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Coronavirus की स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो दुनिया में मंदी का संकेत- McKinsey & Company की रिपोर्ट

McKinsey & Company की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस का असर लंबे समय तक रहा तो इसका ग्लोबल इकॉनॉमी पर जो निगेटिव असर होगा वो ज्यादा व्यापक होगा.

नई दिल्लीः कोरोना वायरस या कोविड-19 के कहर को दुनियाभर के कई देश झेल रहे हैं. कोरोना वायरस एक ऐसी त्रासदी बनकर सामने आया है जिससे विश्व का कोना-कोना प्रभावित हो रहा है. कोरोना वायरस के भारत में भी मामले बढ़ते जा रहे हैं और इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 147 पर पहुंच गई है. दुनियाभर में इस वायरस के चलते करीब 8000 लोगों की मौत हो गई है. कोविड-19 वायरस का असर सिर्फ लोगों के जीवन पर ही नहीं पड़ रहा है बल्कि कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं इसके नकारात्मक असर को झेल रही हैं.

ऐसे में मैक्किंज़े एंड कंपनी ने इस वायरस के बिजनेस जगत पर पड़ने वाले असर को देखते हुए अपनी रिपोर्ट्स निकाली हैं. इसमें देशों के कारोबार, अर्थव्यवस्थाओं, संस्थाओं पर होने वाले छोटी अवधि और लंबी अवधि के प्रभावों पर विस्तार से बात की गई है. इन रिपोर्ट्स के जरिए ये भी पता चल पा रहा है कि कई देश जो कोरोना वायरस से प्रभावित हैं वो कितनी अच्छी तरह इससे लड़ पा रहे हैं.

रिपोर्ट में बताया गया है कि चूंकि 11 मार्च को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नोवल कोरोना वायरस या कोविड-19 को महामारी घोषित किया है तो इसके देशों पर क्या दूरगामी परिणाम पड़ सकते हैं. मैक्किंज़े एंड कंपनी के मुताबिक इसके चलते ग्लोबल अर्थव्यवस्था में दो परिदृश्य देखने को मिल सकते हैं.

पहला परिदृश्य- रिकवरी में थोड़ी ही देर होगी और कोरोना वायरस का ग्लोबल इकोनॉमी पर हल्का असर दिखेगा

इस परिदृश्य में देखा जाए तो अमेरिका और यूरोप में कोरोना वायरस के मामले अप्रैल के मध्य तक दिखते रहेंगे और इनकी संख्या भी बढ़ेगी. कर्मचारी अपने ट्रैवल को कम करेंगे और खुद को सेल्फ क्वारंटीन की स्थिति अपनाकर भी सुरक्षित होने का प्रयास करेंगे. आने वाले पतझड़ के मौसम को देखते हुए ये कहना मुश्किल है कि वायरस तेजी से खत्म हो जाएगा लेकिन देशों के जरिए अपनाए जा रहे सुरक्षा के उपायों का असर दिखेगा और लोगों का मानना है कि कुछ हद तक मई के मध्य तक लोगों को इस वायरस से शायद छुटकारा मिल पाए. हालांकि इसका कारोबार पर लंबे समय तक असर देखा जाएगा.

आर्थिक असर लार्ज स्केल क्वारंटीन, ट्रैवल पर बैन और लोगों की आपस में और संस्थानों से अपनाई जा रही दूरी का असर दिखेगा और कंज्यूमर और बिजनेस स्पेंडिंग में दूसरी तिमाही के आखिर तक एक अच्छी खासी गिरावट देखी जाएगी. इसके असर से मंदी की शुरुआत होती देखी जाएगी. हालांकि एक राहत की बात ये है कि दूसरी तिमाही के आखिर तक इस मंदी को दूर करने के प्रयास किए जाएंगे और तीसरी तिमाही के अंत तक ये मंदी जा सकती है. खरीदार खरीदारी करने नहीं जाएंगे और घरों में रहेंगे, कारोबार अपना रेवेन्यू खोएंगे और कर्मचारियों की छंटनी करेंगे जिसके चलते बेरोजगारी दरें कई देशों में काफी ऊपर जाएंगी. कारोबारी निवेश कम होने, कॉरपोरेट के दिवालिया होने के कई दृश्य नजर आएंगे और इसका काफी बड़ा असर देशों के बैंकिंग और फाइनेंशियल सिस्टम पर देखा जाएगा और ये नकारात्मक ही होगा.

