीएम मोदी ने लाल किले से की गई थी. इसके बाद 13 अक्टूबर 2021 को प्रधानमंत्री ने यह योजना लॉन्च की थी. वहीं इससे पहले भारत सरकार ने देश में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए नेशनल, इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन और नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन का ऐलान कर चुकी है. इस कड़ी में पीएम गति शक्ति मिशन सरकार की तीसरी योजना है.  

योजना से मिलने वाले लाभ 

  • पीएम गति शक्ति मिशन के तहत मेड इन इंडिया के सभी प्रोडक्ट्स को ज्यादा बढ़ावा दिया जाएगा. 
  • पीएम गति शक्ति मिशन को शुरू करने के लिए 100 लाख करोड़ रुपए का बजट निर्धारित है. 
  • भारत के सभी लोकल मैन्युफैक्चरिंग को विश्व के स्तर पर प्रतियोगी बनाया जाएगा. वहीं विभिन्न प्रोडक्ट्स को आपस में जोड़ा जाएगा. 
  • पीएम गति शक्ति मिशन से ज्यादा लोगों को रोजगार देना और देश के विकास पर ध्यान केंद्रित है.
  • पीएम गति शक्ति मिशन के जरिए देश के हर कोने में ट्रांसपोर्ट, 24 घंटे पानी और बिजली की सुविधा मुहैया करवाने का लक्ष्य है. 
  • योजना के जरिए देश के नागरिकों के जीवन के सरल बनाना है. 
  • पीएम गति शक्ति मिशन जरिए नए इकोनॉमिक जोन का विकास करना. 
  • देश की अर्थव्यवस्था को तेज गति देने का लक्ष्य.

धोलेरा के नक्शे इस पीएम गति शक्ति का छोटा सा नमूना है. पिछले 1 साल में इसके तहत दो डिफेंस कॉरिडोर और 11 इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने की योजना बनाई है, जिसके अंतर्गत हर गांव को 4जी नेटवर्क के दायरे में लाया जाएगा. वहीं एनएच यानी कि नेशनल हाईवे नेटवर्क का दो लाख किलोमीटर तक विस्तार, 220 नए एयरपोर्ट, वाटर एयरोड्रम और हेलीकॉप्टर्स बनाने की योजना है. इसके साथ ही सरकार का 17,000 किलोमीटर नई गैस पाइपलाइन का बड़ा नेटवर्क खड़ा करने की योजना है.  

वहीं किसी भी परियोजना की शुरुआत करने से पहले उसकी डिटेल रिपोर्ट बनाने में साइट का दौरा और जमीनी अनुसंधान किया जाता है, जिसमें काफी समय भी लगता है.  लेकिन एनआईसीडीसी का दावा है कि गति शक्ति पोर्टल के इस्तेमाल से ये समय बचेंगे. जबकि कई सरकारी एजेंसियां और विभाग अभी भी तेजी से और अधिक कुशल परियोजना प्रबंधन के लिए उपकरण का उपयोग करने की कला सीख रहे हैं, एनआईसीडीसी पहले से ही दिल्ली-मुंबई, मुंबई-बेंगलुरु, बेंगलुरु सहित 11 राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारों की योजना बनाने में इसका व्यापक रूप से उपयोग कर रहा है. 


इन्फ्रा प्रोजेक्ट में तेजी लाने के लिए भारत ने बनाया अपना 'गूगल मैप

किसने बनाया गति शक्ति पोर्टल 

यह सॉफ्टवेयर गांधीनगर स्थित वैज्ञानिक समाज, भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेशन एंड जियो-इन्फॉर्मेटिक्स (बीआईएसएजी-एन) द्वारा विकसित किया गया है.  2020 के आसपास गुजरात सरकार ने सबसे पहले राज्य परियोजनाओं के लिए बीआईएसएजी-एन की सेवाओं का इस्तेमाल किया था. पीएम मोदी उस वक्त धोलेरा के लिए इस्तेमाल किए जा रहे डिजीटल नक्शों के बारे में भी जानते थे. वह चाहते थे कि बीआईएसएजी-एन और एनआईसी एक ऐसे टूल का निर्माण करें जो भारत को व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा दे सके. 

जब कैबिनेट ने पिछले साल अक्टूबर में गतिशक्ति को मंजूरी दी, तो इसका प्राथमिक उद्देश्य उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम राजमार्ग गलियारों सहित 1,390 मेगा परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना था. इसे बाद में 500 करोड़ से अधिक की लागत वाली परियोजनाओं को शामिल करने के लिए संशोधित किया गया है. 

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