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चुनौतियों के बावजूद 2026 में भारतीय इकोनॉमी जबरदस्त ग्रोथ के साथ बढ़ सकती है आगे, RBI रिपोर्ट की मुहर

केंद्रीय बैंक के अनुसार, अनुकूल वित्तीय परिस्थितियों, सुदृढ़ बहीखातों और बाजारों में अपेक्षाकृत कम उतार-चढ़ाव ने इस मजबूती को सहारा दिया है, हालांकि वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताएं निकट अवधि में जोखिम बनी हुई हैं.

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  • भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बनी रहेगी।
  • अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी व नकदी भंडार है।
  • सूक्ष्म वित्त खंड में उधारकर्ताओं पर बढ़ते कर्ज बोझ से सतर्क रहें।
  • आगे चलकर माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में परिसंपत्ति गुणवत्ता पर दबाव आ सकता है।

RBI Financial Stability Report: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत वृद्धि पथ पर बने रहने की संभावना है, जिसे मजबूत घरेलू मांग, नियंत्रित मुद्रास्फीति और संतुलित व्यापक आर्थिक नीतियों का सहारा मिल रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी ताजा वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में कहा है कि देश की घरेलू वित्तीय प्रणाली मजबूत बनी हुई है, जहां अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी और नकदी भंडार है, परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार हुआ है और लाभप्रदता भी मजबूत है.

भारत की बनी रहेगी ग्रोथ

केंद्रीय बैंक के अनुसार, अनुकूल वित्तीय परिस्थितियों, सुदृढ़ बहीखातों और बाजारों में अपेक्षाकृत कम उतार-चढ़ाव ने इस मजबूती को सहारा दिया है, हालांकि वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताएं निकट अवधि में जोखिम बनी हुई हैं.

आरबीआई के दबाव परीक्षण बताते हैं कि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी बैंक संभावित नुकसान झेलने में सक्षम हैं और उनकी पूंजी नियामकीय न्यूनतम स्तर से काफी ऊपर बनी रहेगी.

भारत की मजबूत फाइनेंस सिस्टम

इसके साथ ही म्यूचुअल फंड कंपनियां, समाशोधन निगम, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) और बीमा क्षेत्र भी पर्याप्त पूंजी, स्थिर आय और बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता के चलते मजबूत स्थिति में हैं. यह आकलन वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (एफएसडीसी) की उप-समिति द्वारा किए गए समग्र मूल्यांकन को दर्शाता है, जो भारतीय वित्तीय प्रणाली की मजबूती और वित्तीय स्थिरता से जुड़े जोखिमों की पुष्टि करता है.

ऋण बही में बढ़ते दबाव पर हो नजर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने छोटी राशि के कर्ज देने वाले वित्तीय संस्थानों को अपने ऋण बही-खातों में संभावित दबाव को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है. केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए जारी ‘बैंकिंग में रुझान और प्रगति’ रिपोर्ट में कहा कि सूक्ष्म वित्त (माइक्रोफाइनेंस) खंड में हाल की तिमाहियों में चुनौतियां सामने आई हैं, जिनकी मुख्य वजह उधारकर्ताओं पर बढ़ता कर्ज बोझ है.

आरबीआई के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में दक्षिणी राज्यों, खासकर कर्नाटक और तमिलनाडु में ऋण वितरण की रफ्तार अपेक्षाकृत कमजोर रही है. यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब इन राज्यों में उद्योग को प्रभावित करने वाले कई नीतिगत और नियामकीय कदम उठाए गए हैं. केंद्रीय बैंक ने कहा कि भले ही प्रदर्शन में सुधार के लिए उद्योग की ओर से कई पहल की गई हैं, लेकिन आगे चलकर इस खंड में परिसंपत्ति गुणवत्ता पर दबाव बनने की आशंका को देखते हुए विनियमित इकाइयों को कड़ी निगरानी बनाए रखने की जरूरत है. आरबीआई ने संकेत दिया कि माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में सतर्क ऋण वितरण और जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना आने वाले समय में अहम होगा.

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