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सरकारी स्कूलों छोड़ रहे स्टूडेंट्स, प्राइवेट स्कूलों में बढ़ रहा दाखिला, शिक्षा मंत्रालय ने जताई चिंता

सरकारी स्कूलों में लगातार घट रही छात्र-छात्राओं की संख्या पर शिक्षा मंत्रालय ने चिंता जताई है. कई राज्यों में बड़े स्तर पर स्टूडेंट्स की संख्या सरकारी स्कूलों में कम हुई है.

देश के कई राज्यों में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या कम होती जा रही है, जबकि प्राइवेट स्कूलों में दाखिले लगातार बढ़ रहे हैं. यह चिंता का विषय बन गया है. केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने मार्च और अप्रैल में राज्यों के साथ हुई बैठकों में इस बात पर चर्चा की. खासकर समग्र शिक्षा योजना के तहत 2025-26 के प्रोजेक्ट्स पर बात करते हुए यह मुद्दा उठा.

मंत्रालय के अधिकारियों ने साफ किया कि महाराष्ट्र, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड जैसे कई राज्यों में सरकारी स्कूलों से छात्रों का पलायन हो रहा है. महाराष्ट्र में 2018-19 की तुलना में 2023-24 में सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में नामांकन कम हुआ है. केरल में भी 2022-23 की तुलना में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या घट रही है.

आंध्र प्रदेश के आंकड़े बताते हैं कि यहां कुल 61,373 स्कूलों में से करीब 73 फीसदी सरकारी हैं, लेकिन छात्र नामांकन का मात्र 46 फीसदी सरकारी स्कूलों में है, जबकि प्राइवेट स्कूलों में 52 फीसदी से ज्यादा. तेलंगाना में 42,901 स्कूलों में से 70 फीसदी सरकारी स्कूल हैं, लेकिन नामांकन में उनकी हिस्सेदारी केवल 38 फीसदी के करीब है. वहीं प्राइवेट स्कूलों में 60 फीसदी से ज्यादा छात्र हैं. उत्तराखंड में भी स्थिति इसी तरह की है, जहां सरकारी स्कूलों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद नामांकन कम है.

शिक्षा मंत्रालय ने इन राज्यों से इस समस्या की जड़ तक जाने और सुधार के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है. मंत्रालय ने बताया कि कोविड के बाद प्राइवेट स्कूलों की मांग बढ़ी है, क्योंकि माता-पिता बेहतर सुविधाओं और पढ़ाई के लिए निजी स्कूलों को प्राथमिकता देने लगे हैं.

तमिलनाडु में भी सरकारी स्कूल कुल स्कूलों का 64 फीसदी होते हुए भी नामांकन में सिर्फ 37 फीसदी हिस्सा लेते हैं, जबकि प्राइवेट स्कूलों में 46 फीसदी छात्रों का दाखिला है. मंत्रालय ने इस स्थिति में सरकारी स्कूलों की ब्रांडिंग पर जोर दिया है ताकि वहां बच्चों की संख्या बढ़ सके.

छोटे बच्चों में प्राइवेट स्कूलों की बढ़ रही लोकप्रियता

केरल और महाराष्ट्र ने इस कमी को लेकर डेटा की सफाई (आधार सत्यापन के जरिए) करने की बात कही है, लेकिन मंत्रालय को अब भी इस गिरावट पर चिंता है. मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में भी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में नामांकन घटा है. दिल्ली, अंडमान-निकोबार, लद्दाख, पुडुचेरी और दादरा नगर हवेली जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी प्राइवेट स्कूलों में दाखिला सरकारी स्कूलों से ज्यादा है.

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा छोटे बच्चों की कक्षाओं में प्राइवेट स्कूलों में दाखिला ज्यादा होता है. हम राज्यों से अनुरोध कर रहे हैं कि वे इस पलायन के कारणों का पता लगाएं और समाधान निकालें. माता-पिता की आकांक्षाएं बढ़ने के साथ प्राइवेट स्कूलों की मांग बढ़ी है.

यूडीआईएसई+ 2023-24 डेटा

यूडीआईएसई+ 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार देश में कुल 24.80 करोड़ छात्रों में से लगभग 9 करोड़ (36 फीसदी) प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे हैं. यह प्रतिशत 2022-23 और 2021-22 में 33 फीसदी था. कोविड से पहले 2019-20 में यह 37 फीसदी था.

शिक्षा मंत्रालय की यह चेतावनी बताती है कि सरकार को सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने, सुविधाएं बढ़ाने और भरोसा जीतने के लिए तेजी से कदम उठाने होंगे, नहीं तो सरकारी शिक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है. देश के लिए यह चुनौती है कि वह सभी बच्चों को समान और अच्छी शिक्षा पहुंचा सके, खासकर उन परिवारों तक जो प्राइवेट स्कूलों की पहुंच से बाहर हैं.

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