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प्राणायाम से यूं ही झटपट दूर हो जाएगी पिंपल की समस्या!
Written By : ABP News Bureau | Updated at : 17 Jan 2017 03:27 PM (IST)
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अनुलोम-विलोम के लिए आप स्थिर होकर या तो पद्मासन में बैठिए या अर्धपद्मासन में बैठिए नहीं तो चौकड़ी मारकर भी इसका अभ्यास कर सकते हैं. अनुलोम विलोम प्रणायाम के दौरान सीधे बैठकर अपनी बाएं हथेली को पताका मुद्रा में लेकर गोद में रखिए जिससे ये ब्रह्मांजली मुद्रा बन जाएगी. फिर आपको देखना है कि आपका कौन सा स्वर चल रहा है बायां या दायां, क्योंकि हमारा अलग-अलग समय पर अलग-अलग स्वर काम करता है.
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यदि आपका बायां स्वर चल रहा है तो दाएं नाक को अंगुठे से बंद करेंगे और बाएं नाक से सांस भरेंगे. पूरा गहरा सांस लेंगे और तीसरी अंगुली से बाएं नाक के छिद्र को बंद करके दाएं नाक से पूरा सांस छोड़गे. जिस स्वर से सांस छोड़ा है उसी से दोबारा सांस लें और दूसरी साइड से सांस छोड़ दें.
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ये पहला स्टेप है ऐसा आपको कम से कम पांच बार और अधिक से अधिक 15 बार करना है. इससे आपकी नाडि़या शुद्ध होंगी और त्वचा से पिंपल और एक्ने की समस्या दूर होगी.
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नियमित रूप से नाड़ी शोधन प्रणायाम का अभ्यास करने से बहुत लाभ मिलता है साथ ही इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं है और इसे हर व्यक्ति कर सकता है. नाड़ी शोधन प्रणायाम के पहले चरण को अनुलोम-विलोम प्रणायाम के नाम से जाना जाता है. अनुलोम-विलोम का रोजाना अभ्यास त्वचा पर होने वाले पिंपल से दूर रखता है.
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योग आचार्य प्रतिष्ठा का कहना है कि हमारा शरीर एक खूबसूरत मशीन है , इसमें 72 हजार नाडि़या हैं. इन नाडि़यों से अलग-अलग हमारा शरीर कनेक्ट होता है. इन नाडि़यों को शुद्ध करने के लिए नाड़ी शोधन प्रणायाम करना चाहिए.
Published at : 17 Jan 2017 03:03 PM (IST)
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