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सिगरेट नहीं पीते, फिर भी हो जाइए सावधान!

धूम्रपान करना ही नहीं, बल्कि तंबाकू के धुएं के संपर्क में आना भी बेहद खतरनाक है. ग्लोबल एडल्ट टौबैको सर्वे गेट्स इंडिया 2010 के हालिया अंकड़ों के अनुसार 52.3 फीसदी भारतीय अपने ही घर में, 29.9 फीसदी कार्य स्थल पर और 29 फीसदी सर्वजनिक स्थानों पर सैकेंड हैंड स्मोकिंग के संपर्क में आते हैं. तंबाकूके धुएं में 7000 से ज्यादा रसायन होते हैं, जिनमें से लगभग 70 रसायन कैंसर पैदा करने वाले होते हैं. तंबाकू के धुएं के अप्रत्यक्ष संपर्क आना भी खुद धूम्रपान करने जितना ही खतरनाक है. धूम्रपान करने वालों और उनके करीब रहने वालों की सेहत पर इससे पड़ने वाले बुरे प्रभावों को देखते हुए सख्त कानूनों को लागू कराने के लिए लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है. मैक्स बालाजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, पटपड़गंज के सहायक निदेशक एवं कार्डियक कैथ लैब के प्रमुख डॉ.मनोज कुमार ने कहा कि डब्लयूएचओ के मुताबिक, तंबाकू की वजह से दुनिया में हर साल 60 लाख लोगों की मौत हो जाती है, जिनमें से 6 लाख वैसे लोग भी शामिल हैं, जो खुद धूम्रपान नहीं करते, लेकिन इसके संपर्क में आ जाते हैं. कैलाश हॉस्पिटल एंड हार्ट इंस्टीच्यूट, नोएडा के सीनियर इंटरवेनशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संतोष अग्रवाल के मुताबिक, तंबाकू से निकले धुएं के संपर्क में आने वाले लोगों को पैसिव स्मोकिंग कहा जाता है. जो लोग इस माहौल में सांस लेते हैं, वे धूम्रपान करने वालों के समान ही निकोटिन और विषैले रसायन लेते हैं, जो हमारे शरीर के लिए बेहद खतरनाक हैं. पैसिव स्मोकिग गंभीर समस्या बनती जा रही है और इसका हल जरूरी है. चिकित्सा क्षेत्र के लोगों, नीति बनाने वालों और आम लोगों को मिलकर इसके बारे में काम करना होगा. धूम्रपान करने वालों और उनके परिवार को इससे होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करना और छोड़ने में मदद करना चाहिए. शोध के मुताबिक, जो लोग 35 से 39 की उम्र में धूम्रपान छोड़ देते हैं, उनकी उम्र 6 से 9 साल बढ़ जाती है. छोड़ने से फेफड़ों और गले के कैंसर, अस्थमा, सीओपीडी, कैट्रेक्ट और मसूड़ों की बीमारियां के साथ साथ दिल के रोगों का खतरा टल जाता है.
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