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नितिन गडकरी का क्लिप्ड वीडियो भ्रामक दावे के साथ शेयर किया गया

पोस्ट के साथ लिखा गया है, "आज गांव, गरीब, मज़दूर और किसान दुखी हैं. गावों में अच्छे रोड नहीं, पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं, अच्छे अस्पताल नहीं, अच्छे स्कूल नहीं हैं.- मोदी सरकार के मंत्री नितिन गडकरी"

निर्णय- भ्रामक


    वायरल क्लिप में नितिन गडकरी ने मोदी सरकार की आलोचना नहीं की. ग्रामीण-शहरी प्रवास पर चर्चा करने वाला उनका एक वीडियो बिना संदर्भ के शेयर किया गया है.

दावा क्या है?
कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट ने हाल ही में एक वीडियो पोस्ट किया था. इसमें दावा किया गया था कि केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पीएम मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार की आलोचना की थी. वीडियो में दिखाया गया है कि एक इंटरव्यू में गडकरी ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे और बुनियादी सुविधाओं की कमी का हवाला देते हुए गांवों, गरीबों, मजदूरों और किसानों की स्थिति पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं. पोस्ट इन क्षेत्रों में वर्तमान सरकार के प्रदर्शन से असंतोष की तरफ़ इशारा करता है.

यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है, इसे अब तक दस लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है.  पोस्ट के साथ कैप्शन दिया गया है, "आज गांव, गरीब, मज़दूर और किसान दुखी हैं. गावों में अच्छे रोड नहीं, पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं, अच्छे अस्पताल नहीं, अच्छे स्कूल नहीं हैं.- मोदी सरकार के मंत्री नितिन गडकरी"

इसे कई बड़े नेताओं और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आधिकारिक अकाउंट द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है. ऐसी पोस्टों के आर्काइव वर्ज़न यहांयहां और यहां देखे जा सकते हैं.

हालांकि, दावा भ्रामक है. वीडियो में नितिन गडकरी ग्रामीण-शहरी प्रवास पर चर्चा कर रहे थे, जिसके अगले हिस्से को काटकर बिना किसी संदर्भ के यह दावा करते हुए शेयर किया गया कि वह मोदी सरकार की आलोचना कर रहे थे.

हमने क्या पाया?
हमने पाया कि वायरल क्लिप 'द लल्लनटॉप' के शो 'जमघट' का है, जिसमें सौरभ द्विवेदी ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का इंटरव्यू लिया था. क़रीब एक घंटा बयालीस मिनट लंबा यह इंटरव्यू 29 फ़रवरी को लल्लनटॉप के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया था. इसमें वायरल क्लिप को 18:19 से 18:38 के बीच देखा जा सकता है.

बातचीत में, नितिन गडकरी भारत के विकास और जीडीपी में विनिर्माण और कृषि जैसे विभिन्न क्षेत्रों के योगदान पर चर्चा करते नज़र आते हैं. वह महात्मा गांधी के युग के बाद के सालों में ग्रामीण-शहरी प्रवास पैटर्न में बदलाव की व्याख्या करते हैं. उनके मुताबिक़, ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन अन्य क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास की कमी के कारण हुआ है. हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने सत्ता में आने के बाद से इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं.

नितिन गडकरी की टिप्पणियों की चुनिंदा क्लिपिंग और प्रसार से सरकार की ग्रामीण विकास नीतियों पर उनके रुख की ग़लत व्याख्या हुई है. इंटरव्यू के लंबे वर्ज़न से स्पष्ट होता है कि गडकरी ग्रामीण विकास में ऐतिहासिक और मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा कर रहे थे, सरकार की आलोचना करने के बजाय उसके द्वारा किए गए कामों को स्वीकार कर रहे थे.

उनका पूरा बयान था, "हमारे देश के विकास में हमारी एग्रीकल्चर ग्रोथ जीडीपी रेट में कॉन्ट्रिब्यूट करती है केवल 12 परसेंट, हमारी मैनूफैकचरिंग (विनिर्माण) सेक्टर कॉन्ट्रिब्यूट करता है 22 से 24 परसेंट, और सर्विस सेक्टर 52 से 54 परसेंट. हमारे एग्रीकल्चर पर जो पॉपुलेशन डिपेंड करती है, वह है 65 परसेंट. जब गांधी जी थे, तब नब्बे प्रतिशत आबादी गांव में रहती थी और धीरे-धीरे ये 30 परसेंट का माइग्रेशन क्यों हुआ? इसका कारण आज गांव, ग़रीब, मजदूर, किसान दुखी हैं. इसका कारण यह है कि जल, जमीन, जंगल और जानवर, रूरल एग्रीकल्चर ट्राइबल. ये जो इकोनॉमी है, यहां अच्छे रोड नहीं हैं, पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं है, अच्छे अस्पताल नहीं हैं, अच्छे स्कूल नहीं हैं, किसान की फ़सल को अच्छे भाव नहीं हैं, और ये जो सस्टेनेबल डेवलपमेंट हुई है. पर जिस प्रपोर्शन (अनुपात) में बाकी क्षेत्रों में हुआ, उतना नहीं हुआ. हमारी सरकार आने के बाद हम भी बहुत काम कर रहे हैं.

इसके अलावा, नितिन गडकरी के आधिकारिक एक्स अकाउंट ने संदर्भ को स्पष्ट करने के लिए एडिटेड वीडियो और मूल वीडियो के बीच तुलना करने वाला एक शेयर किया. 

निर्णय
ग्रामीण-शहरी प्रवास पर चर्चा करते नितिन गडकरी के एक वीडियो को क्लिप किया गया और बिना संदर्भ के शेयर किया गया. केंद्रीय मंत्री मोदी सरकार की आलोचना नहीं कर रहे थे जैसा कि दावा किया गया है. इसलिए, हम वायरल दावे को भ्रामक मानते हैं. 

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट पहले logicallyfacts.com पर छपी थी. स्पेशल अरेंजमेंट के साथ इस स्टोरी को एबीपी लाइव हिंदी में रिपब्लिश किया गया है. एबीपी लाइव हिंदी ने हेडलाइन, कंटेंट और फोटो में बदलाव करके रिपोर्ट को रिपब्लिश किया है.

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