लोकसभा चुनाव: कानुपर में बंद पड़ी चीनी मिलें चुनावी मुद्दा, स्मार्ट सिटी और शिक्षा पर भी चर्चा
कानपुर में लोकसभा चुनाव के लिये सोमवार को मतदान होना है. यह इलाका अपनी खस्ताहाल मिलों के लिये एक बार फिर चर्चा में है. बीते 25 साल के दौरान यहां कई मिलें पूरी तरह बंद हो गईं, जिसके चलते कई फैक्टरियों के कुशल कामगारों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा.

कानपुर: कभी विभिन्न उद्योंगों का केंद्र रहने की वजह से ‘पूर्व का मैनचेस्टर’ कहे जाने वाले कानपुर में इस बार खस्ताहाल मिलों को पुनर्जीवित करने, स्मार्ट सिटी और शिक्षा प्रमुख चुनावी मुद्दों के तौर पर उभरे हैं.
एक समय उच्च गुणवत्ता के ऊनी उत्पादों के लिये दुनियाभर में मशहूर कानपुर के सिविल लाइन्स इलाके में स्थित 'लाल इमली' मिल आज भले ही बुरे दौर से गुजर रही हो लेकिन ऐसी ही मिलों ने अपने स्वर्णिम काल में कानपुर को 'पूरब का मैनचेस्टर' बनाया था.
कानपुर में लोकसभा चुनाव के लिये सोमवार को मतदान होना है. यह इलाका अपनी खस्ताहाल मिलों के लिये एक बार फिर चर्चा में है. बीते 25 साल के दौरान यहां कई मिलें पूरी तरह बंद हो गईं, जिसके चलते कई फैक्टरियों के कुशल कामगारों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा.
हालांकि, इस चुनाव में कानपुर की पुरानी औद्योगिक विरासत को फिर से जीवित करने की जगह इसे स्मार्ट सिटी बनाने का शोर कहीं ज्यादा सुनाई दे रहा है.
पार्टी के उम्मीदवारों से लेकर पहली बार मतदान कर रहे युवा एक स्वच्छ और हरे-भरे शहर, यातायात प्रबंधन की समग्र नीति, कानपुर मेट्रो और नौकरियों पर चर्चा कर रहे हैं.
21 वर्षीय रवि कुमार लोकसभा चुनाव में पहली बार मतदान करने जा रहे हैं. इससे पहले उन्होंने राज्य के विधानसभा चुनाव में मतदान किया था. सिविल लाइन्स इलाके में 'लाल इमली' की इमारत के नजदीक पॉश कैफे में बैठे रवि के लिये शिक्षा सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है.
उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि मेरा कानपुर समृद्ध हो, और राजनीति का शिकार न हो, जोकि दशकों से रहा है. मैं एक स्मार्ट शहर चाहता हूं. लेकिन इससे भी ज्यादा हम युवाओं को नौकरी की जरूरत है, ताकि लोग दूसरे शहरों में पलायन नहीं करें."
कानपुर की ही रहने वाली अंकिता आईआईएम-रांची से एमबीए कर रही हैं. उनका कहना है कि वह इस साल मतदान नहीं कर सकतीं क्योंकि वह नोएडा में एक कंपनी में इंटर्नशिप कर रही हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि वह स्मार्ट सिटी के अलावा एक समय शहर को समृद्ध और मशहूर बनाने वाली इन मिलों को पुर्नजीवित होते देखना चाहती हैं.
उन्होंने कहा, "हमें अपना अतीत नहीं भूलना चाहिये. कानपुर अपनी मिलों और 'चमड़े के शहर' के रूप में मशहूर है. हमें एक चमकीले भविष्य के लिये आगे कदम बढ़ाने चाहिये लेकिन अपनी विरासत की अनदेखी नहीं करनी चाहिये, जो कानपुर को पहचान देती है."
इस बीच उम्मीदवारों का मतदाताओं से वादे करने का सिलसिला भी लगातार जारी है.
कानपुर सीट से बीजेपी उम्मीदवार सत्यदेव पचौरी ने कहा कि अगर वह जीतते हैं तो स्मार्ट सिटी मिशन परियोजनाओं को 'बिना देरी' किये अमल में लाएंगे.
सत्यदेव से जब मिलों के उद्धार के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मैंने उनकी मौजूदा हालत के बारे में आकलन नहीं किया है. लिहाजा, यह फिलहाल हमारे चुनावी एजेंडे में मुख्य रूप से शामिल नहीं है.
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