एयर इंडिया में हिस्सा बेचने के लिए सरकार की कवायद तेजः भेजा कैबिनेट नोट

नई दिल्लीः एय़र इंडिया में सरकारी हिस्सेदारी बेचे जाने के लिए एक कैबिनेट नोट मंत्रालयों को उनके राय जानने के लिए भेजा गया है. उम्मीद है कि अगले 2 से 3 हफ्ते के भीतर इस मामले पर कैबिनेट की बैठक में चर्चा होगी.
एबीपी न्यूज को उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक,
एयर इंडिया में रणनीतिक बिक्री का प्रस्ताव है. मतलब ये हुआ कि सरकार कम से कम अपनी 51 फीसदी और ज्यादा से ज्यादा पूरी हिस्सेदारी निजी हाथों को बेच सकती है.
बहरहाल, ये साफ है कि हिस्सेदारी किसी भी विदेेशी कंपनी को नहीं बेची जाएगी. वैसे विदेशी निवेश के मौजूदा नियमों के तहत किसी भी शेडयूल एय़रलाइंस (ऐसी एयरलाइन कंपनी जो सरकार की अनुमति के आधार पर अपनी उड़ानों का टाइम टेबल प्रकाशित करती है और उस आधार पर सेवाएं मुहैया कराती है) में 100 फीसदी तक विदेशी निवेश की इजाजत है, लेकिन विदेशी एय़रलाइंस सिर्फ 49 फीसदी हिस्सेदारी ही ले सकती है.
एय़र इंडिया का आधा बकाया कर्ज माफ हो सकता है. इससे नए निवेशक पर कोई ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा. कंपनी पर कुल बकाया कर्ज 40 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा का है.
एयर इंडिया के विनिवेश की अटकलों का बाजार तो काफी समय से गरम है, लेकिन सरकार की ओर से पहली बार स्पष्ट तस्वीर पिछले महीने वित्त मंत्री अरुण जेटली के बयान में नजर आयी. जेटली ने कहा कि विमानन बाजार में 8 फीसदी से हिस्सा निजी कंपनियों के पास है. ऐसे में महज 14 फीसदी हिस्सेदारी के लिए करदाताओं के 55,000 से 60,000 करोड़ रुपये का उपयोग कितना जायज है. उन्होंने कहा कि सरकार को 15 साल पहले एयर इंडिया से बाहर हो जाना चाहिए था. उन्होने जानकारी दी कि वो नीति आयोग के कर्ज में डूबी एयरलाइंस के निजीकरण के विचार से सहमत हैं लेकिन इस मुद्दे पर सरकार निर्णय करेगी. बाद में विमानन मंत्रालय ने साफ किया कि नीति आयोग की रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है और उसके आधार पर उचित प्रस्ताव तैयार किया जाएगा.
मनमोहन सिंह सरकार ने एयर इंडिया का टर्नअराउंड प्लान मंजूर किया था जिसके तहत 2021 तक कुल मिलाकर 30,231 करोड़ रुपये का निवेश किया जाना तय हुआ. 31 मार्च 2017 तक सरकार 24745.21 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है. एय़र इंडिया को 2013-14 में 6279.30 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था जबकि 2014-15 में ये रकम 5859.91 करोड़ रुपये और 2015-16 में 3836.77 करोड़ रुपये रही.
Source: IOCL


























