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Explained : चीन के पड़ोसी देश वियतनाम में क्यों नहीं हुई कोरोना से एक भी मौत?

चीन के पड़ोसी देश वियतनाम में कोरोना पॉजिटिव लोग हैं. लेकिन अब भी उस देश में कोरोना की वजह से एक भी मौत नहीं हुई है.

अब ये एक स्थापित सच है कि कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के वुहान से हुई. वुहान से निकले वायरस ने पहले चीन और फिर पूरी दुनिया में तबाही मचाई. ये तबाही अब भी जारी है. लेकिन चीन का ही एक पड़ोसी देश है, जो दुनिया की तबाही के बाद भी खुद को बचा ले गया है. उस देश का नाम है वियतनाम, जहां कोरोना की वजह से अब तक एक भी शख्स की मौत नहीं हुई है.

करीब 10 करोड़ की आबादी वाले वियतनाम की सीमाएं चीन से भी लगती हैं. 26 अप्रैल की शाम तक चीन में कोरोना के कुल मामले 84,325 थे, जबकि वियतनाम में यह आंकड़ा महज 270 का है. चीन में मौतों की संख्या 4,662 तक है, जबकि वियतनाम का दावा है कि कोरोना या फिर कोविड 19 की वजह से उसके यहां एक भी मौत नहीं हुई है. आखिर इसकी वजह क्या है, इसे समझने की कोशिश करते हैं.

चीन में दिसंबर के आखिर में कोरोना की पुष्टि हुई. वियतनाम ने जनवरी के आखिर में दावा किया कि उसके यहां भी कोरोना का मरीज है. और जब वियतनाम ने अपने यहां कोविड 19 पॉजिटिव पेशेंट की पुष्टि की, उसके ठीक बाद ही चीन से लगने वाली अपनी पूरी सीमा को सील भी कर दिया. इसके अलावा एयरपोर्ट्स पर इंटरनेशनल फ्लाइट्स से आने वाले लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई. जब थोड़े से मामले बढ़े और पता चला कि हर संक्रमित शख्स का वास्ता किसी दूसरे देश से है, तो वियतनाम ने विदेश से आने वाले हर नागरिक को 14 दिनों तक क्वॉरंटीन करने का आदेश जारी कर दिया. लोगों को क्वॉरंटीन में रखने के लिए सरकार की ओर से होटल बुक किए गए और उनका भुगतान किया गया. इसके अलावा मार्च के आखिर आते-आते वियतनाम ने हर तरह के विदेशी नागरिकों के देश के अंदर आने पर रोक लगा दी. वियतनामी मूल के विदेशी नागरिक हों या फिर वियतनाम में रहने वाले लोगों के रिश्तेदार, किसी को भी वियतनाम में दाखिल होने की इजाजत नहीं दी गई.

इसके अगले चरण में सरकार ने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू की. यानि कि जिन लोगों को कोरोना की वजह से आइसोलेशन में रखा गया था, उनसे मिलने वाले हर आदमी का कोरोना टेस्ट किया गया. इतना ही नहीं वियतनाम ने कोरोना की टेस्टिंग के लिए किसी भी दूसरे देश यहां तक कि अपने पड़ोसी देश चीन का भी भरोसा नहीं किया. उसने खुद से टेस्टिंग किट बनाई और लोगों का टेस्ट शुरू कर दिया. सरकारी एजेंसियों की ओर से वीडियो और पोस्टर के जरिए अपने नागरिकों को जागरूक करने का भी काम किया गया.

और नतीजा सबके सामने है. अमेरिका जैसी महाशक्ति, चीन जैसा देश, स्पेन, इटली और जर्मनी जैसी शक्तियां जिस वायरस के आगे कमजोर पड़ गई हैं, वियतनाम जैसा छोटा और आर्थिक तौर पर कमजोर देश, अमेरिका से लड़ाई करके अपना सबकुछ गंवाने के बाद फिर से उठ खड़ा हुआ देश कोरोना के कहर से भी खुद को बचा ले गया है. अब दुनिया की नज़र में वो नज़ीर है कामयाबी की. मिसाल है कोरोना से निपटने के लिए अपनाई गई रणनीति की. लेकिन इस रणनीति की कुछ खामियां भी हैं, जिसकी बात हो रही है.

कहा जा रहा है कि वियतनाम ने अपने नागरिकों को जबरन क्वॉरंटीन किया और क्वॉरंटीन सेंटर में उन्हें सुविधाएं भी नहीं दी गईं. विदेश से आने वाले लोगों को खोज-खोजकर निकाला गया और कोरोना संक्रमित न होने के बाद भी उन्हें जबरन क्वॉरंटीन किया गया. इसके अलावा आलोचना की एक वजह और है. और वो ये है कि सरकार ने लोगों को ही कोरोना रोकने के काम में लगा दिया, जिसकी वजह से लोग अपने पड़ोसियों पर ही नज़र रखने लगे. हर वियतनामी एक जासूस बन गया, जिसका काम अपने पड़ोसी की जासूसी करना रह गया था. रही सही कसर वियतनामी सेना ने पूरी कर दी, जिसने लोगों को घरों में कैद करने के लिए सड़क पर उतरकर हथियार थाम लिए.

आप वियतनाम को वन पार्टी स्टेट कह सकते हैं. उसे तानाशाह बता सकते हैं, अपनी मर्जी का मालिक बता सकते हैं. लेकिन इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि जिस कोरोना की वजह से दुनिया में करीब दो लाख लोगों की मौत हुई है, उसी कोरोना से वियतनाम में अब तक एक भी मौत नहीं हुई है और ये एक बड़ी उपलब्धि है.

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