जैसा कि कई देश कर भी रहे हैं लेकिन ये स्थिति आगे भी देखी जाएगी कि इस वायरस के असर को कम करने के लिए मौद्रिक नीतियों में नरमी बरती जाएगी. इसके चलते देशों की ब्याज दरें नीचे जाएंगी और सिस्टम में नरम रुख के असर से आर्थिक मंदी का जो दौर आएगा वो दूसरी और तीसरी तिमाही तक भी खत्म नहीं हो पाएगा. इसका साफ अर्थ है कि यूरोपियन और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को एक अच्छी रिकवरी देखने के लिए चौथी तिमाही तक का इंतजार करना पड़ेगा जिसकी वजह से साल 2020 में ग्लोबल जीडीपी में एक गिरावट देखी जाएगी.

Coronavirus की स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो दुनिया में मंदी का संकेत- McKinsey & Company की रिपोर्ट

दूसरा परिदृश्य- लंबी अवधि तक चलने वाला असर

इस सिनेरियो में कोरोना वायरस की महामारी का असर अमेरिका और यूरोप में मई तक भी शीर्ष तक नहीं पहुंचेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि टैस्टिंग में की जा रही देरी और सोशल डिस्टेंसिंग सिस्टम को अपनाने में की जा रही टालमटोल के चलते सामान्य जन के स्वास्थ्य पर असर दिखेगा. ये वायरस कोई मौसमी वायरस नहीं साबित हो रहा है लिहाजा इसके मरीजों के केस सामने आने का दौर पूरे साल भर भी जारी रह सकता है. अफ्रीका और एशियाई देशों में भी कुछ देश इस महामारी के असर को झेलेंगे. हालांकि प्रतिशत के हिसाब से देखें तो जिन देशों में युवा जनसंख्या ज्यादा है वहां पर मौतों के मामले बुजुर्गों वाली जनसंख्या के मुकाबले कम देखे जाएंगे. यहां तक कि वो देश जो इस महामारी को नियंत्रित करते दिख रहे हैं जैसे कि चीन, उसके लिए भी ये जरूरी होगा कि वो अपने यहां सामान्य जन के स्वास्थ्य के लिए लगातार ऐसे कदम उठाता रहे जिससे कि ये खतरनाक वायरस फिर न दहशत मचा पाए.

आर्थिक असर दूसरे परिदृश्य की स्थिति में पूरे साल भर यानी 2020 में डिमांड पर निगेटिव असर दिखेगा और ये साल भर जारी रहेगा. जिन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा असर देखा जाएगा वहां कॉरपोरेट छंटनी और दिवालिएपन के मामले सबसे ज्यादा देखे जाएंगे जो कि पूरे 2020 में चलता रहेगा और ये निगेटिव असर एक चक्र पैदा कर देगा जिसके चलते ऐसी स्थितियां बार-बार आएंगी. फाइनेंशियल सिस्टम तो दबाव झेलेगा ही लेकिन माना जा रहा है कि पूरे प्रभाव वाले बैंकिंग संकट से शायद हम रूबरू न हों क्योंकि बैंकों में कैपिटलाइजेशन की व्यवस्था कर दी जाएगी, ऐसे संकेत दिख रहे हैं. हालांकि गिरावट के दौर को रोकने के लिए वित्तीय और मौद्रिक नीतियां काफी नहीं होंगी और ये डाउनवर्ड रुझान को कम नहीं कर पाएंगी.

अगर ये दूसरा सिनेरियो प्रभाव में आता है तो साफ है कि इसका वैश्विक असर काफी गंभीर होगा और ये 2008-09 जैसे वित्तीय संकट की तरह बनता दिखेगा. साल 2020 में अधिकांश मुख्य अर्थव्यवस्थाएं जीडीपी की गिरावट के असर में रहेंगी और रिकवरी आने के लिए 2021 की दूसरी तिमाही का इंतजार करना होगा क्योंकि ये तभी शुरू होगी.

नोटः ये दोनों परिदृश्य मैक्किंज़े एंड कंपनी ने 16 मार्च तक की स्थिति के आधार पर तय किए हैं और इसमें परिस्थिति बदलने पर बदलाव हो सकता है.

मैक्किंज़े एंड कंपनी एक ग्लोबल मैनेजमेंट कंसलटेंट फर्म है और सीनियर मैनेजमेंट से जुड़े मुद्दों को सुलझाने पर ध्यान देती है. मैक्किंज़े दुनिया के टॉप के कारोबारों, सरकारों और संस्थाओं के लिए एक एडवाइजर के तौर पर काम करती है. मैनेजमेंट से जुड़े कंसलटेंट इंडस्ट्री में यह शीर्ष और सबसे प्रतिष्ठित कंपनियों में से एक है.

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