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World First City: कौन-सा था दुनिया का पहला शहर, आज कैसे हैं उसके हालात?

World First City: क्या आप जानते हैं कि दुनिया का पहला शहर कौन सा था? आइए जानते हैं कौन सा था वह शहर और कैसे हैं आज उस शहर के हालात.

World First City: जब भी हम इंसानी सभ्यता की शुरुआत के बारे में सोचते हैं तो सबसे पहले दिमाग में एक ही चीज आती है कि वह कौन सा शहर था जहां पर इंसानी सभ्यता आकर बसी थी. दरअसल इसका जवाब है उरुक.  आज के इराक में लगभग 4000 ईसा पूर्व में उभरा उरुक शहरी जीवन, लेखन और शानदार वास्तुकला का जन्म स्थान था. आइए जानते हैं आज के समय में क्या है इसकी हालत.

मानवता का पहला प्रमुख शहर

उरुक यूफ्रेट्स नदी के किनारे विकसित हुआ था. यहां उपजाऊ जमीन खेती, व्यापार और जनसंख्या वृद्धि में सहायक थी. लगभग 4000 ईसा पूर्व तक इस शहर में 60 हजार से ज्यादा निवासी बस चुके थे. इस तेजी से हुए शहरीकरण ने उरुक को एक बड़ी बस्ती बनाने के साथ-साथ मानव इतिहास के शुरुआती सच्चे शहर में से भी एक बनाया.

लेखन और संगठित समाज का जन्म स्थान 

दुनिया में उरुक का सबसे क्रांतिकारी योगदान में से एक था क्यूनिफॉर्म. यह पहली ज्ञात लेखन प्रणाली थी. शुरुआत में व्यापार और प्रशासनिक गतिविधि को रिकॉर्ड करने के लिए बनाई गई इस प्रणाली ने साक्षरता, रिकॉर्ड कीपिंग और साहित्य की नींव रखी. ऐसा उरुक नहीं हुआ था कि मानवता ने पहली बार मौखिक कहानी कहने से लिखित संचार की तरफ कदम बढ़ाया था. इसी के साथ यह शहर अपने संगठित शासन और मजबूत आर्थिक व्यवस्था के लिए भी पहचाना जाता था.

धर्म और शानदार वास्तुकला का केंद्र 

उरुक प्राचीन मेसोपोटामिया की कुछ सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक संरचनाओं का भी घर था. बड़े जिगुरेट्स पिरामिड जैसे मंदिर बनाए गए थे. यहां पर प्रेम और युद्ध की देवी इनन्ना को समर्पित मंदिर थे.

गिलगमेश का महाकाव्य 

उरुक की विरासत प्राचीन साहित्य के जरिए से भी जीवित है. गिलगमेश का महाकाव्य दुनिया की सबसे पुरानी जीवित कहानियों में से एक है. उरुक के आधे पौराणिक राजा गिलगमेश को एक वीर व्यक्ति के रूप में दिखाया जाता है जो गौरव और अमरता की तलाश में निकलता है. 

आज कैसा है उरुक?

हजारों साल बाद उरुक आज वारका के पुरातात्विक स्थल के रूप में बदल गया है. दक्षिणी इराक में बसा यह इलाका अब फैले हुए खंडहरों से भरा हुआ नजर आता है. यहां पर अब टूटी हुई दीवारें, मंदिर के अवशेष और उन इमारत के नींव की रूपरेखा नजर आती है जो कभी दुनिया की सबसे उन्नत शहरी बस्ती थी. अब यह जगह वीरान हो चुकी है लेकिन इसके बावजूद भी शुरुआती सभ्यता की यहां एक अनमोल झलक दिखती है. यहां पर शोधकर्ता वारका की खुदाई और अध्ययन करना जारी रखे हुए हैं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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