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नेट बैंकिंग, कार्ड, ई वॉलेट से बिटक्वॉयन खरीदने पर लगी रोक, आरबीआई खुद जारी कर सकता है वर्चुअल करेंसी

रिजर्व बैंक ने बैंकों और ई वॉलेट सेवा मुहैया कराने वालो को ये भी निर्देश दिया है कि उनका बिटक्वॉयन लेन-देन करने वालों से मौजूदा कारोबारी रिश्तें को पूरी तरह से खत्म करने के लिए तीन महीने का समय मिलेगा.

नई दिल्लीः अब आप अपने ई वॉलेट, नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्स से बिटक्वॉयन जैसी क्रिप्टोकरेंसी नहीं खरीद सकेंगे. क्योंकि रिजर्व बैंको ने ऐसी किसी तरह की सुविधा पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का ऐपान किया है. दूसरी ओर रिजर्व बैंक खुद ही डिजिटल करेंसी लागू करने के बारे में सुझाव देने के लिए एक कमेटी बनाने का ऐलान किया है.

केद्रीय बैंक ने बैंक और ऐसी तमाम संस्थाओं को निर्देश दिया है, जिसको वो नियमित करता है, कि वो ऐसी तमाम संस्थाओं और व्यक्तियों को कोई सुविधा मुहैया नहीं कराएंगे जो बिटक्वॉयन जैसे आभासी मुद्राओं में लेन-देन करते हैं या जुड़े सौदों को निबटारा करता है. चूंकि ई वॉलेट मुहैया कराने लिए रिजर्व बैंक से लाइसेंस लेना पड़ता है और नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड बैंकिंग सेवाओं का हिस्सा है, ताजा निर्देश के बाद साफ है कि इन सब का इस्तेमाल बिटक्वॉयन की खरीद-फरोख्त में नहीं किया जा सकेगा.

रिजर्व बैंक ने बैंकों और ई वॉलेट सेवा मुहैया कराने वालो को ये भी निर्देश दिया है कि उनका बिटक्वॉयन लेन-देन करने वालों से मौजूदा कारोबारी रिश्तें को पूरी तरह से खत्म करने के लिए तीन महीने का समय मिलेगा. ध्यान रहे कि कई बैंकों बिटक्वॉयन का कारोबार करने वालों का खाता है. इसके अलावा विभिन्न डिजिटल माध्यमों से ऐसी मुद्रा के लेन-देन को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं थी. उम्मीद है कि अब ऐसी कोई अनिश्चितता नहीं रहेगी.

खुद का वर्चुअल करेंसी इस बीच, रिजर्व बैंक ने एक कमेटी बनाने का ऐलान किया जो आरबीआई के वर्चुअल करेंसी लाने के बारे में सुझाव देगा. बैंक का कहना है कि ये मौजूदा कागजी मुद्रा के अतिरिक्त होगी. कागजी मुद्रा की छपाई वगैरह पर खर्च भी काफी होता है जबकि वर्चुअल करेंसी को लेकर इस तरह की परेसानी नहीं होगी. फिलहाल, अभी स्ष्पट नहीं है कि ये वर्चुअल करेंसी कब आएगी.

क्या है बिटक्वॉयन या वर्चुअल करेंसी बिटक्वॉयन, क्रिप्टो असेट या क्रिप्टो करेंसी का आम बोलचाल की भाषा में नाम है. भले ही इसके नाम में करेंसी या क्वॉयन जुड़ा हो, लेकिन दुनिया के किसी भी केंद्रीय बैंक मसलन, भारतीय रिजर्व बैंक ने इसे जारी नहीं किया है. ध्यान रहे कि अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था, “ सरकार क्रिप्टो करेंसी लीगल टेंडर य् क्वाइन पर विचार नहींकरती है और अवैध गतिविधियों को धन उपलब्ध कराने अथवा भुगतान प्रणाली के एक भाग के रुप में इन क्रिप्टो परिसंपत्तियों के प्रयोग के समाप्त करने के लिए सभी प्रकार का कदमउटाएगी.”

सरकार, रिजर्व बैंक पहले भी कर चुके हैं आगाह सरकार कई मौकों पर कह चुकी है कि बिट क्वॉयन या क्रिप्टो करेंसी को वैध नहीं मानती. इस बारे में समयसमय पर लोगों को आगाह भी किया गया. दूसरी ओर रिजर्व बैंक ने 24दिंसबर 2013, पहली फरवरी 2017 और फिर पांच फरवरी 2017 को लोगों को आगाह किया. लेकिन परेशानी ये है कि इस करेंसी को भले ही वैध नहीं माने जाने की सूरत में कार्रवाईको लेकर अभी तक कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है. इसी वजह से देश में अभी भी लोग बिटक्वॉयन की खरीद-बेच रहे हैं.

वित्त मंत्रालय पहले भी बिटक्वॉयन समेत तमाम वर्चुअल करेंसी के खतरे के प्रति लोगों को आगाह किया. साथ ही इसे एक तरह का पोंजी स्कीम भी माना है जिसमें भारी मुनाफे केलालच में लोग पैसा लगाते हैं, लेकिन बाद में मूल के भी लाले पड़ जाते है. मंत्रालय का कहना है कि ना तो सरकार औऱ ना ही रिजर्व बैंक ने वर्चुअल करेंसीको लेनदेन के माध्यम के रुपमें किसी तरह की मान्यता दे रखी है. इसके प्रति सरकार का कोई ‘फिएट’ (रुपया-पैसा फिएट करेंसी है, यानी सरकार ने उसे कानूनी तौर पर लेन-देन के माध्यम के रुप में मान्यता देऱखी है) भी नही है.

वर्चुअल करेंसी ना तो कागजी नोट के रुप में नजर आता है और ना ही धातु के सिक्के के तौर पर. लिहाजा वर्चुअल करेंसी ना तो नोट है और ना ही सिक्का. सरकार या किसी भी नियामक ने किसी भी एजेंसी, संस्था, कंपनी या बाजार मध्यस्थ को बिटक्वॉयन जारी करने का लाइसेंस दे रखा है. मंत्रालय का साफ तौर पर कहना है कि जो लोग भी इसमेंपैसा लगा रहे हैं, वो अपने जोखिम पर ही ऐसा कर रहे हैं.

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